ट्रैफिक जाम में फंसें कैलाश विजयवर्गीय, कलेक्टर ने ली निर्माण एजेंसियों की क्लास
इंदौर शहर अपनी रफ्तार के लिए जाना जाता है। लेकिन आजकल इस रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। शहर में ट्रैफिक की समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि अब आम जनता के साथ-साथ बड़े नेता और मंत्री भी सड़कों पर घंटों फंसे नजर आ रहे हैं।
ताजा मामला कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का है। बुधवार की शाम को मंत्री का काफिला इंदौर के व्यस्त एमआर-10 (MR-10) ब्रिज से गुजर रहा था। लेकिन वहां पहले से ही गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। हजारों लोगों और सैकड़ों गाड़ियों के बीच मंत्री विजयवर्गीय की गाड़ी भी रेंगने को मजबूर हो गई।
वीआईपी मूवमेंट होने के बावजूद मंत्री विजयवर्गीय को जाम से निकलने में काफी वक्त लग गया। यह घटना बताती है कि शहर का ट्रैफिक सिस्टम इस वक्त कितने बुरे दौर से गुजर रहा है।
शाम ढलते ही थम जाती है इंदौर की रफ्तार
इंदौर में रोजाना शाम के वक्त दफ्तरों और बाजारों से घर लौटने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है। छुट्टी के समय अचानक वाहनों का दबाव इतना बढ़ जाता है कि प्रमुख चौराहे पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं। रिंग रोड, बाईपास और एमआर-10 जैसे बड़े मार्गों पर गाड़ियां रेंगती हुई दिखाई देती हैं।
हर तरफ हॉर्न का शोर और लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। इस जाम के चक्कर में लोगों का कीमती समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
बारिश और आधे-अधूरे निर्माण कार्यों ने बढ़ाई मुसीबतें
इंदौर में ट्रैफिक जाम की इस स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह शहर में चल रहे अनगिनत निर्माण कार्य हैं। रिंग रोड और बाईपास समेत कई मुख्य रास्तों पर फ्लाईओवर और सड़कों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है।
बारिश के मौसम ने इस परेशानी को दोगुना कर दिया है। जगह-जगह हुए गड्ढों और जलजमाव के कारण गाड़ियों की रफ्तार वैसे ही आधी हो जाती है। निर्माण एजेंसियों ने कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाकर रास्ते संकरे कर दिए हैं। इन संकरे रास्तों से जब एक साथ सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, तो वहां कई किलोमीटर लंबा जाम लगना तय हो जाता है।
एक्शन मोड में इंदौर कलेक्टर, लिया जायजा
जब पुलिस प्रशासन जाम से निपटने में नाकाम साबित हुआ तो जिला प्रशासन को आगे आना पड़ा। इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर खुद अपनी टीम के साथ सड़कों पर उतरे।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने शहर के सबसे ज्यादा जाम प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने मौके पर मौजूद निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कलेक्टर ने कड़े शब्दों में निर्देश दिए कि जो भी निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, उन्हें युद्ध स्तर पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि जनता की परेशानी को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या वाकई सुधरेगी इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था?
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस तरह जाम में फंसना प्रशासन के लिए एक बड़ा वेक-अप कॉल है। जब शहर के सबसे बड़े जनप्रतिनिधि को सड़क पर इस तरह जूझना पड़ रहा है, तो आम जनता के हाल का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
अब देखना यह होगा कि कलेक्टर की इस सख्ती के बाद निर्माण एजेंसियां अपनी कार्यशैली में कितना सुधार करती हैं और इंदौर की जनता को इस रोजाना के 'ट्रैफिक टॉर्चर' से कब तक मुक्ति मिलती है।
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