इंदौर में अवैध बैनर-पोस्टर पर हाईकोर्ट सख्त, 24 घंटे के भीतर हटाने के आदेश
समझें क्या है पूरा मामला
- इंदौर में अवैध बैनरों पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई।
- जबलपुर बेंच के आदेश लागू करने को कहा गया।
- शिकायत पर 24 घंटे में कार्रवाई होगी।
- नगर निगम और पुलिस को जिम्मेदारी दी गई।
- याचिका विज्ञापन कंपनी ने दायर की थी।
क्यों पहुंचा मामला हाईकोर्ट
इंदौर में राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में बैनर लगाए जाते हैं। इनमें कई बैनर बिना अनुमति लगाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे बैनर सार्वजनिक स्थानों के साथ निजी विज्ञापन संरचनाओं पर भी लगाए जाते हैं। इससे शहर की सुंदरता, सुरक्षा और नियमों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर एसएस एडवर्टाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड और अन्य की ओर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की गई। याचिका में मांग की गई कि बिना अनुमति लगाए जा रहे राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो।
मामले में राज्य सरकार, इंदौर कलेक्टर, इंदौर पुलिस, नगर निगम आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया। अदालत से कहा गया कि पहले से मौजूद नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसका नुकसान वैध विज्ञापन एजेंसियों और आम लोगों दोनों को उठाना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इस विषय में जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही स्पष्ट निर्देश दे चुकी है। इसलिए वही आदेश इंदौर में भी लागू होंगे।
कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का भी पालन करने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन इन आदेशों को गंभीरता से लागू करे। इससे पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू करने का रास्ता साफ होगा।
सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह रहा कि यदि किसी अवैध राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक बैनर की शिकायत मिलती है तो नगर निगम आयुक्त 24 घंटे के भीतर उसे हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस भी कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।
इस आदेश के बाद नगर निगम और पुलिस दोनों की जवाबदेही पहले से अधिक स्पष्ट हो गई है। अब केवल शिकायत दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं होगा। प्रशासन को तय समय सीमा में कार्रवाई भी करनी होगी।
याचिका में क्या कहा गया
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल बहेती ने अदालत के सामने कई अहम तथ्य रखे। उन्होंने बताया कि उनकी मुवक्किल संस्था नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर यूनिपोल, लॉलीपॉप और अन्य आउटडोर विज्ञापन संरचनाओं का संचालन करती है।
इन संरचनाओं के लिए संस्था नियमित शुल्क और भारी राजस्व भी जमा करती है। इसके बावजूद कई लोग बिना अनुमति इन्हीं संरचनाओं पर राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा देते हैं। इससे अधिकृत विज्ञापन प्रभावित होते हैं और आर्थिक नुकसान होता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि कई बार विज्ञापन संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया। कुछ मामलों में वहां लगे कैमरे चोरी हो गए। लोहे के स्ट्रक्चर भी क्षतिग्रस्त किए गए। इससे निजी संपत्ति को नुकसान हुआ। याचिकाकर्ता का कहना था कि नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। जबकि अवैध बैनर लगाने वालों पर समय पर कार्रवाई नहीं होती।
कैमरे चोरी, निजी संपत्ति को भी नुकसान
अधिवक्ता विशाल बहेती ने अदालत के सामने विस्तार से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अधिकृत विज्ञापन संरचनाओं पर अवैध तरीके से बैनर लगाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में संरचनाओं पर लगे कैमरे चोरी हुए। लोहे के स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया गया। इससे निजी संपत्ति को भारी क्षति हुई। अधिवक्ता ने सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बिना प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों के ऊंचाई पर चढ़ना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
उन्होंने जबलपुर की एक घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें ऐसे काम के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई थी। इसी आधार पर अदालत से प्रभावी रोक लगाने की मांग की गई।
सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
याचिका में केवल संपत्ति के नुकसान की बात नहीं कही गई। इसमें लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अवैध बैनर लगाने वाले कई लोग प्रशिक्षित नहीं होते। वे बिना सुरक्षा उपकरणों के ऊंचे पोल और विज्ञापन संरचनाओं पर चढ़ जाते हैं। इससे गंभीर हादसे का खतरा बना रहता है।
क्यों अहम माना जा रहा फैसला
यह फैसला केवल इंदौर तक सीमित नहीं माना जा रहा। इससे यह संकेत गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति बैनर लगाने की प्रवृत्ति पर प्रशासन अब अधिक सख्ती दिखा सकता है।
राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और धार्मिक संस्थाएं अक्सर आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में बैनर लगाते हैं। लेकिन अब उन्हें तय नियमों का पालन करना होगा। अन्यथा नगर निगम और पुलिस कार्रवाई कर सकते हैं।
नगर निगम और पुलिस की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। अब किसी भी अवैध बैनर की शिकायत मिलने पर अधिकारी कार्रवाई टाल नहीं सकेंगे। अदालत ने साफ किया है कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर बैनर हटाना होगा।
इस कार्रवाई की निगरानी भी संबंधित अधिकारी करेंगे। यदि कोई लापरवाही सामने आती है तो जवाबदेही तय हो सकती है।
कोर्ट ने पुलिस की भूमिका भी स्पष्ट की है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल बैनर हटाना नहीं बल्कि भविष्य में नियम तोड़ने की घटनाओं को रोकना भी है।
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