महिला की दहेज हत्या के केस में इंदौर के तहसीलदार दिलीप द्विवेदी उलझे, कोर्ट से जांच के आदेश
भोपाल की कोलार तहसील में नायब तहसीलदार रहते हुए दिलीप कुमार द्विवेदी पर नियमों के खिलाफ काम करने के आरोप लगे हैं। इसी मामले में अब उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। फिलहाल वे इंदौर के महू में अपर तहसीलदार के पद पर तैनात हैं।
विदिशा जिले की कुरवाई जिला अदालत ने उनके खिलाफ जांच के लिए इंदौर कलेक्टर को पत्र भेजा है। अब उनके कामकाज को लेकर विभागीय और अनुशासनात्मक जांच की जाएगी।
यह है मामला
मामला विदिशा जिले की राजकुमारी अहिरवार की मौत से जुड़ा है। राजकुमारी को गंभीर रूप से जली हुई हालत में इलाज के लिए भोपाल लाया गया था, जहां 23 नवंबर 2020 को उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने दहेज हत्या के मामले में उनके पति राजकुमार, ससुर घनश्याम और सास फूलबाई को आरोपी बनाया था।
इस मामले में भोपाल में नायब तहसीलदार रहते हुए दिलीप द्विवेदी ने ही मर्ग केस से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इसी मामले में अब उनके कामकाज की जांच की जा रही है।
क्या बोला जिला कोर्ट
कुरवाई जिला कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, अपने आदेश में कोर्ट ने तत्कालीन नायब तहसीलदार दिलीप कुमार द्विवेदी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि दिलीप द्विवेदी ने कोलार भोपाल में नायब तहसीलदार रहते हुए टीटी नगर चौकी हमीदिया से जुड़े मर्ग केस में हस्ताक्षर किए थे। यह मामला जलने से हुई महिला की मौत से जुड़ा था।
अदालत के मुताबिक, द्विवेदी के पास इस मर्ग कार्रवाई में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं था। उनके पास राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की ओर से ऐसा करने का कोई लिखित आदेश भी नहीं था। कोर्ट ने कहा कि विवाह के सात साल के भीतर हुई महिला की मौत के मामले में कार्रवाई करने के लिए वे अधिकृत नहीं थे।
अदालत की इसी टिप्पणी के आधार पर अब उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
द्विवेदी के कारण आरोपी को लाभ मिला
कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि दिलीप कुमार द्विवेदी की इस कार्रवाई से मामले की जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई। कोर्ट के अनुसार, उन्होंने अधिकार नहीं होने के बावजूद मर्ग कार्रवाई में हस्तक्षेप किया, जिससे आरोपियों को फायदा पहुंचाने की स्थिति बनी।
अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है। इसके लिए कोर्ट ने इंदौर कलेक्टर को पत्र भेजने के निर्देश दिए हैं।
भोपाल, फिर रायसेन और इंदौर कलेक्टर को पत्र
द्विवेदी का भोपाल से तबादला होने के बाद वे रायसेन जिले के बेगमगंज में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ हुए। इसके बाद उनकी पोस्टिंग इंदौर में हो गई।
इसी वजह से जिला कोर्ट ने पहले भोपाल कलेक्टर, फिर रायसेन कलेक्टर और अब इंदौर कलेक्टर को पत्र भेजा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। Indore News | दहेज हत्या का केस
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