इंदौर निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को राहत, 1 लाख की कॉस्ट हटी, हाईकोर्ट ने कहा- गलतियां हो जाती हैं

Sanjay Gupta | Nov 04, 2026, 20:00 IST
इंदौर निगमा​युक्त IAS क्षितिज सिंघल को हाईकोर्ट की डबल बेंच से राहत मिली है।
Indore Municipal Commissioner, IAS Kshitij Singhal, has received relief from a division bench of the High Court.
Indore. इंदौर नगर निगम आयुक्त आईएएस क्षितिज सिंघल को हाईकोर्ट से राहत मिली है। डबल बेंच ने एक लाख रुपए की कॉस्ट लगाने का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि गलतियां हो जाती हैं। लेकिन उनसे सीखना जरूरी है। मामला बाफना अस्पताल पर लगाए गए 1.65 करोड़ रुपए के टैक्स से जुड़ा है।

इस मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने नगर निगम के अधिकारियों पर नाराजगी जताई थी। साथ ही टैक्स डिमांड का आदेश जारी करने वाले अधिकारी पर एक लाख रुपए की कॉस्ट लगाई थी।



यह आदेश निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने जारी किया था। इसके खिलाफ नगर निगम ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की थी। अब डबल बेंच ने सुनवाई के बाद कॉस्ट का आदेश रद्द कर दिया है।



निगम ने दिया तर्क इससे मनोबल गिरेगा

हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच में सुनवाई हुई। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मुंशी ने निगम की ओर से तर्क रखे। उन्होंने कहा कि पहले ही निगम द्वारा सुनवाई के दौरान टैक्स डिमांड के आदेश को वापस लेने की बात कही गई थी। साथ ही अपीलकर्ता के पास भी अपील के लिए अवसर मौजूद थे। ऐसे में यह कॉस्ट नहीं लगाई जानी चाहिए थी। इससे निगम अधिकारियों का भी मनोबल गिरेगा।



पक्षकार ने कहा कि आईएएस से ऐसी उम्मीद नहीं

वहीं बाफना अस्पताल की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि सिंगल बेंच का आदेश सही है। एक IAS अधिकारी से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह कानून के उन प्रावधानों का हवाला दे जिन्हें पहले ही हटाया जा चुका है। निगमायुक्त ने कानून के मामले में एक गंभीर गलती की है।



हाईकोर्ट ने कहा गलतियां हो जाती हैं

वहीं इन तर्कों के बाद हाईकोर्ट डबल बेंच ने कहा कि अदालतों से भी गलतियां हो सकती हैं, और उन्हें स्वीकार करने तथा उनसे सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसलिए, जब अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील ने यह मान लिया कि आदेश पारित करने में अधिकारी से गलती हुई है और उन्होंने उस आदेश को वापस ले लिया, तो इसे उसी भावना के साथ स्वीकार कर लिया जाना चाहिए था।



इस पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए थी और न ही कोई हर्जाना (cost) लगाया जाना चाहिए था। खासकर तब, जब ऐसा कोई आरोप नहीं है कि संबंधित अधिकारी, यानी IMC कमिश्नर, अक्सर ऐसी गलतियां करके आदेश पारित करते हैं। ना ही निगमायुक्त पर कोई दुर्भावनापूर्ण (mala fide) कृत्य का आरोप लगा था। इसलिए सिंगल बेंच का वह आदेश, जहां तक उसमें 1 लाख रुपए का हर्जाना (cost) लगाने की बात कही गई है, उसे रद्द किया जाता है।



क्या है पूरा मामला

बाफना अस्पताल ने उन पर निकाली गई टैक्स डिमांड के खिलाफ अपील की थी। इसमें कहा गया कि टैक्स डिमांड उन धाराओं में निकाला गया जो साल 2020 में ही खत्म की जा चुकी हैं। सुनवाई के दौरान निगम ने इसमें चूक मानी और कहा कि वह टैक्स डिमांड का आदेश वापस ले रहे हैं। लेकिन सिंगल बेंच ने कहा कि ऐसी संस्थाओं से इस तरह की चूक नहीं होना चाहिए।



इससे बेवजह केस बढ़ते हैं और अधिकारी सार्वजनिक धन से मुकदमेबाजी करते हैं। इसलिए निगम अधिकारियों पर 1 लाख की कॉस्ट लगाई जाती है। यह इन्हें निगम की जगह खुद की जेब से भरना होगा।

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