जन्म प्रमाणपत्र के लिए अब कोर्ट जाना होगा, इंदौर-उज्जैन में नया जन्म प्रमाणपत्र का नियम लागू लेकिन व्यवस्था अधूरी
समझें क्या है पूरा मामला
- 1 अक्टूबर से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने का नियम बदल गया है।
- दो साल बाद पंजीयन कराने के लिए अब कोर्ट का आदेश जरूरी है।
- कोर्ट में आवेदन कहां लगेगा, यह कई जिलों में स्पष्ट नहीं है।
- नियम लागू हो गया, पर आवेदन की व्यवस्था तैयार नहीं हुई।
- नतीजा, सरकारी काउंटरों पर आवेदन बंद हैं और लोग चक्कर लगा रहे हैं।
आधार में सुधार कराना हो, तो जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है। नौकरी के लिए दस्तावेज बनवाने हों, तब भी यही कागज चाहिए। विदेश जाने के लिए वीजा बनवाना हो, तो भी जन्म प्रमाणपत्र मांगा जाता है।
अब देरी से बनने वाला जन्म प्रमाणपत्र (Delayed Birth Certificate) कोर्ट के जरिए बनेगा। लेकिन कई जिलों में यह तय नहीं है कि आवेदन कहां करना होगा। इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए, यह भी साफ नहीं है। यही सबसे बड़ी परेशानी है।
आम आदमी के सामने अब सीधा सवाल है। वह आखिर जाए तो कहां जाए? सरकारी काउंटर बंद हैं और कोर्ट में भी व्यवस्था तैयार नहीं है।
आधार में सुधार क्यों अटका?
एक परिवार की कहानी से यह बात साफ समझ आती है। उनकी बेटी का जन्म 2020 में घर पर हुआ था। परिवार के पास आंगनवाड़ी रिकॉर्ड, मार्कशीट, आधार और शपथपत्र हैं। इतने दस्तावेज होने के बाद भी उनका आवेदन नहीं लिया गया।
जन्म प्रमाणपत्र नहीं मिलने से आधार में सुधार भी अटक गया। यहीं से परिवार की परेशानी शुरू हो गई। नियम तो एक ही है, लेकिन हर किसी के लिए हालात अलग हैं।
11 जिलों में अलग-अलग व्यवस्था
इंदौर-उज्जैन संभाग के 11 जिलों में जांच की गई। इसमें पता चला कि एक ही नियम पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। कहीं आवेदन वापस किए जा रहे हैं, तो कहीं काउंटर पर लिए ही नहीं जा रहे।
देवास में तहसीलों से 40 से 42 आवेदन वापस किए गए। नगर निगम ने भी 10 आवेदन लौटा दिए। यानी एक ही जिले में 50 से ज्यादा आवेदन वापस हो गए।
आलीराजपुर और खंडवा में लोक सेवा केंद्रों ने आवेदन लेना बंद कर दिया। लोक सेवा केंद्र सरकारी सेवाओं से जुड़े कामों के लिए बनाए गए हैं। अब लोगों को अपने काम के लिए कोर्ट और कलेक्टोरेट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
झाबुआ में हर महीने 200 से 300 लोगों को पुराने जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है। लेकिन नए नियम के तहत कोर्ट में एक भी मामला नहीं पहुंचा। जन्म-मृत्यु पंजीयन के इस नियम का असर यहां साफ दिखाई दे रहा है। हर महीने 300 तक लोगों को जरूरत पड़ती है, लेकिन कोर्ट में एक भी फाइल नहीं पहुंची।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने क्या किया?
इंदौर में कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रक्रिया साफ करने के लिए पत्र लिखा है। यानी इंदौर में भी अभी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। प्रशासन चाहता है कि लोगों को आवेदन करने का रास्ता मिले। कलेक्टर का पत्र इस दिशा में पहला कदम है। असली राहत तब मिलेगी, जब कोर्ट में आवेदन लेने की व्यवस्था शुरू होगी।
कोर्ट में कब शुरू होगी व्यवस्था?
कोर्ट की ओर से भरोसा मिला है। इंदौर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को प्रशासन का पत्र मिल गया है।
न्यायाधीश बोले, प्रक्रिया बनाने का काम शुरू
कोर्ट ने काम शुरू कर दिया है, लेकिन तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को अभी इंतजार करना होगा।
जन्म प्रमाणपत्र के ऑनलाइन आवेदन (birth certificate online apply) पर भी जानकारी नहीं आई है। फिलहाल लोगों को कोर्ट और कलेक्टोरेट के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
जब तक कोर्ट में पूरी व्यवस्था शुरू नहीं होती, आवेदन की जगह तय नहीं होगी। इस वजह से जन्म प्रमाणपत्र के इंतजार में कई काम अटके रहेंगे।
FAQ
- 1 अक्टूबर से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने का नया नियम क्या है?
1 अक्टूबर से जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दो साल बाद पंजीयन कराने के लिए अब कोर्ट का आदेश जरूरी है। - कोर्ट में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कौनसे दस्तावेज चाहिए?
जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक दस्तावेजों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण आवेदन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है। - जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कहां करें और क्या वर्तमान में आवेदन की व्यवस्था चालू है?
वर्तमान में कई जिलों में सरकारी काउंटर बंद हैं और आवेदन के लिए कोर्ट में व्यवस्था भी तैयार नहीं हुई है, जिससे लोग आवेदन करने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।