इंदौर नामांतरण घोटाला: 6 कर्मचारियों पर FIR, अफसरों की ID का हुआ था गलत इस्तेमाल

Aman Vaishnav | Sept 02, 2026, 10:06 IST
इंदौर नामांतरण घोटाला
इंदौर नगर निगम के नामांतरण घोटाले में साइबर सेल ने 6 कर्मचारियों पर FIR दर्ज की है। नगर निगम में बिना अनुमति और फर्जी दस्तावेजों के 354 संपत्तिकर खातों में नाम बदल दिए गए। इस धांधली का खुलासा जनसुनवाई में आई एक शिकायत और तकनीकी जांच के बाद हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इंदौर नगर निगम में बड़ा नामांतरण घोटाला सामने आया है।
  • राज्य साइबर सेल ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है।
  • 354 संपत्तिकर खातों में गलत तरीके से नाम बदले गए।
  • इस मामले में निगम के छह कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।
  • दो वरिष्ठ अधिकारियों की लॉगिन आईडी के दुरुपयोग की बात भी सामने आई है।

354 खातों में बड़ा खेल

इंदौर नगर निगम के संपत्तिकर रिकॉर्ड में बड़ी गड़बड़ी मिली है। जांच में पता चला कि 354 खातों में मालिकों के नाम बदले गए। यह बदलाव बिना निर्धारित प्रक्रिया के हुआ। न कोई वैध आवेदन था, न सक्षम अधिकारी की अनुमति।



दरअसल यह पूरा मामला नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच का है। नगर निगम की जांच समिति ने पहले इसकी पड़ताल की। इसके बाद MP-CERT (Madhya Pradesh Computer Emergency Response Team) और MP-SEDC (Madhya Pradesh State Electronics Development Corporation) से तकनीकी जांच कराई गई।



किन कर्मचारियों पर FIR

FIR में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें रियाज अंसारी बेलदार हैं। संजय यादव उपराजस्व निरीक्षक के पद पर हैं। सौरभ तिवारी, संतोष मालवीय और अजय सोलंकी मस्टर श्रमिक हैं। सागर पंवार आउटसोर्स कर्मचारी हैं।



बता दें कि नगर निगम की जांच समिति ने पहले ही विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी थी। रियाज अंसारी और संजय यादव के निलंबन की सिफारिश हुई थी। सौरभ तिवारी, संतोष मालवीय और अजय सोलंकी की बर्खास्तगी की सिफारिश की गई थी।



अफसरों की लॉगिन का दुरुपयोग

FIR में एक अहम बात सामने आई है। तत्कालीन उपायुक्त राजस्व केशव सिंह सगर की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग हुआ। तत्कालीन उपायुक्त राजस्व प्रदीप जैन की आईडी का भी दुरुपयोग हुआ। पुलिस ने दोनों अधिकारियों से पूछताछ की है और उनके बयान दर्ज किए हैं।



इसके बावजूद दोनों अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया गया। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि लॉगिन का इस्तेमाल असल में किसने किया। यह भी देखा जाएगा कि इसमें अधिकारियों की कोई भूमिका थी या नहीं।



दलालों पर अभी कार्रवाई नहीं

जांच के दौरान दलालों की भूमिका की भी चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा FIR में किसी दलाल को आरोपी नहीं बनाया गया है। पुलिस को यह पता लगाना है कि नाम बदलने का काम किस व्यक्ति ने और किस माध्यम से किया।



फिलहाल कार्रवाई सिर्फ छह कर्मचारियों तक सीमित है। जांच में किसी और की भूमिका सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।



संपत्तिकर रिकॉर्ड क्यों अहम

संपत्तिकर रिकॉर्ड नगर निगम के लिए बेहद अहम दस्तावेज हैं। ये राजस्व वसूली का आधार होते हैं। इनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीर अनियमितता माना जाता है।



अगर संपत्ति के मालिक का नाम गलत तरीके से बदल दिया जाए, तो असली मालिक को नुकसान हो सकता है। संपत्ति बेचने, खरीदने या कर्ज लेने में दिक्कत आ सकती है। इसी वजह से यह मामला गंभीर माना जा रहा है।



शिकायत से FIR तक का सफर

बता दें कि यह मामला जनसुनवाई के दौरान सामने आया था। एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उसके संपत्तिकर खाते में बिना अनुमति नाम बदल दिया गया। इसके बाद नगर निगम ने जांच समिति बनाई।



जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली। इसके बाद उपायुक्त राजस्व गरिमा पाटीदार ने साइबर सेल में लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस (MP साइबर पुलिस) ने केस दर्ज कर लिया।



अब आगे क्या होगा

पुलिस अब तकनीकी सबूतों की गहराई से जांच करेगी। यूजर आईडी, लॉगिन डिटेल, डिजिटल लॉग और IP एड्रेस खंगाले जाएंगे। डेट-टाइम स्टैंप की भी जांच होगी।



जांच में चार संदिग्ध IP एड्रेस पहले ही सामने आ चुके हैं। इनसे जुड़े मोबाइल नंबरों की जानकारी भी मिली है। पुलिस अब इन नंबरों की CAF और CDR जानकारी भी मांग रही है।



इससे यह साफ होगा कि रिकॉर्ड में बदलाव किस सिस्टम से और किसने किए। अगर जांच में नए नाम सामने आते हैं, तो FIR में उन्हें भी जोड़ा जा सकता है।



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