मोहन सरकार ने दी बड़ी राहत, इंदौर नगर निगम 500 वर्गमीटर तक के नक्शे कर सकेगा पास
Indore. इंदौर शहर में कई ऐसे रहवासी क्षेत्र हैं, जिनके नक्शे नगर व ग्राम निवेश विभाग द्वारा मंजूर किए जा सकते हैं, लेकिन स्वीकृति नहीं है। पूर्व निगमायुक्त ने ऐसे नक्शे पास करने पर रोक लगाई थी। रोक हटाने या डाटा फॉर्म से नक्शे स्वीकृत करने के लिए नीति नियम बनाने का मामला सरकार के पास विचाराधीन था।
जुलाई 2023 से इन नक्शों पर रोक थी। अब इस पर फैसला हो गया है। इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव लंबे समय से इसके लिए कोशिश में जुटे थे। नगरीय प्रशासन विभाग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विभाग से नोटिफिकेशन जारी हो गया है। इसमें 500 वर्गमीटर तक के अधिकार निगम को दे दिए हैं।
यह आ रहा था मुद्दा
शहर के परदेशीपुरा, बाणगंगा, मनोरमागंज व अन्य मध्य क्षेत्र में में नक्शों के लेकर इश्यू था। दरअसल टीएंडसीपी ने इन नक्शों को पास करने से यह कहते हुए मना कर दिया था वह इतने छोटे भूखंड का नक्शा पास नहीं करते हैं। इसके बिना निगम भी मंजूरी नहीं दे रहा था।
यह मामला इंदौर में हुई बैठक में महापौर ने सीएम मोहन यादव के समक्ष रखा था। तब सीएम ने इस संबंध में नीति नियम बनाकर दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा था। इसके बाद भी मामला विभाग में अटका था।
शहर में इन जगह पर थी समस्या
शहर में मुख्य रूप से परदेशीपुरा, बाणगंगा, भागीरथपुरा, न्यू देवास रोड, वायएन रोड, जनता क्वार्टर, मनोरमागंज, रेसकोर्स रोड, कुम्हारखाड़ी, साउथ तुकोगंज, आरएनटी मार्ग आदि इलाकों से जुड़े नक्शों को लेकर समस्या हो रही थी।
डाटा फॉर्म से हो रहे थे नक्शे पास
दरअसल, मध्यक्षेत्र या मध्यक्षेत्र के बाहर ऐसी खसरा भूमियां या प्लॉट हैं और कई कॉलोनियां व रहवासी क्षेत्र ऐसे हैं, जिनके लेआउट प्लान नगर व ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत नहीं हैं।
इसके आसपास के क्षेत्रों में शाखा द्वारा डाटा फॉर्म के आधार पर प्लॉट बना कर सीधे खसरा भूमि व प्लॉट पर अनुमति हो रही थी। यानी डाटा फॉर्म के आधार पर ही लेआउट तैयार कर अनुमति दी जा रही थी। लेकिन जुलाई 2023 में इस पर रोक लग गई।
यह बोले महापौर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह शहर के हजारों लोगों को राहत देने वाला फैसला है। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को शहर की ओर से साधुवाद।
इससे सालों से भवन निर्माण की अनुमति के इंतजार में अटके शहर के मध्य क्षेत्र के हजारों रहवासियों को राहत मिलेगी। अब मध्य क्षेत्र और बाहर के ऐसे क्षेत्रों को भी हरी झंडी मिलने की राह खुल गई है, जहां लेआउट या स्थल अनुमोदन से जुड़ी तकनीकी अड़चनों के कारण भवन अनुज्ञा अटकी हुई थी।
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