इंदौर में बिल्डर को अवैध कॉलोनी केस से बचाने सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में पिता का नाम मप्र शासन बताया

Sanjay Gupta | May 21, 2026, 14:08 IST
indore land scam dharavera rau mp govt record fraud
इंदौर में अधिकारियों और बिल्डर के गठजोड़ से जमीन के खेल का एक और खुलासा हुआ है। मामला चार साल पुराना है। ये मामला तब खुला जब जमीन पर पट्टे बांटने की सुगबुगाहट हुई।

इंदौर में जमीन की जादूगरी का एक और मामला सामने आया है। राउ तहसील के ग्राम धरावरा की यह जमीन कुल 0.751 हेक्टेयर की है और कीमत करीब 15 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है।



अद्भुत बात ये है कि रिकॉर्ड में जमीन का मालिक लिखा है- शासकीय मध्यप्रदेश शासन पिता शासकीय मध्य प्रदेश शासन। हां, सही पढ़ा आपने, दोनों जगह मप्र शासन लिखा है।



असल में राजस्व रिकॉर्ड में अगर कोई सरकारी जमीन होती है तो मालिक सिर्फ मप्र शासन या शासकीय लिखा होता है, पिता मप्र शासन नहीं लिखा होता। यह जमीन तत्कालीन नायब तहसीलदार संजय गर्ग के कोर्ट के आदेश (8 जून 2020) के तहत सरकारी घोषित की गई थी।



indore-land-scam-dharavera-rau-mp-govt-record-fraud


बिल्डर ने 15 करोड़ की जमीन क्यों दान में दी

यह जमीन पूर्व रिकॉर्ड में एआर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के नाम पर थी। अब इसमें असल कहानी यह है कि बिल्डर ने यहां पर अवैध कॉलोनी काटी। साथ ही प्लॉट काटकर लोगों को बेच दिए और रजिस्ट्री करा दी। बाद में इंदौर कलेक्टर पद पर मनीष सिंह (कलेक्टर मनीष सिंह) आए। इसी दौरान अवैध कॉलोनी और भूमाफियाओं के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया गया।



इसी से बचने के लिए बिल्डर ने अवैध काटी और बेची गई इस 15 करोड़ की जमीन को दान देने का खेल रचा। इससे उस पर किसी तरह का केस भी नहीं हो और कमाई तो पहले हो चुकी थी।



45eac687-c04
8d144f33-0b4


whatsapp-image-2026-05-21-13-23-13


दानपत्र के जरिए कर दी सरकारी

इसमें आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार संजय गर्ग, पटवारी हेमराज दांगी और बाबू अखिलेश त्यागी ने मिलकर इस जमीन के रिकॉर्ड बदले हैं।



इसमें बिल्डर्स से जमीन दान करने का पत्र लिया गया और इस आधार पर कोर्ट में केस चलाकर इस जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया।



इससे पहले जमीन पर प्लॉट काटकर बेचे जा चुके थे। इसमें कई लोगों के पास रजिस्ट्री भी है। इसके लिए ना तो कलेक्टर से अप्रूवल लिया गया और ना ही जो दानपत्र के लिए अधिकृत प्रतिनिधि बनाकर। आवेदन लेकर प्रक्रिया की जाती है, वह की गई।



बिना कलेक्टर के अप्रूवल के जमीन को सरकारी घोषित कर रिकॉर्ड में चढ़ा दिया गया।



क्यों खुला यह मामला

दरअसल यह मामला छह साल पुराना है और अभी भी दबा रहता है, लेकिन अब जमीन के सरकारी रिकॉर्ड को देखते हुए यहां पर पट्टे बांटने की सरकारी योजना आई है।



इस पर यहां पर प्लॉट ले चुके लोग विरोध में आए कि हमने तो रजिस्ट्री की हुई है। पट्टे कैसे दिए जा सकते हैं? इसके बाद यह मामला द सूत्र के पास आया और इसका खुलासा हुआ।



क्या बोल रहे नायब तहसीलदार

वहीं देवास के कन्नौद में पदस्थ नायब तहसीलदार संजय गर्ग का कहना है कि हमने तो निजी को सरकारी जमीन किया है। यह तो सही किया है। दानपत्र के जरिए प्रक्रिया से किया होगा। इसमें कलेक्टर की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है। गलत कुछ भी नहीं है।



ये खबरें भी पढ़िए...



इंदौर में लॉरेंस गैंग की टूटी वसूली चैन, एक सदस्य के पास मिले बिल्डर को धमकाने के सबूत



इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को झटका, मुआवजा नहीं लेने वाले किसान की जमीन लेने पर लगी रोक



जेपी और अल्ट्राटेक अधिग्रहण में 54.40 करोड़ रुपए का बिजली बकाया फंसा



भोपाल वेस्टर्न बायपास का नया रूट मंजूर: 35.60 किमी लंबी सड़क,एक घंटा बचेगा समय



Tags:
  • इंदौर
  • मध्यप्रदेश शासन
  • कलेक्टर मनीष सिंह
  • अवैध कॉलोनी
  • नायब तहसीलदार