इंदौर को नर्मदा के चौथे चरण की सौगात: सीएम मोहन यादव बोले सिंहस्थ में 60 साल बाद क्षिप्रा के जल से होगा स्नान
News In Short
- इंदौर में नर्मदा चौथे चरण का 29 मार्च को भूमिपूजन हुआ।
- यह प्रोजेक्ट 1356 करोड़ रुपए का है और 400 एमएलडी पानी लाएगा।
- 2029 तक इंदौर को कुल 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा।
- इस योजना से 2047 तक 65 लाख आबादी की जरूरत पूरी होगी।
- सीएम ने कहा सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा के असली जल से स्नान होगा।
News In Detail
इंदौर को मिली ऐतिहासिक सौगात
रविवार 29 मार्च को इंदौर के दशहरा मैदान में एक बड़ा कार्यक्रम हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा जल प्रदाय योजना के चौथे चरण का भूमिपूजन किया। यह इंदौर नगर निगम का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।
इस योजना की कुल लागत 1356 करोड़ रुपए है। इसके तहत नर्मदा नदी से 400 एमएलडी (Million Litres per Day) यानी 40 करोड़ लीटर प्रतिदिन अतिरिक्त पानी लाया जाएगा। नर्मदा नदी इंदौर शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर है। वहां से पंपिंग करके पानी शहर तक पहुंचाया जाता है।
2047 तक की जरूरत का इंतजाम
अभी इंदौर को नर्मदा के पहले, दूसरे और तीसरे चरण से कुल 540 एमएलडी पानी मिलता है। चौथा चरण पूरा होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 900 एमएलडी से ऊपर पहुंच जाएगा। यह पानी साल 2029 तक मिलने लगेगा।
सीएम यादव ने कहा कि इंदौर की आबादी साल 2047 तक करीब 65 लाख होने का अनुमान है। मेट्रोपोलिटन क्षेत्र को जोड़ें तो यह संख्या डेढ़ करोड़ तक पहुंच सकती है। इसीलिए यह योजना अभी से तैयार की जा रही है ताकि भविष्य में पानी का संकट न हो।
नर्मदा योजना का पुराना सफर
इंदौर में नर्मदा से पानी लाने की शुरुआत 1978 में हुई थी। पहले चरण की नींव देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी। उस वक्त 500 मीटर की लिफ्ट करके पानी लाया गया था। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे देश की पहली ऐसी योजना बताया।
इसके बाद 1992 में दूसरा चरण आया। दोनों चरणों से मिलाकर 180 एमएलडी पानी मिलने लगा। 2006 से 2010 के बीच प्रोजेक्ट उदय के तहत तीसरा चरण लागू हुआ। इससे 360 एमएलडी अतिरिक्त पानी की व्यवस्था हुई, जो 2024 तक की आबादी के लिए पर्याप्त थी।
चौथे चरण में इस पर होगा काम
चौथे चरण के तहत वांचू पॉइंट से राऊ सर्कल तक 39 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। तीन जगहों पर आधुनिक तकनीक से करीब 2870 मीटर लंबी सुरंग (टनल) भी बनाई जाएगी। इस पैकेज की लागत 448 करोड़ रुपए से ज्यादा है और काम 30 महीने में पूरा होगा।
इसके साथ ही इसमें 20 नए ओवरहेड टैंक बनेंगे, जिनकी क्षमता 15 से 35 लाख लीटर तक होगी। 685 किलोमीटर की वितरण पाइपलाइन बिछेगी। इससे 1 लाख 26 हजार नए घरेलू जल कनेक्शन दिए जाएंगे। 1 लाख 8 हजार से ज्यादा वाटर मीटर लगेंगे ताकि 24x7 दबाव के साथ पानी मिल सके। इस पैकेज की लागत 410 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
इसके अलावा, 20 नए टैंक बनाए जाएंगे और 46 पुराने टैंकों को मजबूत किया जाएगा। 892 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन बिछेगी। 1 लाख 21 हजार और घरेलू जल कनेक्शन मिलेंगे। तीनों पैकेज पूरे होने पर 2 लाख 47 हजार से ज्यादा परिवारों को सीधा फायदा होगा।
क्षिप्रा जल से होगा सिंहस्थ 2028
सीएम यादव ने इस मौके पर सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़ी और भावनात्मक घोषणा की। उन्होंने कहा कि 1968 में क्षिप्रा नदी के असली जल से स्नान हुआ था। उसके बाद 1980 और बाद के कुंभ में गंभीर नदी का पानी इस्तेमाल करना पड़ा। 2016 में मां नर्मदा की कृपा से काम चला।
