इंदौर वरिष्ठ जिला पंजीयक अंबरेश नायडू फिर गए हाईकोर्ट, ट्रासंफर पर स्टे की मांग

Sanjay Gupta | Mar 24, 2026, 19:38 IST
Photograph: (the sootr)
INDORE. इंदौर में पदस्थ वरिष्ठ जिला पंजीयक अंबरेश नायडू एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। डबल बेंच द्वारा ट्रांसफर पर स्टे हटाने के बाद फिर सिंगल बेंच में याचिका दायर की है।

वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू फिर ट्रांसफर रूकवाना चाहते हैं। उनका ट्रांसफर 21जुलाई 2025 को इंदौर से रतलाम हुआ था। इस पर 1 अगस्त 2025 को उन्हें हाईकोर्ट से स्टे मिल गया था। लेकिन 17 मार्च 2026 को ही हाईकोर्ट ने यह स्टे हटा दिया।



स्टे हटने के बाद अब उन्हें ट्रांसफर की चिंता सता रही है। इस पर फिर उन्होंने याचिका दायर की, जिस पर मंगलवार को हाईकोर्ट इंदौर में सुनवाई हुई। हालांकि अभी कोई राहत के आदेश नहीं हुए, लेकिन पक्ष सुनकर आदेश रिजर्व रखा गया है।



ईओडब्ल्यू में दर्ज है एफआईआर

इसके पहले 5 जुलाई 205 को ईओडब्ल्यू ने कम मूल्य पर रजिस्ट्री करने के आरोप में निजी व्यक्तियों के साथ ही उप पंजीयक संजय सिंह और नायडू दोनों पर केस दर्ज किया था। इस एफआईआर के खिलाफ सिंह और नायडू दोनों हाईकोर्ट गए थे।



यहां से 1 अगस्त 2025 को नायडू को ट्रांसफर पर स्टे मिल गया था। साथ ही सिंह और नायडू दोनों को ईओडब्ल्यू में दर्ज एफआईआर के विरूद्द दंडात्मक कार्रवाई पर भी स्टे मिल गया था।



लेकिन 17 मार्च को हाईकोर्ट ने स्टे हटाया

लेकिन इसी मामले में डबल बेंच में चल रही सुनवाई के दौरान 17 मार्च 2026 को यह बात आई कि नायडू की मूल याचिका तो ईओडब्ल्यू की एफआईआर क्वैश को लेकर है। इसमें कभी भी ट्रांसफर पर स्टे की मांग तो हुई ही नहीं थी। यह बत सरकारी पक्ष द्वारा उठाई गई। इसके बाद डबल बैंच ने नायडू के ट्रांसफर लगा स्टे हटा दिया। यानी उन्हें रतलाम ज्वाइन करने जना होगा।



इस पर नायडू ने यह लगाई याचिका

इस पर नायडू ने फिर याचिका लगाई और ट्रांसफर आदेश पर स्टे की मांग की। नायडू के अधिवक्ता ऋषि तिवारी ने तर्क रखा कि 5 जुलाई को एफआईआर हुई और फिर 21 जुलाई को सरकार ने ट्रांसफर किए लेकिन इसकी सूचना नहीं दी गई। जब हाईकोर्ट में हमारी याचिका थी और 1 अगस्त को सुनवाई लगी, तब यह आदेश 30 जुलाई को हमे बताया गया। यह आदेश बैकडेट में बना और ईओडब्ल्यू एफआईआर के कारण किया गया।



जबकि आदेश में कहा गया कि प्रशासनिक कारण से किया गया। इसमें दो-दो स्थितियां बताई गई। सरकार ने स्थिति साफ नहीं की। इस पर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि यह प्रशासनिक कारण से किया गया ट्रांसफर था क्योंकि रतलाम जगह खाली थी। नायडू पहले 2018 से 2021 तक इंदौर रह चुके हैं औऱ फिर रतलाम ट्रांसफर हुए थे। रतलाम से फिर वह 2023 से इंदौर आए थे। प्रशासनिक सुविधा से उन्हें रतलाम भेजा गया था।



हाईकोर्ट ने आदेश के दस्तावेज मांगे

इस मामले में हाईकोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता से इन दोनों आदेश की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। यह प्रशासनिक आदेश था या फिर ईओडब्ल्यू एफआईआर के कारण हुआ था। इसके लिए शासकीय अधिवक्ता को समय दिया गया है। वहीं आदेश को सुनकर रिजर्व रखा गया है।



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