UPI पर एमडीआर विरोध पर इंदौर में फैसला, यह लागू तो क्यूआर कोड दुकानों से हटा देंगे, नकद लेंगे
लेकिन व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं। इंदौर में व्यापारी 23 सितंबर को पहले ही नो यूपीआई पेमेंट डे मना चुके हैं। वहीं शुक्रवार को अहम बैठक में लेकर सख्त फैसला लिया गया।
अहिल्या चेंबर्स ने बुलाई थी सुबह बैठक
15 अक्टूबर से UPIलेन-देन पर सरचार्ज लगाने के प्रस्ताव का व्यापारी विरोध कर रहे हैं। अब यह विरोध निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। व्यापारियों की मांग पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक फैसला नहीं आया है। ऐसे में नकद लेन-देन शुरू करने पर चर्चा के लिए अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार सुबह व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई।
बैठक में लिया गया यह फैसला
चेम्बर्स अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल की अध्यक्षता में बैठक हुई। चेम्बर्स अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने बताया कि बैठक में सख्त फैसला लिया गया है। जिस दिन से एमडीआर लागू होगा, उसी दिन सभी व्यापारी अपनी दुकानों से यूपीआई और क्यूआर कोड हटा लेंगे। दुकानों पर पोस्टर लगा देंगे कि यहां सिर्फ नकद भुगतान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि व्यापारी यूपीआई पर शुल्क लगाने का किसी भी तरह से समर्थन नहीं करेंगे। ऐसा करना फिर से नोटबंदी से पहले वाले दौर में लौटने जैसा होगा।
ग्राहक सुविधा का शुल्क व्यापारी क्यों दे?
चेंबर्स के मंत्री गोविंद खंडेलवाल, संयुक्त सचिव अक्षय जैन और नरेंद्र बाफना ने कहा कि व्यापारी ग्राहक को सामान या सेवा देता है, जबकि डिजिटल भुगतान की सुविधा ग्राहक इस्तेमाल करता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान का शुल्क व्यापारी से लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यापारी पहले से ही कई तरह के टैक्स, बैंक शुल्क और बढ़ती कारोबारी लागत का सामना कर रहे हैं। ऐसे में UPI लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापारियों का खर्च और बढ़ जाएगा।
हम डिजिटल भुगतान के विरोधी नहीं
व्यापारियों ने कहा कि वे डिजिटल भुगतान या नई तकनीक के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने ग्राहकों की सुविधा और बाजार की जरूरत के हिसाब से इसे अपनाया है। लेकिन सवाल यह है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा का खर्च व्यापारी ही क्यों उठाए?
व्यापारियों का कहना है कि वे पहले से ही महंगाई, कम मुनाफे और ऑनलाइन कारोबार से मिल रही टक्कर का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा दुकान का किराया, कर्मचारियों की तनख्वाह और दूसरे खर्च भी हैं। ऐसे में भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनका मुनाफा और कम होगा।
व्यापारी किसी से टकराव नहीं चाहते। आंदोलन करना भी उनकी पहली पसंद नहीं है। वे सिर्फ अपना कारोबार बचाए रखना चाहते हैं।
हमारी चुप्पी को सहमति मत मानो
जैन ने कहा कि व्यापारियों की चुप्पी को उनकी सहमति नहीं समझना चाहिए। व्यापारी सरल स्वभाव के होते हैं और विवाद से बचते हैं। लेकिन उनकी सहनशीलता की भी एक सीमा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना अलग बात है और उसका खर्च व्यापारियों पर डालना अलग। अगर सरकार डिजिटल भुगतान बढ़ाना चाहती है, तो उसे छोटे और मध्यम व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
व्यापारियों की मांग है कि कोई भी नया शुल्क लागू करने से पहले व्यापारी संगठनों से चर्चा की जाए। छोटे और मध्यम व्यापारियों को डिजिटल भुगतान के अतिरिक्त शुल्क से राहत मिले। उन्हें अपनी पसंद का भुगतान माध्यम चुनने की आजादी भी मिलनी चाहिए। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने का पूरा आर्थिक बोझ व्यापारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
सितंबर के आंकड़े भी चर्चा में
एनपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में यूपीआई से करीब 2451 करोड़ लेन-देन हुए थे। सितंबर में यह घटकर करीब 2407 करोड़ रह गए।
लेन-देन की कुल रकम भी अगस्त के 29.82 लाख करोड़ रुपए से घटकर सितंबर में 29.37 लाख करोड़ रुपए रह गई।
हालांकि, रोजाना होने वाले लेन-देन का औसत अगस्त में 79.1 करोड़ था, जो सितंबर में बढ़कर 80.2 करोड़ हो गया।
अब 15 अक्टूबर के बाद दिखेगा असर
व्यापारियों का कहना है कि एमडीआर लागू होने के बाद ही असली स्थिति साफ होगी। खासकर 2 हजार रुपए से ज्यादा के पी2एम लेन-देन पर नजर रहेगी। अगर व्यापारी बड़े डिजिटल भुगतान से बचते हैं या नकद भुगतान बढ़ता है, तो इसका असर आने वाले महीनों के आंकड़ों में दिखेगा।
इसके पहले 23 सितंबर को यह किया था
इससे पहले 23 सितंबर को इंदौर के राजबाड़ा पर व्यापारियों ने क्यूआर कोड और स्कैनर ढक दिए थे। इस दिन नो यूपीआई पेमेंट डे मनाया गया था। व्यापारियों का कहना है कि वे यूपीआई बंद करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका विरोध व्यापारियों पर शुल्क लगाने को लेकर है। अब देखना होगा कि इस प्रस्तावित शुल्क पर सरकार, आरबीआई, एनपीसीआई और व्यापारिक संगठनों के बीच क्या बातचीत होती है।
FAQ
- यूपीआई लेन-देन पर लगने वाला सरचार्ज क्या है और इसका व्यापारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यूपीआई लेन-देन पर लगने वाला सरचार्ज व्यापारियों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करेगा, विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यापारियों को, क्योंकि इससे उनके मुनाफे में और कमी आएगी। व्यापारी इससे असंतुष्ट हैं और अपनी दुकानों पर केवल नकद भुगतान लेने के लिए तैयारी कर रहे हैं। - अहिल्या चेम्बर्स की बैठक में क्या निर्णय लिया गया?
अहिल्या चेम्बर्स की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जैसे ही एमडीआर लागू होगा, व्यापारी अपनी दुकानों से यूपीआई और क्यूआर कोड हटा देंगे और केवल नकद भुगतान स्वीकार करेंगे। - क्या व्यापारी डिजिटल भुगतान के खिलाफ हैं?
नहीं, व्यापारी डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं हैं। उनका विरोध यूपीआई पर शुल्क लगाने के खिलाफ है, क्योंकि वे मानते हैं कि ग्राहक सुविधा का खर्च व्यापारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए।