इंदौर स्कीम 171 के प्लॉटधारक 13 अक्टूबर से करेंगे अनिश्चितकालीन आंदोलन, असमंजस में अधिकारी
आईडीए दफ्तर के बाहर 13 को प्रदर्शन
इंदौर विकास प्राधिकरण (Indore Development Authority) की स्कीम 171 से मुक्ति के लिए प्लॉटधारक 33 साल से संघर्ष कर रहे हैं। अब संघर्ष समिति ने रविवार 11 अक्टूबर को बैठक कर फैसला लिया है। इसके तहत अब 13 अक्टूबर को ये आईडीए (IDA) के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करेंगे और यह अनिश्चितकालीन होगा। इससे पहले इनके द्वारा बीते माह आंदोलन किया गया था। तब आईडीए ने लिखित वादा कर यह आंदोलन टाला था कि एक माह में इस मामले पर फैसला होगा और अगली मीटिंग में यह मुद्दा रखा जाएगा।
यह हुआ आज की बैठक में
इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 171 से मुक्ति के संबंध में संघर्ष समिति द्वारा एक आवश्यक मीटिंग का आयोजन किया गया। इसमें योजना 171 से पीड़ित समस्त कॉलोनियों के पदाधिकारी उपस्थित हुए। मीटिंग में सभी ने तय किया कि आईडीए ने 10 सितंबर 2026 को उनसे जो लिखित वादा किया था, वह 13 अक्टूबर को याद दिलाया जाएगा। अगली बोर्ड मीटिंग 13 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
मंगलवार को सुबह 10.30 बजे IDA कार्यालय पर बोर्ड मीटिंग की जानकारी और निर्णय जानने के लिए परिवार सहित उपस्थित होंगे। यदि पीड़ित पक्ष के हित में निर्णय नहीं होता है तो अनिश्चितकालीन या निर्णय होने तक वहीं उपस्थित रहकर आंदोलनरत रहेंगे। इस आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मीटिंग में पुष्प विहार कॉलोनी से एनके मिश्रा, राजेश तोमर, भावना अवस्थी, महालक्ष्मी नगर से पंकज जायसवाल गुप्ता, बहादुर सिंह सिसोदिया आदि उपस्थित हुए।
अधिकारी असमंजस में, अभी तक कुछ तय नहीं
उधर, संभागायुक्त भास्कर लाक्षकार, कलेक्टर शिवम वर्मा और आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े असमंजस के दौर में हैं। भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ न तो अभी तक इस मुद्दे पर कोई बैठक हुई है और न ही कोई मार्गदर्शन मिला है। इसके लिए बीच में कई बार भोपाल बात हुई, लेकिन बैठक तय नहीं हुई। इसके चलते अभी तक तय नहीं हुआ कि आगे क्या किया जाए। वहीं, पीड़ितों का संघर्ष और गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
भूमाफिया से प्रशासन और पुलिस निपट सकती है
अधिकारियों की चिंता इस बात की है कि इसमें कुछ संस्थाएं विवादित हैं और स्कीम मुक्त होने पर भूमाफिया को लाभ होगा। वहीं, प्लॉटधारकों का कहना है कि कुछ समय से देखा जा रहा है कि कुछ लोग यह भ्रामक सूचना सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं कि यदि IDA की स्कीम विड्रॉ कर ली गई तो भूमाफियाओं और अपात्र लोगों को प्लॉट मिल जाएंगे। यह गलत है। स्कीम विड्रॉ करना और प्लॉट आवंटन करना, दोनों विषय अलग-अलग विभागों से संबंधित हैं।
प्राधिकरण को स्कीम मुक्त करना है, वहीं प्लॉट आवंटन का दायरा सहकारिता विभाग के तहत है। संस्थाओं के सदस्यों के प्लॉट की रजिस्ट्री आदि की जांच तो प्रशासन भूमाफिया अभियान के तहत साल 2020-21 में भी कर चुका है। केवल इसी कारण से स्कीम से मुक्ति को नहीं रोका जा सकता है। इसके लिए पहले ही प्राधिकरण ने दिसंबर 2024 में 5.89 करोड़ रुपए भरवा लिए थे।