इंदौर नगर निगम में गंदा पानी लेकर पहुंचे नेता, बोले- भागीरथपुरा 2.0 हो जाएगा, सफाईकर्मी भी धरने पर
फिर भागीरथपुरा 2.0 हो जाएगा
नेता प्रतिपक्ष निगम सोनिला मिमरोट और वार्ड 75 पालदा से कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी मंगलवार को रहवासियों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। यहां वे कई बोतलों में सप्लाई हो रहे गंदे पानी को भरकर लाए थे। मिमरोट ने कहा कि इंदौर में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां दूषित और गंदा पानी आ रहा है। कई जगह ऐसी हैं, जहां भागीरथपुरा 2.0 (Bhagirathpura Case) हो सकता है। इंदौर नगर निगम में केवल कागजी काम हो रहे हैं। वहीं, सोलंकी ने कहा कि अभी तो हम गंदा पानी लेकर आए हैं, व्यवस्था नहीं सुधरी तो यही पानी अधिकारियों को पीने के लिए कहेंगे।
क्या बोले आईएएस अपर आयुक्त पाठक?
वहीं, आईएएस अपर आयुक्त आशीष पाठक ने इनकी शिकायतें सुनीं। इस पर कहा कि इंजीनियर ने बताया है कि पालदा एरिया में पानी की लाइन में सुधार का काम किया गया है। ऐसा होने पर गंदा पानी आता है, लेकिन सप्लाई नियमित सैंपल, टेस्टिंग के बाद ही करते हैं। हम रात को मौके पर जाएंगे और व्यवस्था देखेंगे और पूरी जांच के बाद ही सप्लाई करेंगे।
इधर सफाई को लेकर बिगड़ी बात
उधर, सोमवार से इंदौर में सफाईकर्मी वाल्मीकि सेना के नेतृत्व में हड़ताल पर हैं। यह निगमायुक्त के कक्ष के बाहर निगम परिसर में अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। इनकी मांग नियमित करने, जीपीएस से हाजिरी नहीं लगाने, वेतन बढ़ाने आदि की है। इसे लेकर ये पहले भी मांग करते रहे हैं, लेकिन आश्वासन ही मिला था। इसके बाद सोमवार को ये हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन चलता रहेगा।
ऑफिस में चूड़ियां फेंकी
वहीं, इसके पहले नाराज कर्मचारी धरने के दौरान निगम परिसर में चूड़ियां भी फेंक चुके हैं। इसके जरिए अपना गुस्सा जाहिर किया था। साथ ही अधिकारियों के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की थी। उधर, अभी तक जनप्रतिनिधि इन कर्मचारियों से मुलाकात के लिए नहीं पहुंचे हैं।
क्या है भागीरथपुरा कांड?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिर में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे। इलाके की पेयजल लाइन में सीवेज मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद उल्टी-दस्त और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले में कई लोगों की मौत भी हुई थी।
जांच के दौरान पेयजल लाइन में गंदा पानी पहुंचने के कई संभावित कारणों की पड़ताल की गई। शुरुआती जांच में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल लाइन के ऊपर बने टॉयलेट को संभावित स्रोत माना गया था, लेकिन बाद में जांच का दायरा बढ़ाया गया और पाइपलाइन, सीवेज लाइन तथा अन्य संभावित स्रोतों की भी जांच की गई।
मामला इतना गंभीर हुआ कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रभावित इलाके में नियमित साफ पानी की सप्लाई और बीमार लोगों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए थे। बाद में सरकार ने कोर्ट को बताया कि दूषित पाए गए 51 ट्यूबवेल बंद कर दिए गए हैं और प्रभावित इलाके में पानी व सीवरेज नेटवर्क को सुधारने का काम किया जा रहा है।