इंदौर में नाटी फूड्स के मालिक संजय अग्रवाल पर दो करोड़ अर्थदंड का केस, अवैध खनन का है मामला
समझें क्या है पूरा मामला...
- नाटी फूड्स प्रालि के मालिक संजय अग्रवाल अवैध खनन के मामले में घिर गए हैं।
- स्कीम-140 स्थित सेरेनिटी प्रोजेक्ट में अवैध मिट्टी और मुरम खनन का आरोप लगा है।
- संजय अग्रवाल, रानी अग्रवाल, विनोद अग्रवाल सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।
- खनिज विभाग ने दो करोड़ तीन लाख रुपए की पेनल्टी का केस दर्ज किया है।
- मामला अब अपर कलेक्टर कोर्ट में विचाराधीन है।
इंदौर की बड़ी कन्फेक्शनरी कंपनी नाटी फूड्स के कारोबारी संजय अग्रवाल अब रियल एस्टेट सेक्टर में भी कदम रख चुके हैं।
उनकी रियल एस्टेट कंपनी प्रकृति रियलटर्स प्रा.लि. का स्कीम-140 में बन रहा लग्जरी प्रोजेक्ट सेरेनिटी अब विवादों में आ गया है। इस प्रोजेक्ट पर अवैध खनन का मामला दर्ज हुआ है और केस अपर कलेक्टर कोर्ट, कलेक्टोरेट में पहुंच चुका है।
इन सभी पर बना केस
यह केस कंपनी के डायरेक्टर संजय अग्रवाल के साथ ही उनकी पत्नी रानी अग्रवाल, भाई विनोद अग्रवाल पर बना है। साथ ही इसमें प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन ठेकेदार खुरानिया कंसट्रक्शन के दिनेश कुमावत व अन्य को भी पक्षकार बनाया गया है।
खनिज अधिकारी ने जांच में यह पाया
सहायक खनिज अधिकारी आलोक अग्रवाल ने 24 नवंबर को मौके पर जाकर जांच की थी। इसके बाद सभी लोगों के बयान लिए गए और जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल की गई, जिसके आधार पर यह केस तैयार किया गया।
जांच में सामने आया कि ग्राम पिपल्याहाना, स्कीम-140 के सर्वे नंबर को लेकर अधिवक्ता ज्ञानेंद्र पटेल ने 12 जून 2025 को अवैध खनन की शिकायत दर्ज कराई थी।
मौके पर जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई। यहां से अवैध रूप से मुरम और मिट्टी निकाली गई थी, जो मौके पर नहीं मिली। जांच में यह भी सामने आया कि इसे बिना रॉयल्टी और बिना अनुमति के बाहर ले जाया गया था।
जब इस बारे में प्रकृति रियलटर्स के डायरेक्टर से पूछा गया तो उन्होंने जिम्मेदारी कंस्ट्रक्शन कंपनी पर डाल दी। वहीं कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कहा कि जिम्मेदारी प्रकृति रियलटर्स की है। इस तरह दोनों पक्षों के पास वैध अनुमति नहीं पाई गई।
इस तरह बनी दो करोड़ की पेनल्टी
जांच में यह भी सामने आया कि बेसमेंट बनाने के लिए जितनी पर्यावरण और रॉयल्टी की मंजूरी दी गई थी, उससे कहीं ज्यादा बड़ा गड्ढा खुदा था। इसी दौरान लगभग 13 हजार 532 घनमीटर मिट्टी और मुरम का अवैध रूप से खनन किया गया था।
इस खनन पर प्रति घनमीटर के हिसाब से करीब 6 लाख 73 हजार रुपए का शुल्क बनता है। नियमों के अनुसार रॉयल्टी का 15 गुना जुर्माना लगाया गया, जो लगभग 1 करोड़ 1 लाख रुपए बैठता है।
इसके अलावा पर्यावरण को हुए नुकसान के चलते उतनी ही राशि यानी 1 करोड़ 1 लाख रुपए का अतिरिक्त दंड भी तय किया गया है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 2 करोड़ 3 लाख रुपए के अवैध खनन का मामला दर्ज किया गया है।
शिकायत के बाद जांच से केस तक एक साल लगा
वहीं इस मामले में खनिज विभाग की कार्यशैली भी कठघरे में है। इसमें शिकायत 12 जून 2025 को हुई थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने मौके पर जांच करने की जगह नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की।
कंपनी को 30 जून को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, जो 19 सितंबर 2025 में आया। इसके बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी को 9 अक्टूबर को नोटिस दिया गया था।
वहीं मौके पर खनिज अधिकारी द्वारा जांच 24 नवंबर को की गई थी। पूरी रिपोर्ट 30 जनवरी को बनाई गई। अब यह केस अपर कलेक्टर कोर्ट में पेश हुआ है।
वहीं शिकायतकर्ता अधिवक्ता पटेल का यह भी आरोप है कि यह अवैध खनन (अवैध खनन केस) 13 हजार घनमीटर से कहीं अधिक हुआ है। पेनल्टी पांच करोड़ रुपए से अधिक की बनती है। इसमें बिल्डर कंपनी को लाभ पहुंचाते हुए बहुत कम रॉयल्टी चोरी (केवल 6.73 लाख रुपए) बताई गई। वहीं जांच में और केस बनाने में भी देरी की गई।
वहीं इस मामले में संजय अग्रवाल ने अपना बयान दिया है। संजय अग्रवाल का कहना है कि मामला कोर्ट में है इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।
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