इंदौर में पटवारी बोली- सीएम हेल्पलाइन से कुछ नहीं होता है, तहसीलों में जमकर गठबंधन
Indore. इंदौर कलेक्ट्रेट की अलग-अलग तहसीलों में हालात काफी बिगड़ चुके हैं। यहां आरआई (राजस्व निरीक्षक), पटवारियों और कुछ तहसीलदारों ने आपस में अपना मजबूत गुट बना लिया है। आलम यह है कि ये लोग सीएम हेल्पलाइन तक की परवाह नहीं करते। अगर कोई व्यक्ति दलालों या एवजियों (प्राइवेट सहायकों) के जरिए काम नहीं कराता, तो उसके आवेदन पर महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती।
इस समस्या की मुख्य वजह यह है कि पिछले 12 सालों से आरआई और पटवारियों के बड़े स्तर पर तबादले नहीं हुए हैं। वहीं कई तहसीलदार भी सालों से एक ही जगह जमे हुए हैं। इसी कारण दलाल और बाहरी लोग हर जगह हावी हो गए हैं। भ्रष्टाचार का ऐसा ही ताजा मामला अभी सांवेर तहसील में पटवारी और आरआई से जुड़ा सामने आया है।
क्या हुआ सांवेर तहसील में
सांवेर तहसील में एक आवेदक ने खाकरोड़ गांव में सीमांकन के लिए अक्टूबर 2025 में आवेदन लगाया था। समयसीमा में 30 दिन में काम होना था लेकिन यह नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को शिकायत की कि इनके द्वारा अवैध धन की इनडायरेक्टली मांग की जा रही है।
जब सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तो पटवारी दीपशिखा कैथवास और आरआई धर्मेंद्र गुप्ता द्वारा इसे वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। धरमपुरी को दफ्तर में बुलाया गया और बंद कमरे में धमकी भी दी गई।
पटवारी बोली कुछ नहीं होता सीएम हेल्पलाइन से
इसमें दो ऑडियो भी सामने आए हैं। इसमें पटवारी आवेदक से कह रही हैं कि- आप पता नहीं सीएम हेल्पलाइन को क्या ही समझते हैं। सीएम हेप्लपाइन से कुछ नहीं होता है। मैं मंडे को नपती का नोटिस निकाल दूंगी।
वहीं एक अन्य ऑडियो जो आरआई गुप्ता और पटवारी कैथवास के बीच में है। इसमें आरआई पटवारी को कह रह हैं कि नपती का काम आपका है। मैंने आवेदक को सिर्फ सीएम हेल्पलाइन के लिए बुलाया था, मौके पर पटवारी जाएगा और बताएगा क्या पोजीशन है। यह देखना आपका काम है।
इस मामले में शिकायत के बाद इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने पटवारी कैथवास और आरआई गुप्ता को सस्पेंड के आदेश जारी किए हैं। साथ ही तहसीलदार पूनम तोमर को नोटिस दिया गया है।
अलग तहसील बनने से और पनपा गठबंधन
अब कलेक्ट्रेट में केवल जूनी इंदौर और बिचौली हप्सी तहसील रह गई है। सांवेर, महू, देपालपुर तहसील पहले से ही अलग थी और अब कनाडिया, राऊ, मल्हारगंज, खुडैल भी अलग हो चुकी है। हालत यह है कि इन तहसीलों में कोई झांकने वाला नहीं है।
सब जगह कॉकस पनप रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारी भी इन तहसीलों में झांककर दौरा नहीं करते हैं। कई तहसीलें एवजियों के भरोसे चल रही है।
प्रोटोकॉल काम अलग होने से मजे में तहसीलदार
मध्य प्रदेश शासन द्वारा राजस्व कोर्ट अच्छे से चले इसके लिए तहसीलों को प्रोटोकॉल और रिवेन्यू तहसीलदारों में बदला था। इसी के तहत इंदौर में भी प्रोटोकॉल व अन्य काम का जिम्मा दूसरे तहसीलदारों को दिया गया है। बात थी कि इसमें 6 माह में रोस्टर से बदलाव होगा। लेकिन बदलाव नहीं हुआ और जो राजस्व कोर्ट में लगे हैं, उन्होंने अधिकांश जगह मजबूत गठबंधन बना लिया है।
हालत यह है कि सीसीटीवी जो तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह के समय लगे थे वह डब्बा हो गए हैं और चलना बंद हो चुके हैं। आरसीएम पोर्टल पर अब कई तहसीलदारों के रीडर, बाबू ही लॉग इन कर देते हैं, जिससे लगता है कि समय पर तहसीलदार कोर्ट पहुंच चुके हैं। इस तरह शासन और कलेक्टर दोनों को झांसा दिया जा रहा है। बाबुओं के भरोसे तहसील चल रही है और नीचे आरआई और पटवारियों की मनमर्जी चल रही है।
कॉकस तोड़िए कलेक्टर साहब
कलेक्टर शिवम वर्मा ने यदि जल्द यह कॉकस नहीं तोड़ा तो तहसीलों से परेशान आवेदकों की शिकायतें बढ़ती जाएंगी। इसके लिए जरूरी है कि तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी जैसा 2013 की तरह आरआई और पटवारियों को पूरा बदला जाए। साथ ही एक-दो साल से एक ही जगह पर जमे तहसीलदारों की तहसील बदली जाए। नहीं तो यह गठबंधन डुबा देगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
इंदौर में बिल्डर संजय जैन को हैरी बॉक्सर के नाम से आई 15 करोड़ की धमकी, शूटर पकड़ा गया
एमपी न्यूज: इंदौर में बिल्डर को ऐसे धमकाया- मैं हैरी बॉक्सर लॉरेंस गैंग का मेंबर, सुन संजय 15 करोड़ देने होंगे
इंदौर में बिल्डर जैन को लारेंस गैंग के हैरी बाक्सर नाम से 15 करोड़ की फिरौती की धमकी
एमपी के व्यापारी को लॉरेंस गैंग से मिली धमकी, कहा- 10 करोड़ दे दो नहीं तो जान से मार देंगे