इंदौर बीजेपी नेता कॉलोनी विवाद: ऐसे खुली 1500 करोड़ की जमीन की कुंडली

Sanjay Gupta | Aug 14, 2026, 12:26 IST
बीजेपी नेता नीलेश चौधरी
इंदौर में बीजेपी नेता नीलेश चौधरी की स्वास्तिक ग्रैंड कॉलोनी के सीलिंग के दायरे में आने के बाद विकास मंजूरी निरस्त हो गई। वहीं यह केवल 200 करोड़ की जमीन का मामला नहीं है। जब इसकी जांच हुई तो पूरी कुंडली खुल गई और मामला 1500 करोड़ की जमीन तक पहुंच गया।

इंदौर जिला प्रशासन की कॉलोनी सेल ने जुलाई में बीजेपी नेता नीलेश चौधरी की स्वास्तिक ग्रैंड कॉलोनी की विकास मंजूरी निरस्त कर दी थी। वजह थी इस कॉलोनी के सर्वे नंबर में से चार हेक्टेयर जमीन का सीलिंग प्रभावित होना। यह मामला एक अन्य कॉलोनी लुमिनियस इन्फ्राप्रोजेक्ट्स (मेहुल पिता नवीन मेहता) के आवेदन पर खुला। वहीं इसके बाद जब आगे जांच हुई तो मामला और उलझ गया।

क्या है विवाद

बता दें कि चौधरी और उनके परिवार की सोनगीर गांव के हातोद तहसील की यह जमीन है। इन्हें जनवरी 2025 में विकास मंजूरी मिली थी। वहीं जब लुमिनियस इन्फ्रा ने आवेदन किया तो मई-जून में उनकी मंजूरी रोक दी गई। वजह थी कि इनकी जमीन के सर्वे नंबर सीलिंग प्रभावित आ रहे थे। जब पूछा गया तो बताया कि दिसंबर 2010 में (प्रकरण क्रमांक 0009 बी/बी-121/2010-11) एसडीएम हातोद के आदेश से यह जमीन निजी हो चुकी है। यही आदेश स्वास्तिक ग्रैंड में भी बताया है। एक ही आदेश से कई जमीनें सीलिंग से मुक्त होकर निजी हुई हैं। इसके बाद कॉलोनी सेल ने जांच की तो पाया कि यह आदेश कहीं मौजूद नहीं है। इसके बाद स्वास्तिक ग्रैंड की विकास मंजूरी निरस्त कर दी गई। साथ ही लुमिनियस प्रोजेक्ट को भी मना कर दिया गया।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला, वहां कही गई यह बात

इस मामले को लेकर स्वास्तिक ग्रैंड जहां संभागायुक्त ऑफिस में अपील में गया और कलेक्टर के आदेश पर अंतरिम रोक लग गई। इसमें सुनवाई जारी है। वहीं लुमिनियस ने हाईकोर्ट इंदौर में अपील कर दी। इसमें हाल ही में हुई सुनवाई में इंदौर जिला प्रशासन की कॉलोनी सेल ने अहम बात कही। शासकीय अधिवक्ता ने इसमें जवाब के लिए समय मांगा। साथ ही कहा कि जमीन के रिकॉर्ड की जांच करने पर गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिनका विस्तृत जवाब देना होगा। जवाब से पहले जांच जरूरी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने दो सप्ताह का समय दिया।

जांच में आया कि मामला तो 154 एकड़ जमीन का है

उधर जिला प्रशासन ने जब हातोद तहसील में इस गायब विवादित दिसंबर 2010 के आदेश की जांच कराई तो चौंकाने वाली बात सामने आई। यह पूरा मामला 10-20 एकड़ जमीन का नहीं है, बल्कि यह 154 एकड़ जमीन का विवाद है। इसकी आज की कीमत करीब 1500 करोड़ रुपए है। जांच में आया कि यह जमीन पूर्व के रिकॉर्ड में हिंदूसिंह नाम के व्यक्ति के नाम पर रही है। सीलिंग एक्ट में जमीन आ गई। पूरी जमीन 230 एकड़ से ज्यादा थी, जिसमें से 154 एकड़ सीलिंग में आ गई। हालांकि शुरुआती चरण में प्रशासन ने इस पर कब्जा नहीं लिया। ना ही राजस्व रिकॉर्ड में सीलिंग लिखा। बाद में साल 2006 से 2010 तक यह सीलिंग के नाम पर दर्ज की गई। मामला राजस्व बोर्ड तक गया और इसमें आदेश हुआ कि सक्षम अधिकारी यानी एसडीओ इसकी सुनवाई करे। यहां तक का तो आदेश है लेकिन इसके बाद दिसंबर 2010 के विवादित आदेश का कोई रिकॉर्ड कहीं पर भी नहीं है कि यह कैसे सीलिंग से निजी में दर्ज हो गई। यह आदेश नहीं मिलने के चलते यह पूरी 154 एकड़ जमीन उलझ गई है। ऐसे में इस जमीन के विविध टुकड़ों के सभी वर्तमान भूस्वामी इस जमीन के पेंच में फंस गए हैं।

किसी के पास भी यह आदेश मौजूद नहीं

बता दें कि प्रशासन द्वारा साल 2009 से लेकर 2011 तक हातोद के एसडीएम के सभी आदेश जांचे गए। रजिस्टर खंगाले गए, लेकिन यह आदेश नहीं मिला है। पुराना रिकॉर्ड खंगालने पर भी यह आदेश नहीं मिला है। वहीं स्वास्तिक ग्रैंड कॉलोनी के भूस्वामी हों या फिर लुमिनियस प्रोजेक्ट के मालिक, किसी के पास भी यह असल आदेश नहीं है, केवल केस नंबर और आदेश तारीख भर मौजूद है। इसके चलते आदेश नहीं मिलने से पूरी जमीन ही उलझ गई है।

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