इंदौर के केवल चार भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति 1 अरब पार, ड्राइवर फिरोज से बड़े अधिकारी भी पिछड़े
सबसे बड़ा आसामी निकला फिरोज-64 करोड़
बता दें कि इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में ड्राइवर के पद पर तैनात फिरोज खान ने संपत्ति के मामले में बाकी सभी के आंकड़े पीछे छोड़ दिए हैं। 14 अक्टूबर को इंदौर और उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने मिलकर उनके ठिकानों पर छापा मारा था। पहले दिन करीब 6 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली थी। शाम तक यह आंकड़ा 12 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया।
इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो पहले देवास और फिर इंदौर में एक के बाद एक कई संपत्तियों का पता चला। ये संपत्तियां परिजनों के नाम पर बनी कंपनियों के पास मिलीं। अब इनकी कुल कीमत 64 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई।
छापेमारी में फिरोज के पास नौ वाहन और दो दर्जन बैंक खाते भी मिले हैं। उनकी मां, पत्नी और महिला मित्र के नाम पर कई कंपनियां भी सामने आई हैं। इन कंपनियों के नाम पर ही कई संपत्तियां दर्ज हैं। जांच में अब तक कुल 46 अचल संपत्तियां मिली हैं। वहीं फिरोज को नौकरी से कुल 75 लाख रुपए वेतन मिला था। दूसरे वैध स्रोतों से हुई कमाई को मिलाकर उनकी कुल वैध आय 1.93 करोड़ रुपए ही थी।
जॉइंट डायरेक्टर लक्ष्मीनारायण कंडवाल- 25 करोड़
बता दें कि लोकायुक्त ने 10 जून को महिला व बाल विकास विभाग के जॉइंट डायरेक्टर लक्ष्मीनारायण कंडवाल के यहां छापा मारा था। इनकी जांच में आया कि कंडवाल के पास 11 प्लॉट, खेती की जमीन, डिपार्टमेंट स्टोर व जिम है। इंदौर व धार में परिजनों के नाम पर संपत्तियां हैं।
इनकी कीमत 25 करोड़ से ज्यादा है। इंदौर में कई कीमती प्लॉट भी मिले थे। जबकि वैध कमाई वेतन व अन्य स्रोत से कुल ढाई करोड़ ही थी।
एसई शिवराम सेमिल- संपत्ति 17 करोड़
इसके अलावा लोकायुक्त इंदौर ने 25 जुलाई को पश्चिमी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एसई (अधीक्षण यंत्री) इंदौर शिवराम सेमिल पर छापा मारा था। उनके पीथमपुर, धार, मुरैना में आठ ठिकानों पर छापे हुए। सेमिल और उनके परिवार की चल-अचल संपत्तियों का आंकड़ा 17.12 करोड़ रुपए मिला। दामाद व पुत्र के नाम पर फर्म मिली, औद्योगिक प्लॉट मिले, फैक्ट्री भी बन रही थी। चार किलो चांदी, 300 ग्राम सोना व अन्य संपत्तियां भी मिलीं।
सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र पांडेय- 5 करोड़
लोकायुक्त ने 14 अगस्त को नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी एआरओ जितेंद्र कुमार पांडेय पर छापा मारा था। जांच में आया कि 31 साल की नौकरी में 80 लाख का वेतन मिला लेकिन संपत्ति 5 करोड़ की मिली। पांडेय के पास बिचौली हप्सी में सवा एकड़ कीमती जमीन मिली। वहीं 13 हजार 500 वर्गफीट का प्लॉट भी मिला। तीन मंजिला मकान, हॉस्टल यह सभी संपत्ति में मिले।
एमवायएच का फार्मासिस्ट राकेश गोरखे- 2.30 करोड़
वहीं इस साल ईओडब्ल्यू इंदौर ने एमवायएच के फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के यहां आय से अधिक कमाई में छापा मारा था। यह छापा मा दवाई खरीदी में फर्जीवाड़ा की शिकायत पर रा गया था। जांच में आया कि गोरखे को वेतन 1.11 करोड़ मिला, लेकिन संपत्ति 2.30 करोड़ की मिली।
धर्मेंद्र भदौरिया को भी पीछे छोड़ चुका फिरोज
वहीं लोकायुक्त इंदौर ने बीते साल अक्टूबर 2025 में रिटायर्ड जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया पर छापा मारा था। तब जांच के बाद संपत्ति का आंकड़ा करीब 35 करोड़ पार हो चुका था। इसमें अचल संपत्ति से ज्यादा तो भदौरिया के यहां मिलने वाले सोने ने जांच अधिकारियों के होश उड़ा दिए थे। भदौरिया के पास से करीब 10 करोड़ की कीमत का सोना मिला था। बैंक खातों में भी सवा करोड़ से ज्यादा कैश मिला था। आलीशान कोठी भी पाई गई थी।