पुलिस ड्राइवर फिरोज खान 90 करोड़ की जमीन खरीदी में गवाह, मां और पत्नी ने नीलामी में खरीदी एक करोड़ की संपत्ति

Sanjay Gupta | Oct 22, 2026, 19:50 IST
90 करोड़ की जमीन खरीदी में पुलिस ड्राइवर फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर सामने आया।
MP Police driver under scanner after being named witness in Rs 90 crore land purchase
इंदौर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय के ड्राइवर आरक्षक फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त की जांच जारी है। लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर को उनके निवास पर छापा मारा था। जांच में अब तक 46 अचल संपत्तियों का पता चला है। इनकी बाजार कीमत 64 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है। अब जांच में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

यह मामला इंदौर-उज्जैन रोड स्थित 90 करोड़ रुपए से अधिक की विवादित जमीन से जुड़ा है। लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशन में 14 अक्टूबर को छापा मारा गया था। कार्रवाई उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में हुई थी। एसपी इंदौर राजेश सहाय ने भी कार्रवाई में मार्गदर्शन दिया था।



नीलामी में खरीदी करीब एक करोड़ रुपए की संपत्ति

जांच के दौरान देवास में दो संपत्तियों की नीलामी से जुड़ी जानकारी मिली है। चोलामंडलम इंदौर ने अगस्त 2025 में इन संपत्तियों की नीलामी रखी थी। पहली संपत्ति देवास के उज्जैन रोड स्थित प्लॉट क्रमांक 38डी है। इसका सर्वे क्रमांक 58 और क्षेत्रफल 2400 वर्गफीट है। दूसरी संपत्ति कॉन्वेंट स्कूल मार्ग स्थित प्लॉट क्रमांक 39 पैकी है। इसका क्षेत्रफल 750 वर्गफीट है।



इन संपत्तियों की नीलामी में फिरोज खान (Firoz Khan) के परिवार ने ऑनलाइन बोली लगाई थी। इसमें उनकी पत्नी हिना खान और मां वहीदा खान शामिल थीं। उनकी पुत्री जैफी खान ने भी ऑनलाइन बोली लगाई थी। दोनों प्लॉट में से एक पर मकान बना हुआ है। परिवार ने दोनों संपत्तियों के लिए 92 लाख रुपए की बोली लगाई थी। यह बोली स्वीकार होने के बाद परिवार ने दोनों संपत्तियां खरीद लीं। आरोपी फिरोज खान ने दोनों प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए 92 लाख रुपए जमा कराए। इस तरह संपत्तियों की खरीद पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।



इंदौर-उज्जैन रोड पर 90 करोड़ रुपए की विवादित जमीन

लोकायुक्त को मगरखेड़ा की 45 बीघा जमीन के सौदे की जानकारी भी मिली है। यह जमीन इंदौर-उज्जैन रोड पर स्थित है। इसकी बाजार कीमत 90 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है। हालांकि जमीन का सौदा केवल 9 करोड़ रुपए में हुआ था। इस जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह के रूप में शामिल थे। जमीन की रजिस्ट्री 27 अगस्त 2024 को हुई थी। यह रजिस्ट्री श्याम इंफ्रा के सुमित जिंदल के नाम हुई थी।



पुलिस ड्राइवर फिरोज खान 90 करोड़ की जमीन खरीदी में गवाह बना
indore-police-driver-firoz-khan

विक्रेता की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार ने हस्ताक्षर किए थे। जमीन मूल रूप से कस्तूरीबाई की थी। रजिस्ट्री होने के चार दिन बाद ही कस्तूरीबाई की मौत हो गई थी। इस जमीन के नामांतरण पर राजस्व न्यायालय ने रोक लगाई थी। लोकायुक्त ने अब इस जमीन के सौदे को भी जांच में शामिल कर लिया है।



आईसीयू में भर्ती महिला से धोखे से जमीन खरीदने का आरोप

पीड़ित परिवार ने जमीन की रजिस्ट्री धोखे से कराने का आरोप लगाया है। परिवार के मुताबिक रजिस्ट्री के समय कस्तूरीबाई की उम्र 83 साल थी। वह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं। इसी दौरान कथित तौर पर धोखे से जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी।



रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही कस्तूरीबाई की मौत हो गई। इसके बाद परिवार ने जमीन के नामांतरण पर रोक लगवाई। परिवार ने रजिस्ट्री शून्य घोषित कराने के लिए अदालत में याचिका भी दायर की है। कस्तूरीबाई के पोते दीपक शर्मा ने जमीन को अपनी पुश्तैनी संपत्ति बताया है। दीपक के मुताबिक कस्तूरीबाई की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रतलाम से इंदौर लाया गया था। उन्हें इंदौर के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।



दीपक का आरोप है कि फिरोज खान और उनके भाई जावेद खान अस्पताल ले गए थे। रविकांत पंवार भी उनके साथ थे। परिवार का दावा है कि आईसीयू में दस्तावेज ले जाने का विरोध किया गया था। इस बात को लेकर विवाद भी हुआ था। पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री हुई थी। चार दिन बाद अस्पताल में ही कस्तूरीबाई का निधन हो गया।



एसडीएम कोर्ट ने नामांतरण किया निरस्त

जमीन के सौदे की जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार ने राजस्व अदालत में अपील की। इसके बाद एसडीएम कोर्ट ने जमीन का नामांतरण निरस्त कर दिया। इंदौर के प्रधान जिला न्यायाधीश की अदालत में भी यह मामला पहुंचा था। अदालत ने प्रकरण क्रमांक 1197/2024 में 25 अक्टूबर 2024 को अंतरिम आदेश दिया था। इसमें जमीन की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। जमीन की बिक्री नहीं करने का आदेश भी दिया गया था।



इसके बावजूद 17 फरवरी 2025 को जमीन का नामांतरण कर दिया गया। इसमें तहसीलदार स्तर पर गड़बड़ी होने का आरोप है। सुनवाई के दौरान खरीदार और संबंधित फर्म के दस्तावेज स्पष्ट रूप से पेश नहीं हुए। फर्म का पंजीकरण प्रमाणपत्र और भागीदारों का विवरण भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया।



एसडीएम कोर्ट के मुताबिक प्रभावित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला था। इसके बावजूद जमीन के नामांतरण का आदेश जारी कर दिया गया था। पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार कस्तूरीबाई के कानूनी सलाहकार थे। इस पावर ऑफ अटॉर्नी में भी फिरोज खान गवाह हैं।



90 करोड़ की जमीन सौदे में गवाह फिरोज
indore-police-driver-firoz-khan
Tags:
  • फिरोज खान
  • पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय
  • लोकायुक्त
  • इंदौर
  • Firoz Khan
  • Indore Police Driver
  • Indore News
  • एसडीएम कोर्ट
  • लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख
  • एसपी इंदौर राजेश सहाय