इंदौर में स्कूल शिक्षा विभाग में 2.47 करोड़ का घोटाला, अतिथि शिक्षक भी शामिल
इंदौर स्कूल शिक्षा विभाग में शासकीय राशि को निजी खातों में शिफ्ट कर दो करोड़ 47 लाख का गबन किया गया है। इसमें से अभी तक 24 लाख 82 हजार की वसूली हो चुकी है। इस घोटाले की जांच कलेक्टर इंदौर शिवम वर्मा ने जिला पंचायत सीईओ आईएएस सिद्धार्थ जैन की मॉनिटरिंग में 10 सदस्यीय कमेटी बनाकर कराई।
इस रिपोर्ट के आधार पर सीधे तौर पर पांच आरोपी जिम्मेदार हैं। इनके खिलाफ एफआईआर होगी। वहीं इस दौरान खातों से राशि विड्रॉ करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी विभागीय जांच बैठाई जाएगी। इनके लॉगिन पासवर्ड का उपयोग कर राशि ट्रांसफर हुई है।
सबसे बड़ा खिलाड़ी निकला चपरासी
इस खेल में सबसे बड़ा खिलाड़ी विभाग का भृत्य सिद्धार्थ जोशी निकला है। इसने अपनी पत्नी, पुत्र के विविध आठ खातों में यह एक करोड़ 74 लाख 86 हजार की सरकारी राशि डलवा ली।
दो अतिथि शिक्षकों ने भी खातों में ली घोटाला राशि
इसके साथ ही जांच में आया कि अतिथि शिक्षकों को भी इसमें फर्जी भुगतान किया गया है। इसमें अतिथि शिक्षक मोहन दांगी हैं जिनके आठ खातों में आठ लाख 41 हजार से अधिक का भुगतान हुआ है।
हालांकि जांच बैठने पर इन्होंने यह राशि सरकार को वापस कर दी है। इसके साथ ही अतिथि शिक्षक केदारनारायण दीक्षित हैं जिनके दो खातों में 16 लाख 66 हजार की राशि आई है।
इन दो आरोपियों के खातों में भी पहुंची राशि
इसके साथ ही एक और भृत्य है पवन खामोद, इसके खाते में 32 हजार 800 रुपए आए हैं। सहायक ग्रेड टू छोटेलाल गौड़ की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन इनके खाते में भी एक लाख 16 हजार का फर्जी भुगतान हुआ है। साथ ही 13 अन्य खातों में भी 45 लाख 21 हजार की राशि ट्रांसफर की गई है।
इन सभी ने खातों में राशि को मंजूर किया
इस मामले में सीधे तौर पर पांच आरोपी हैं जिन पर एफआईआर होगी। वहीं जांच रिपोर्ट में इस राशि को ट्रांसफर करने की मंजूरी देने वाले उच्च अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उंगली उठाई है। इनके लॉगिन पासवर्ड का ही उपयोग किया गया है और इसे मंजूरी दी गई है।
ऐसे में इनकी भी विभागीय जांच होगी और घोटाले में भूमिका पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई होगी। साथ ही राशि की वसूली भी होगी। इसमें अप्रूवर प्राचार्य ओपी वर्मा, अनिता चौहान, डॉ. शांता स्वामी भार्गव, महेश खोटे के साथ ही गणक क्रिएटर राजेंद्र सिंह जाधव, मेघना चार्ल्स, दिनेश पंवार शामिल हैं।
घोटाले के दौरान 26 अधिकारी-कर्मचारी रहे पदस्थ
कलेक्टर द्वारा इसमें साल 2017-18 से 2025-26 तक की जांच कराई गई है। इस दौरान विभाग में राशि की गणना करने वाले गणक से लेकर सहायक ग्रेड 1, 2 व 3 बाबू, भृत्य कुल 19 लोग शामिल हैं। वहीं साथ विड्रॉ को मंजूर करने वाले 7 अधिकारी हैं।
इसमें प्राचार्य विजया शर्मा, हीरालाल खुशाल, केशर सिंह डाबर, महेश खोटे, ओपी वर्मा, अनिता चौहान के साथ ही सहायक संचालक शांतास्वामी भार्गव का नाम है।
वेतन भत्तों से भी खेल
जांच कमेटी ने इसमें माइक्रो जांच की है। इसमें आया है कि जिन्हें आवास की पात्रता नहीं है उन्हें भी आवास भत्ता दिया गया, कई लोगों को नियम के परे किराया राशि दी गई, वाशिंग भत्ता जैसे मदों से भी खेल किया गया है और राशि ट्रांसफर की गई है।
जांच कमेटी में ये थे शामिल
जांच कमेटी में संभागीय संयुक्त संचालक कोष व लेखा दिव्या शर्मा के साथ ही मनीष दुबे, गुंजन तेजावत, प्रतीक गौड़, सजल सक्सेना, चेतना पटेल, सिम्पल पटेल, निधि कटियार, सुनंधा बघेल, अमान नकवी शामिल थे।
क्या बोल रहे अधिकारी
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि सभी से सरकारी राशि की वसूली की जाएगी। इसमें दोषियों पर एफआईआर होगी और विभागीय जांच भी की जाएगी। इसमें कड़ी कार्रवाई के आदेश किए गए हैं। सीईओ जिला पंचायत सिद्धार्थ जैन ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने आदेश किए हैं। इसी अनुसार दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है।
ये खबर भी पढ़िए...
MP News: इंदौर में युवक ने टैक्सी में दंपती को बनाया बंधक, पेचकस से हमला, TI की लापरवाही बेनकाब
इंदौर लोकायुक्त में PWD एसडीओ, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, सब इंजीनियर 2.50 लाख की रिश्वत में धराए