शिक्षाविद्, कारोबारी पुरुषोत्तम दास पसारी एमपी छोड़कर नहीं जा सकेंगे, छात्रवृत्ति घोटाले में जमानत की शर्त
Indore. इंदौर में दस साल पहले सामने आए छात्रवृत्ति घोटाले में अब शिक्षाविद् (Educationist), कारोबारी पुरुषोत्तम दास पसारी उलझ गए हैं। इस मामले में पसारी के साथ ही उनक छोटे भाई विष्णु पसारी व अन्य पर गंभीर धाराओं में दो-दो केस दर्ज हैं।
इन केस में लोकायुक्त द्वारा चालान पेश किए गए हैं। इसके बाद पसारी बंधुओं ने जमानत के लिए आवेदन लगाया। इसमें राहत तो मिली है लेकिन जमानत में कई गंभीर शर्तें लगाई गई हैं।
राज्य छोड़कर नहीं जाएंगे पसारी
प्रथम जिला व अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. अकबर शेख ने 20-20 हजार के मुचलके व गारंटी पर यह जमानत दी है। साथ ही इसमें कई शर्तें लगाई हैं जिसमें अहम है कि वह कोर्ट की मंजूरी के बिना राज्य की सीमा नहीं छोड़ेंगे। यानी वह बिना मंजूरी के मध्य प्रदेश के बाहर नहीं जा सकते हैं।
- पसारी बंधुओं को कोर्ट की हर पेशी में पेश होना होगा
- वह अपना मोबाइल नंबर और पता कोर्ट में दर्ज कराएंगे
- जमानत के दौरान कोई नया अपराध नहीं करेंगे
- किसी गवाह, साक्ष्य को प्रभावित, डराना और धमकाना नहीं करेंगे
यह है पसारी बंधुओं पर 420 का केस
इंदौर में साल 2013-14 के दौरान पैरामेडिकल व अन्य कॉलेज में स्कॉलरशिपघोटाला सामने आया था। इसके बाद लोकायुक्त ने विविध कॉलेज संचालकों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
इसी के तहत पसारी बंधुओं पर लोकायुक्त ने दो केस दर्ज किए। इसमें कई गंभीर धाराएं 420, 467, 468, 471, 406, 120बी है। जिसमें आजीवन कारावास तक सजा के प्रावधान हैं।
आरोप है कि श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में स्कॉलरशिपघोटाला (इंदौर फर्जी स्कॉलरशिप घोटाला) हुआ। इसमें पसारी बंधुओं के साथ ही कॉलेज प्राचार्य पंकज शर्मा पर केस दर्ज किया गया।
इसमें एक केस छात्रा का फर्जी प्रवेश दिखाकर शासन से 28 हजार 850 रुपए की स्कॉलरशिपलेने का है। हालांकि कॉलेज संचालकों ने बाद में तर्क दिया कि यह राशि लौटा दी थी।
कौन है पुरुषोत्तमदास पसारी
पसारी इंदौर और मध्य प्रदेश में शिक्षाजगत के साथ ही कपड़ा कारोबार, समाजसेवा के लिए बड़ा नाम हैं। वह दो दर्जन से ज्यादा संस्थाओं में विविध भूमिकाओं में रहे हैं।
साथ ही दर्जन भर से ज्यादा ट्रस्ट में भी पदों पर रह चुके हैं और अभी भी कई ट्रस्ट में जुड़े हैं। वह श्री वैष्णव ट्रस्ट में भी हैं। इसी ट्रस्ट के तहत चल रहे श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय (एसवीवीवी) में चांसलर पद पर भी हैं।
हाल ही में वह माहेश्वरी कॉलेज में मैनेजमेंट और कॉलेज प्राचार्य राजीव झालानी के साथ हुए विवाद में भी चर्चा में आए थे। इसमें झालानी को हटा दिया गया था। बाद में उन्होंने खुद ही इस्तीफा दे दिया था।
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