इस बार 1000 करोड़ रुपए की योजना बनाई जा रही है। बारिश के पानी को बड़े तालाबों में इकट्ठा किया जाएगा। फिर उसे धीरे-धीरे क्षिप्रा नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इसी प्राकृतिक जल से सिंहस्थ 2028 में स्नान और आचमन होगा। यानी 60 साल बाद क्षिप्रा मैय्या के असली जल से महाकुंभ होगा।
महापौर और मंत्री ने क्या कहा
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे ऐतिहासिक पल करार दिया। उन्होंने कहा कि 50 साल के राजनीतिक जीवन में पानी को लेकर इतना बड़ा काम उन्होंने पहले नहीं देखा। उन्होंने यह भी कहा कि इंदौर का पानी देश में सबसे महंगा है, इसलिए इसे बर्बाद न करें।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री यादव और मंत्री विजयवर्गीय का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह पूरे शहर के 25 साल के भविष्य की नींव है। कार्यक्रम में मंत्री तुलसीराम सिलावट और विधायक मालिनी गौड़ ने भी संबोधित किया।
सीएम ने एक और घोषणा की। उन्होंने बताया कि संकल्प से समाधान शिविर अब समाप्त हो रहा है। इंदौर में इसके तहत 1 लाख 44 हजार आवेदन निराकृत हुए। अब जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पौने तीन लाख जल संरचनाओं को संरक्षित करने का लक्ष्य है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह सिर्फ एक शहर की नहीं, पूरे देश की बढ़ती जल जरूरतों की तस्वीर है। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर रह चुका है। ऐसे शहर में 2047 तक की आबादी के लिए अभी से पानी की व्यवस्था करना एक मॉडल की तरह है। 1356 करोड़ रुपए का यह निवेश आने वाली पीढ़ियों के अधिकार को सुरक्षित करता है।
FAQ
- नर्मदा चौथा चरण क्या है और इंदौर को इससे क्या फायदा होगा?
नर्मदा चौथा चरण इंदौर नगर निगम का अब तक का सबसे बड़ा जल प्रदाय प्रोजेक्ट है। इसकी लागत 1356 करोड़ रुपए है। इसके तहत नर्मदा नदी से 400 एमएलडी यानी 40 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी रोज लाया जाएगा। यह काम 2029 तक पूरा होगा। इससे इंदौर को कुल 900 एमएलडी से ज्यादा पानी मिलने लगेगा। 2 लाख 47 हजार से ज्यादा परिवारों को सीधे नल कनेक्शन मिलेंगे। यह योजना शहर की 2047 तक की अनुमानित 65 लाख आबादी की जरूरत को देखते हुए बनाई गई है। - सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा जल से स्नान की घोषणा क्यों अहम है?
सिंहस्थ या कुंभ मेले में क्षिप्रा नदी के जल को पवित्र माना जाता है। लेकिन नदी का पानी कम होने के कारण 1968 के बाद से असली क्षिप्रा जल का उपयोग नहीं हो पाया। 1980 के बाद के कुंभ में गंभीर नदी का पानी लाया गया और 2016 में नर्मदा का। इस बार सरकार ने 1000 करोड़ रुपए की योजना बनाई है। बारिश का पानी तालाबों में जमा होगा और फिर क्षिप्रा में छोड़ा जाएगा। इससे 60 साल बाद यानी 1968 के बाद पहली बार क्षिप्रा के असली जल से स्नान और आचमन होगा। यह धार्मिक और पर्यावरणीय दोनों लिहाज से ऐतिहासिक होगा। - नर्मदा जल योजना के अब तक के चरण कौन से हैं और इनसे कितना पानी मिलता है?
इंदौर में नर्मदा से पानी लाने की यात्रा 1978 से शुरू हुई। पहला और दूसरा चरण 1978 और 1992 में आया, जिनसे कुल 180 एमएलडी पानी मिला। तीसरा चरण 2006 से 2010 के बीच लागू हुआ। इससे 360 एमएलडी पानी की व्यवस्था हुई। इस तरह अभी कुल 540 एमएलडी पानी शहर को मिलता है। चौथा चरण पूरा होने पर 2029 तक यह आंकड़ा 900 एमएलडी से ऊपर जाएगा।
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