शिशुकुंज स्कूल के पानी में भागीरथपुरा कांड वाला कोलीफार्म बैक्टीरिया, फूड सैंपल फेल
इंदौर में शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल झलारिया कैंपस में 20 जून को एक साथ करीब 150 बच्चे बीमार हो गए थे। इन्हें उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं आई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने दल भेजकर इसकी जांच कराई और किचन को सील कर दिया था।
मौके से कई फूड, पानी, आईसक्रीम, मिल्क प्रॉडक्ट के सैंपल लिए गए थे। द सूत्र को मिली एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार कई सैंपल फेल हुए हैं।
पानी में वो बैक्टीरिया, जिसने किया था भागीरथपुरा कांड
इंदौर में दिसंबर-जनवरी के दौरान भागीरथपुरा में दूषित पानी का कांड हुआ था। जिसमें 35 लोगों की जान गई थी। इस बोरिंग के दूषित पानी में ई कोलाई और कोलीफार्म जैसे बैक्टीरिया मिले थे।
अब यही बैक्टीरिया शिशुकुंज स्कूल के पानी में मिले हैं। यानी यहां का पानी दूषित पाया गया है। बच्चों के बीमार होने का सबसे अहम कारण यही माना गया है। खुशकिस्मती रही कि बच्चों ने पानी कम मात्रा में पिया। वहीं बैक्टीरिया की संख्या में इतनी अधिक नहीं मिली कि जान को खतरा होता लेकिन इससे एक साथ 150 बच्चों को बीमार कर दिया।
सोयाबीन तेल, नमकीन सब फेल
वहीं प्रशासन की टीम ने मौके से कई फूड सेंपल भी लिए थे। इसमें सोयाबीन तेल का सेंपल भी फेल हो गया, हालांकि यह मानक स्तर से थोड़ा ही नीचे आया और इसका कारण भी तेल जिसमें आया वह कंटेनर बताया गया है। वहीं नमकीन एक्सपायर्ड डेट का था, वह भी सैंपल फेल हुआ है।
आईसक्रीम में भी मिली गड़बड़ी
वहीं पानी के बाद सबसे ज्यादा आपत्ति आईसक्रीम को लेकर आई है। आईसक्रीम के ट्रांसपोर्टेशन में लापरवाही बरती गई। अमूल कंपनी की ये आईसक्रीम तापमान में पिघल गई और फिर इसे फ्रीजर में रखा गया और जमाया गया। इस दौरान यह खराब हो गई। अधिक खराब होने पर इसमें भी लिस्टीरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया डेवलप हो जाते हैं। आईसक्रीम के भी सैंपल फेल हुए हैं।
पानी के लिए आरओ फिर क्यों हुआ दूषित
स्कूल मैनेजमेंट कमेटी ने द सूत्र को बताया कि यहां पूरा पानी इंडस्ट्रियल आरओ का उपयोग होता है। फूड सामग्री पूरी तरह से बदल दी है। हमारे यहां ओपन किचन है कोई भी कभी भी आकर भोजन कर सकता है।
मैनेजमेंट स्कूल टीचर आदि भी यहीं भोजन लेते हैं। जानकारों के अनुसार, आरओ पानी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक खुला रखा जाए तो उसमें बैक्टीरिया दोबारा पनप सकते हैं।
अगर पानी एयर टाइट तरीके से स्टोर नहीं किया गया हो तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में आरओ पानी को भी लगातार बदलना होता है।
ई. कोलाई और कोलीफॉर्म से क्या होता है
कोलिफार्म बैक्टीरिया(Coliform): यह मिट्टी, पौधों और जानवरों या इंसानों की आंतों में पाया जाता है। पानी में इसका मिलना यह बताता है कि पानी की पाइपलाइन या स्रोत में कोई बाहरी अशुद्धि मिल रही है
ई. कोलाई (E. coli)- यह कोलीफॉर्म परिवार का ही एक विशिष्ट हिस्सा है। अगर पानी में ई. कोलाई पाया जाता है, तो यह सीधे तौर पर मल से पानी के दूषित होने का पक्का प्रमाण होता है।
कलेक्टर ने बनाया दल, अभी किचन चालू नहीं होगा
वहीं इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस रिपोर्ट के बाद एक जांच दल गठित कर दिया है। इसमें एसडीएम से लेकर फूड अधिकारी, डॉक्टर व अन्य रहेंगे। स्कूल को नोटिस दिया है कि वह 14 दिन के भीतर अपनी व्यवस्थाएं ठीक कर लें।
इसके बाद स्कूल द्वारा सूचित किए जाने पर यह दल मौके पर जांच करेगा और फिर से सैंपल लेगा। सभी क्लीन रिपोर्ट होने के बाद ही स्कूल का किचन चालू किया जाएगा।
23 खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच हेतु भेजे गए थे
स्कूल में बच्चों के बीमार होने की खबर सामने आने के बाद जांच दल द्वारा 22 जून को स्कूल के किचन का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान किचन में उपयोग की जा रही खाद्य सामग्री जैसे पनीर, आइसक्रीम, 6 प्रकार के मसाले, शरबत, राजमा, तेल, नमकीन, 4 प्रकार की दालें, दूध, तैयार दाल, तैयार कोफ्ते, कोफ्ते की सब्जी, पके हुए चावल, रोटी और पीने के पानी सहित कुल 23 नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए। इन सभी सैंपलों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था।
एक्सपाइटरी डेट वाले पदार्थ मिले थे, किचन सील
निरीक्षण के दौरान स्कूल किचन में एक्सपायरी डेट निकल चुके मसालों के 10 पैकेट और नमकीन के 2 पैकेट पाए गए थे। जिसका केस बनाया गया। संयुक्त दल द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल के किचन को आगामी आदेश तक के लिए सील कर दिया गया था, जो अभी सील ही रहेगा।
ये भी पढ़ें...
इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में 100+ बच्चे बीमार, प्रशासन ने कैंटीन से जब्त की खाद्य सामग्री
इंदौर नगर निगम बजट में पहुंचे भागीरथपुरा पीड़ित, बीजेपी पार्षद बोले- कांग्रेसी गुंडे, ईरानी लीडर की मौत पर श्रद्धांजलि
आयोग ही तय करेगा भागीरथपुरा त्रासदी की वजह और जिम्मेदारी
इंदौर में भागीरथपुरा दूषित पानी के बाद अब फूड पॉइजनिंग, 35 लोगों की एक साथ बिगड़ी तबीयत