इंदौर पुलिस के पिटने में दिग्विजय सिंह ने विशाल खंडेलवाल पर साधा निशाना, जानें कौन हैं ये?

Sanjay Gupta | Jun 26, 2026, 14:35 IST
दिग्विजय सिंह ने विशाल खंडेलवाल पर साधा निशाना
इंदौर में पुलिसकर्मियों की पिटाई के बाद पुलिस अब अज्ञात को ढूंढ रही है। इस मामले में जमकर फजीहत हो चुकी है। वहीं अब पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इसमें भूमाफियाओं के साथ ही कनाडिया टीआई सहर्ष यादव और एक बिल्डर विशाल खंडेलवाल को कठघरे में खड़ा किया है।

इंदौर के कनाडिया थाना क्षेत्र में डायमंड गृह निर्माण सोसायटी की डायमंड कॉलोनी पर रविवार रात को हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। यहां पर दो पक्षों में हुए पथराव को रोकने पहुंची पुलिस को ही नशेडियों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।



इसमें पुलिसकर्मी विजय सिकरवार को 16 और आशीष शर्मा को आठ टांके आए। द सूत्र की खबर के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने सख्ती दिखाई और दो दिन बाद मंगलवार रात को एफआईआर हुई।



वहीं टीआई सहर्ष यादव ने इसमें भी धाराएं तो मजबूत लगाईं लेकिन केस अज्ञात पर दर्ज किया। अब दिग्विजय सिंह ने इसमें बड़े सवाल खड़े किए हैं।



दिग्विजय सिंह ने इन पर उठाए सवाल

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने गुरुवार, 25 जून की रात को इस मामले में कहा कि इंदौर में भूमाफिया पुलिस को पीट रहे हैं। मुझे पता चला है कि विशाल खंडेलवाल ने जमीन की डील की है। पुलिस पर हमला होता है और किसी की गिरफ्तारी नहीं होती है।



दिग्विजय सिंह ने कहा कि पता नहीं खंडेलवाल और सरकार के बीच के क्या संबंध हैं। इससे पुलिस असहाय महसूस कर रही है। पुलिस वाले पिट रहे हैं और टीआई साहब समझौता कराने का प्रयास करते हैं।



दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि यह भूमाफिया के हाल हैं। पुलिस एफआईआर करती है तो वह भी अज्ञात पर, जबकि टीआई को पता है कि किसने हमला किया है। वह अज्ञात नहीं है, टीआई को सब पता है।



कौन हैं विशाल खंडेलवाल?

विशाल खंडेलवाल एसएस ग्लोबल ग्रुप के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) हैं। इस कंपनी में लखन यादव भी शामिल हैं। वहीं पहले इसमें रुपेश व्यास, भूपेश व्यास भी शामिल थे।



कंपनी के एसएस इंफिनिट्स, एसएस ग्रीन सहित कई बड़े प्रोजेक्ट इंदौर में हैं। कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार इसका ऑफिस राफेल टावर ओल्ड पलासिया में है।



खंडेलवाल कई बड़े प्रोजेक्ट में लगे हुए हैं। विशाल खंडेलवाल ने इस मामले में कहा कि आगे की ओर प्रतीक संघवी जी का प्लांट है और डायमंड कॉलोनी के पीछे मेरा प्लाट है। जहां रास्ते को लेकर छोटा सा इशू है और उसे लेकर चर्चा चल रही है।लेकिन विवाद जैसा कुछ नहीं है। मुझे नहीं पता मेरे बारे में किसने क्या गलत तथ्य रख दिए।



विवादित जमीन का इतिहास

जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, उसकी कीमत 500 करोड़ से ज्यादा है। यह जमीन भूरी टेकरी के पास है। साल 1974 में जमीन शालीग्राम के नाम पर थी, फिर इसे हाजी एंड कंपनी के संचालक शेख इब्राहिम ने ले ली।



इसके बाद डायमंड गृह निर्माण सोसायटी बनाई। इसमें किशनलाल, सुरेश प्रसाद अध्यक्ष बने। बाद में जमीन पर प्लॉट काटकर बेचे गए। इसमें से साल 2016 में करीब सात एकड़ जमीन संयम इन्फ्रा ने ले ली। इसमें डायरेक्टर प्रतीक संघवी और जयश्री संघवी हैं।



जमीन की रक्षा के लिए भूमाफियाओं ने रखे गुंडे

सोसायटी के सदस्यों के पास रसीदें हैं। यहां प्लॉट लेने वाले जमीन चाहते हैं, कुछ के कब्जे भी हैं। वहीं काफी जमीन तो बिल्डर और भूमाफियाओं को बिक चुकी है। इसके चलते बिल्डर और प्लॉट खरीदने वालों को लेकर विवाद चल रहे हैं।



इसमें कोर्ट केस भी लगे हुए हैं। ऐसे में बताया जाता है कि जमीन बचाने के लिए भूमाफियाओं ने मिलकर मोहसिन खान को ठेका दिया है।



वह अपने गुर्गों के साथ जमीन की रक्षा करता है। आरोप यह भी है कि उसकी और कनाडिया पुलिस की सांठगांठ है। इसके चलते उसकी इतनी हिमाकत हुई कि नशे में पुलिस को ही पीट दिया।



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आला अधिकारी चुप, टीआई दबा रहे

इस संवेदनशील मामले में वरिष्ठ अधिकारी डीसीपी अमन सिंह राठौर हों या एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह, एसीपी कुंदन मंडलोई, सभी चुप हैं। टीआई कनाडिया सहर्ष यादव ने पहले द सूत्र से कहा था कि पुलिस को पीटने वाली कोई घटना नहीं हुई। केवल दो पक्षों में विवाद था और पुलिस ने मामले को टाला और राजीनामा हो गया। लेकिन जब सीपी संतोष सिंह ने खबर के बाद सख्ती की तो फिर रात को एफआईआर हुई।



एफआईआर में यह लिखा

बता दें कि बीते मंगलवार रात को हुई एफआईआर आरक्षक विजय सिकरवार के आवेदन पर लिखी गई है। इसमें कहा गया है कि दो पक्षों में विवाद हुआ। इसमें एक ओर रहवासी, कॉलोनी वाले थे और साथ ही संयम इन्फ्रा के लोग थे।



विजय सिकरवार ने बताया कि मैं, आशीष शर्मा के साथ गया था। वहां पथराव हुआ किसी ने शर्मा के सिर पर डंडे से वार किया था। हमला करने वालों को हम पहचानते नहीं हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस घटना में केवल ये दो नहीं बल्कि रविंद्र और आर. जाट नाम के दो और पुलिसकर्मी भी पिटे थे।



हालांकि अन्य दो की चोट गंभीर नहीं थी। लेकिन सिकरवार और शर्मा को टांके आए। पिटने के बाद टीआई यादव मौके पर पहुंचे और मामले को रफा-दफा किया गया।



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