मोरीवाला दरगाह की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कास्ट भी लगाई, इंदौर कलेक्टर लेंगे रिमूवल पर फैसला
इंदौर में माणिकबाग एरिया आईडीए स्कीम 44 में दो साल से मोरीवाले बाबा दरगाह को लेकर विवाद चल रहा है। इसमें हाईकोर्ट दो साल पहले ही रिमूवल संबंधी कार्रवाई के लिए नगर निगम को बोल चुका था। लेकिन बाद में निगम ने इसमें कलेक्टर के पाले में गेंद डाल दी।
इस जांच और कार्रवाई को रोकने के लिए वक्फ दरगाह ख्वाजा सुल्तान मोहम्मद चिश्ती मोरीवाले बाबा एक्टिंग प्रेसीडेंट इस्माइल खान द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त फैसला दिया है।
रिमूवल के लिए होना है फैसला
यहां करीब चार हजार वर्गफीट जमीन का मामला है। जिसमें संबंधित दरगाह संचालकों का कहना था कि यह आईडीए से मिली जमीन है। साथ ही यह भी तर्क दिए गए कि यह वक्फ संपत्ति है। लेकिन हाईकोर्ट से लेकर अन्य एजेंसी के पास इस संबंध में कोई भी दस्तावेज पेश नहीं हुए।
वहीं इस मामले में शिकायतकर्ता मनोज सोनी ने बताया कि यहां पार्किंग की तय जमीन पर दरगाह, मस्जिद और 14 दुकानें तानी गई। जिनका लाखों का किराया वसूला जा रहा है।
इस निर्माण की किसी एजेंसी से कोई मंजूरी नहीं है। इस पर हाईकोर्ट पहले ही निगम को 90 दिन में कार्रवाई को बोल चुका था। लेकिन निगम ने धर्मस्थल मामला होने के चलते कलेक्टर इंदौर के पास मामला भेज दिया। यहां पर केस और जांच चल रही है। इसी पर फैसला होना है।
जांच रूकवाने बेवजह लगाई याचिका
इस मामले में हाईकोर्ट बेंच जस्टिस संदीप भट्ट ने मोरीवाले दरगाह की ओर से लगी याचिका को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में साफ लगता है कि बेईमानी करने के इरादे से और जांच को धीमा करने, प्रभावित करने के लिए यह याचिका लगाई गई है।
इस मामले में पूर्व में भी हाईकोर्ट आदेश कर चुका है। इस संबंध में कलेक्टर फैसला लेंगे। साथ ही हाईकोर्ट का कीमती समय बर्बाद करने के लिए 15 हजार की कास्ट भी याचिकाकर्ता पर लगाई गई है।
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