वाह इंदौर पुलिस, स्वाद और खुशबू से यूरिया को बताया 2 करोड़ की ड्रग्स, निर्दोष 11 माह जेल में भी रहे

Sanjay Gupta | Feb 05, 2026, 18:36 IST
Photograph: (the sootr)
इंदौर पुलिस ने एक साल पहले जिस दो करोड़ की ड्रग्स को जब्त बताया था, वह जांच में यूरिया निकली। आरोपियों को 11 महीने जेल में रहना पड़ा। कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया।

NEWS IN SHORT

  • एक साल पहले इंदौर पुलिस ने दो करोड़ की MD ड्रग्स जब्त करने का दावा किया था।
  • जांच में यह साबित हुआ कि जब्त सामग्री MD ड्रग्स नहीं, बल्कि यूरिया थी।
  • पुलिस ने खुशबू और स्वाद के आधार पर यूरिया को ड्रग्स समझ लिया था।
  • जांच रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला गलत पहचान और जांच प्रक्रिया में चूक का परिणाम था।
  • कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया, पुलिस को जांच में सुधार करने की सलाह दी गई।

NEWS IN DETAIL

INDORE. एमपी अजब है, सबसे गजब है। टूरिज्म के लिए यह चर्चित डायलाग इंदौर पुलिस और ज्यादा सटीक बैठता है। एक साल पहले आरोपियों से दो करोड़ की एमडी ड्रग्स जब्ती बताई गई। आरोपियों पर केस बना और वह 11 माह जेल रहे। अब कई लैब से पुष्टि हो गई है कि वह तो ड्रग्स थी ही नहीं यूरिया थी।



डीसीपी ने बताया खुशबू और स्वाद से समझा ड्रग्स थी

करीब साल पहले दो करोड़ की एम डी ड्रग्स जब्ती जांच के बाद यूरिया निकलने के मामले में डीसीपी ने इस चूक को माना है। डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने कबूल किया कि कार्रवाई के वक्त जांच पुलिसकर्मियों के पास टेस्टिंग ही नहीं थी। जब्त अवैध मादक पदार्थ को खुशबू और स्वाद के आधार जब्त किया गया था। जो अब यूरिया निकला।



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इस तरह जब्ती में बताई थी ड्रग्स

एक साल पहले इंदौर पुलिस के जोन वन के अंतर्गत आने वाले तेजाजी नगर थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान दो करोड़ की एम डी ड्रग्स जब्त होने का दावा किया था। साथ ही मौके से दो आरोपियों को पकड़ने और उनका सहयोग करने में दो अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया था। इसमें आजाद नगर थाने के आरक्षक लखन गुप्ता को भी ड्रग्स पैडलर की मदद के आरोप में आरोपी बनाया था। इस मामले में सभी आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया था। आरक्षक गुप्ता को भी 15 दिन जेल रहना पडा। वहीं बाकी आरोपी 11 माह जेल में रहे और अब बाहर आए हैं।



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इस तरह जांच में निकली यूरिया

इस जब्त की गई ड्रग्स को भोपाल स्थित सेंटल फोरेंसिक लैब से जांच करवाई तो ड्रग्स नहीं बल्कि यूरिया निकला। इस मामले में फिर पुलिस ने सेन्ट्रल लेब हैदराबाद से जांच का प्रतिवेदन दिया। कोर्ट के आदेश पर फिर से सेंपल की जांच करवाई गई, जब हैदराबाद से आई रिपोर्ट देखी गई तो उसमें भी एमडी ड्रग्स की जगह यूरिया ही निकला।





इस पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। डीसीपी लालचंदानी का यह भी कहना है कि कुछ ड्रग तस्कर अपने खरीददारों से धोखाधड़ी करते हैं और ड्रग्स की जगह यूरिया सप्लाय कर देते हैं। जांच में एमडी ड्रग्स पोटेशियम नाइट्रेट निकला, जिसके बाद पुलिस ने प्रतिवेदन पेश कर आरोपियों को बरी करवाया है।



आरोपियों के वकील ने यह लगाए आरोप

वहीं आरोपियों के अधिवक्ता रोहित सरतोरे ने कहा कि यह पूरी तरीके से विभागीय द्वेष भावना थी। पुलिस ने यह कार्रवाई पुलिस कमिशनर के सामने अपने नंबर बढ़ाने के लिए की थी। लगातार इस तरीके के प्रकरण थाने में बनाए जा रहे हैं।



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इस तरह पुलिस ने बताई थी कहानी

मामला 26 फरवरी 2025 का है। पुलिस की कहानी के अनुसार कंट्रोल रूम से मिली सूचना के आधार पर तेजाजी नगर थाने के एएसआई मनोज दुबे, प्रधान आरक्षक देवेंद्र परिहार, अभिनव शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मी एबी रोड बायपास स्थित कस्तूरबा ग्राम पहुंचे। वहां सड़क किनारे बाइक पर बैठे दो युवकों को रोका तो वह दोनों भागने लगे, फिर उन्हें पकड़ा गया उनकी पहचान विजय पाटीदार निवासी मंदसौर और मोहम्मद शाहनवाज निवासी आजाद नगर के रूप में हुई।



शाहनवाज की जेब से पाउडरनुमा पदार्थ, जिसे पुलिस ने एमडी ड्रग बताकर पंचनामा तैयार किया और वजन 198 ग्राम दर्शाते हुए इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत करीब दो करोड़ रुपए आंकी गई। दोनों आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत गिरफ्तार किया गया। बाद में शाहनवाज के बयान के आधार पर आजाद नगर थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी लखन गुप्ता को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया।



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