इंदौर निगम में नोटिस का खेल, हाईकोर्ट से भवन अधिकारी पल्लवी पाल की जांच के आदेश

Sanjay Gupta | Aug 19, 2026, 10:58 IST
इंदौर निगम में नोटिस का खेल
इंदौर नगर निगम में भवन निर्माण की मंजूरी और नोटिस का खेल सालों पुराना है। नोटिस देने और फिर सुविधा शुल्क लेकर मामले को रफा-दफा करना आम बात है। अब ताजा मामला हाईकोर्ट पहुंचा है, जिसमें भवन अधिकारी पर तल्ख टिप्पणी हुई।

इंदौर नगर निगम में बिल्डिंग ऑफिसर और बिल्डिंग इंस्पेक्टर के नोटिस हमेशा कठघरे में रहते हैं। मनचाहे तरीके से यह नोटिस-नोटिस का खेल खेलते हैं। इसकी निगम में सैकड़ों शिकायतें हैं। अब ताजा मामले में पीड़ित सीधे हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसमें हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जाहिर की है।

यह है मामला...

हाईकोर्ट में पचोरवाला बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. ने याचिका दाखिल की। इसमें बताया गया कि भंडारी ब्रिज डीआरपी लाइन के पास निगम से उन्होंने बिल्डिंग की मंजूरी ली और 80 लाख रुपए शुल्क जमा किया। वहीं मंजूरी मिलने के तीन दिन बाद ही जोन 3 की भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने नोटिस दिया। इसका जवाब लेने के तीन दिन बाद ही काम रोकने का आदेश दे दिया।

हाईकोर्ट ने पूछा किस आधार पर दिया नोटिस

हाईकोर्ट ने इस मामले में भवन अधिकारी पाल को तलब किया। उनसे पूछा कि 13 जुलाई को पहले नोटिस और फिर 16 जुलाई को काम बंद करने का आदेश किस आधार पर दिया। इस पर पाल ने कहा कि उन्हें आईडीए (IDA) से पत्र मिला था जिसमें लीज का मुद्दा था, वहां निरीक्षण किया और अनियमितता मिली।

हाईकोर्ट ने माना नेक इरादे नहीं

इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप भट्ट ने दलील को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी तीन दिन में दो अलग-अलग रुख कैसे रख सकता है? ये पत्र गलत मंशा से भेजे लगते हैं। कोर्ट ने मामला अधिकारों का मनमर्जी से उपयोग करने वाला माना। कहा कि यह काम बिना किसी नेक इरादे के किया हुआ लगता है।

पीएस को कहा जांच कराई जाए

हाईकोर्ट ने इस मामले में विभाग के प्रमुख सचिव और निगमायुक्त को आदेश की कॉपी भेजने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा कि दोनों अधिकारी मामले की प्रारंभिक जांच कराएं। पीएस को विस्तृत रिपोर्ट के साथ ही अधिकारी पाल द्वारा की गई कार्रवाई पर जानकारी देनी होगी। निगमायुक्त से रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में मांगी गई है। साथ ही कोर्ट ने निगम, आईडीए और भवन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं पाल के 16 जुलाई के पत्र पर रोक लगा दी है।

ये खबरें भी पढ़िए...

इंदौर नगर निगम का विवादित प्रस्ताव- अतिक्रमणकारियों से वसूलेंगे संपत्तिकर, होगा रद्द



इंदौर नगर निगम अब 1 लाख राशि तक के चेक नहीं लेगा, वजह 15 रुपए के भी चेक बाउंस



इंदौर नगर निगम ने कचरा गाड़ी के शराबी ड्राइवर पर कसी नकेल, तैनात किए 60 ब्रेथ एनालाइजर



लोकायुक्त जांच में इंदौर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी की आय निकली पांच गुना



Tags:
  • इंदौर नगर निगम
  • हाईकोर्ट
  • आईडीए
  • जस्टिस संदीप भट्ट