पिता खींचता रहा स्ट्रेचर, मां भिगोती रही चुन्नी, धूप में अस्पताल तक तड़पता रहा बेटा

Aman Vaishnav | Jun 07, 2026, 14:37 IST
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इंदौर में 12 साल के बीमार बच्चे को माता-पिता धूप में स्ट्रेचर पर एक किमी तक खींचते रहे। एमवाय और सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के बीच रेफरल में कोई सहायता नहीं मिली। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन जांच में जुटा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इंदौर के एक 12 साल के बीमार बच्चे को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल रेफर किया गया।
  • किसी की मदद न मिलने से मजबूर पिता को खुद ही स्ट्रेचर धकेलना पड़ा।
  • धूप से बच्चे को बचाने के लिए मां चुन्नी को पानी में भिगोकर उसके ऊपर डालती रही।
  • अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया।
  • मौके पर मदद के लिए कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था।

धूप में बच्चे की तकलीफ

शनिवार, 06 जून के दोपहर की बात है। इंदौर की तेज धूप और उमस भरी गर्मी में एक परिवार परेशान था। 12 साल का आदर्श रीढ़ की हड्डी की बीमारी से जूझ रहा था। एमवाय अस्पताल ने उसे सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल रेफर किया था।



मुश्किल यह थी कि कोई अस्पताल कर्मचारी मदद के लिए नहीं था। न स्ट्रेचर उठाने वाला, न व्हीलचेयर चलाने वाला। मजबूरन पिता ने खुद स्ट्रेचर धकेला। मां ने अपनी चुन्नी पानी में भिगोकर बेटे पर डाली।



एक किलोमीटर का यह सफर किसी आजमाइश से कम नहीं था। परिवार ने कई बार मदद मांगी। लेकिन मौके पर कोई नहीं आया।



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सुपर स्पेशिएलिटी पहुंचे तो मिली निराशा

जब परिवार मुश्किल से सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल पहुंचा तो वहां की बात सुनकर होश उड़ गए। वहां के कर्मचारियों ने बताया कि बच्चे को भर्ती नहीं करना। बस मेडिकल फाइल और दस्तावेज देखने हैं।



यह सुनकर परिवार का दिल टूट गया। धूप, गर्मी और थकान के बाद अब उन्हें फिर से वापस जाना था। पिता ने दोबारा स्ट्रेचर उठाया। मां ने फिर चुन्नी भिगोई। और वे वापस एमवाय अस्पताल लौट आए।



15 दिन से चल रहा इलाज

परिवार का कहना है कि आदर्श का पिछले 15 दिनों से इलाज चल रहा है। पहले उसे न्यू चेस्ट वार्ड में रखा गया था। बाद में एमवाय अस्पताल में इलाज शुरू हुआ।



रेफरल के बाद रेफरल। अस्पताल के बाद अस्पताल। इस चक्कर में परिवार की ताकत और हिम्मत दोनों जवाब दे चुके हैं।



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करोड़ों की व्यवस्था, फिर भी खाली हाथ

इंदौर के इन बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की जिम्मेदारी एक आउटसोर्स कंपनी की है। हर महीने इस पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं।



आरोप है कि जरूरत के वक्त स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिलते। कर्मचारी नदारद रहते हैं। साथ ही मरीज के परिवार को खुद ही सब कुछ करना पड़ता है।



यह पहली बार नहीं है। इससे पहले इसी आउटसोर्स कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठ चुके हैं। सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल परिसर में खड़ी एक गाड़ी से शराब की पेटियां मिलने पर भी सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में आई थी।



वायरल वीडियो के बाद हरकत में आए अधिकारी

जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर फैला तो अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। वे यह पता लगा रहे हैं कि बच्चे को एमवाय से रेफर किया गया था या चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय से।



सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के इंचार्ज सुपरिटेंडेंट डॉ. पीयूष पंचारिया ने बताया कि वे उस वक्त सर्जरी में थे। अब यह पता किया जा रहा है कि बच्चा वहां भर्ती है या नहीं।



सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक परिवार की तकलीफ नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो बड़े-बड़े दावे करती है। अगर करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी एक बीमार बच्चे को धूप में खींचकर ले जाना पड़े, तो सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामी है।



अब देखना यह है कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है। या फिर यह मामला भी कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा।



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