इंदौर सहकारी संस्था घोटाला: गृह निर्माण संस्था ने 3.37 करोड़ हड़पे, ईओडब्ल्यू का 7 पर शिकंजा

Jitendra Shrivastava | May 05, 2026, 19:52 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. इंदौर सहकारी संस्था घोटाले में तत्कालीन अध्यक्ष ने जमीन 50 लाख में बेची, गाइडलाइन कीमत 3.37 करोड़ थी। ईओडब्ल्यू ने 7 आरोपियों पर IPC 409, 420, 120-B में केस दर्ज किया।

News In Short

  • जमीन की गाइडलाइन कीमत 3.37 करोड़, बेची 50 लाख में।
  • अध्यक्ष ने पत्नी की कंपनी में पैसा ट्रांसफर किया।
  • सदस्यों की जमीन की रकम का हुआ गबन।
  • EOW में IPC 409, 420 और 120-B में केस दर्ज।
  • ऑडिट रिपोर्ट से 3.37 करोड़ गबन की पुष्टि हुई।

News In Detail

इंदौर की करण गृह निर्माण सहकारी संस्था (Karan Grih Nirman Cooperative Society) में 3 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए के बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू (EOW Indore) ने तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी सहित 7 लोगों पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है।



संस्था और घोटाले की पृष्ठभूमि

इंदौर की करण गृह निर्माण सहकारी संस्था (Cooperative Housing Society Indore) वर्षों से सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से काम कर रही थी।



संस्था की आम सभा ने 20 मार्च 2005 को एक अहम प्रस्ताव पारित किया था। इसमें तय हुआ कि संस्था की जमीन बेचकर नई भूमि खरीदी जाएगी। यह नई जमीन सदस्यों के हित में उपयोग होनी थी।



उप पंजीयक, सहकारी संस्था इंदौर ने 2 मई 2008 को इसकी अनुमति दी। अनुमति में स्पष्ट शर्त थी कि जमीन का विक्रय सरकारी गाइडलाइन (Government Guideline Rate) के अनुसार ही होगा। उस समय जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत तीन करोड़ सैंतीस लाख पचहत्तर हजार रुपये आंकी गई थी।



जमीन औने-पौने दाम में बेची

अंकेक्षण वर्ष 2008-09 की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी ने संस्था की भूमि को मात्र 50 लाख रुपए में बेच दिया। यह रकम सरकारी गाइडलाइन से लगभग छह गुना कम थी। खरीदने वाली कंपनी थी रामकुंवर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड।



इस तरह शासन द्वारा निर्धारित शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया। संस्था के सदस्यों और सरकार दोनों को भारी आर्थिक नुकसान (Financial Loss) पहुंचाया गया। यह कदम पूर्णतः अवैध और जानबूझकर उठाया गया था।



3.37 करोड़ का गबन कैसे हुआ

जांच में पाया गया कि संस्था के खाते में 3 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए विभिन्न चरणों में जमा हुए थे। इस रकम में गाइडलाइन मूल्य के अनुसार राशि भी शामिल थी। लेकिन यह पूरी रकम सदस्यों के लिए जमीन खरीदने में नहीं लगाई गई। अध्यक्ष विजय राठी ने नकद आहरण कर पैसे का दुरुपयोग किया।



पैसे के हस्तांतरण के लिए दो कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। पहली थी तेजकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (Tejkaran Infrastructure Pvt. Ltd.)। दूसरी थी रामकुंवर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड। इन कंपनियों के जरिए धन को व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित किया गया।



विजय राठी की पत्नी नम्रता राठी को रामकुंवर बिल्डर्स में पहले डायरेक्टर बनाया गया। बाद में स्वयं विजय राठी भी उसी कंपनी के डायरेक्टर बने। यह पूरा ढांचा धन गबन के लिए एक सुनियोजित षड्यंत्र (Criminal Conspiracy) के रूप में सामने आया।



ऑडिट रिपोर्ट ने खोला राज

अंकेक्षण रिपोर्ट और संबंधित अंकेक्षकों के बयानों से गबन की पुष्टि हुई। जांच टीम को स्पष्ट साक्ष्य मिले कि रकम का उपयोग गलत तरीके से किया गया। यह धन संस्था के उद्देश्य के विपरीत खर्च हुआ। ऑडिट रिपोर्ट (Audit Report) से 3,37,75,000 रुपए के गबन की पूरी पुष्टि हो गई।



जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि संस्था की जमीन को निजी कंपनी को बेचकर उसी के माध्यम से रकम स्थानांतरित की गई। अंततः पैसे का गबन किया गया। यह एक संगठित वित्तीय अनियमितता (Organized Financial Fraud) का मामला था।



7 आरोपियों पर केस दर्ज

ईओडब्ल्यू (Economic Offenses Wing) इंदौर ने इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें संस्थाएं और व्यक्तिगत आरोपी दोनों शामिल हैं। करण गृह निर्माण सहकारी संस्था, तेजकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. और रामकुंवर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. तीनों संस्थाएं आरोपी हैं। व्यक्तिगत आरोपियों में विजय राठी, नम्रता राठी, अभय पुराणिक और ज्योति पुराणिक शामिल हैं।



कौन सी IPC धाराएं लगाईं

आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की तीन प्रमुख धाराओं में मामला दर्ज किया है। धारा 409 (Criminal Breach of Trust) यानी विश्वासघात के तहत केस दर्ज है। धारा 420 (Cheating) यानी धोखाधड़ी और धारा 120-B (Criminal Conspiracy) यानी आपराधिक षड्यंत्र भी लगाया गया है। ये धाराएं सिद्ध होने पर आरोपियों को लंबी कैद हो सकती है।



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