इंदौर पीछे, अब उज्जैन आगे... नाम पर अटका मेट्रोपॉलिटन रीजन, आगे क्या होगा?
कितनी ही बार यह दोहराया जाए कि नाम में क्या रखा है? लेकिन यहां तो नाम में ही सब कुछ है। जी हां, कहानी मेट्रोपॉलिटन रीजन की है। मालवा में मेट्रोपॉलिटन रीजन का बहुप्रतीक्षित गठन नाम को लेकर उलझ गया है।
मामला सिर्फ रीजन के दायरे या विकास योजना का नहीं, बल्कि इस बात का बन गया है कि नाम में पहले कौन रहेगा- इंदौर या उज्जैन। यही वजह है कि महीनों से तैयार फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं और प्राधिकरण का गठन अधर में है। साथ ही यह भी तय नहीं हो पा रहा है कि मेट्रोपॉलिटन रीजन का मुख्यालय उज्जैन बनाया जाए या इंदौर से काम हो।
दरअसल, शुरुआत में इसका नाम इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आईएमआर) रखने का प्रस्ताव था। उस समय लगभग सभी स्तरों पर सहमति बन गई थी। फिर जैसे-जैसे रीजन का दायरा बढ़ता गया और उज्जैन की एंट्री हुई, वैसे नाम भी बदलता गया।
पहले यह आईयूएमआर बना और बाद में फाइनल प्रस्ताव से ठीक पहले इसे बदलकर उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) कर दिया गया। अब यही बदलाव पूरे मामले की सबसे बड़ी अड़चन बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जब फाइल में उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन देखा तो उन्होंने आपत्ति जता दी। बताया जा रहा है कि मंत्री ने फाइल वापस लौटा दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने स्टाफ से जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि नाम में ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है।
हालांकि, जब दोबारा फाइल उनके पास पहुंची तो उसमें फिर इंदौर का नाम पीछे था। इसके बाद मंत्री विजयवर्गीय ने दूसरी बार भी फाइल लौटा दी। नतीजा यह हुआ कि अब तक प्राधिकरण का गठन नहीं हो सका है।
इंदौर के लोगों में भी नाराजगी
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024 में जब एमपीआईडीसी ने शुरुआती प्रस्ताव तैयार किया था, उसमें अवंतिका नाम जोड़ा गया था। बाद में इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी आईएमआर नाम सामने आया। इसके बाद जैसे-जैसे क्षेत्र का विस्तार हुआ, उज्जैन का नाम जुड़ता गया और नाम बदलकर आईयूएमआर हो गया।
अब पांचवीं बार में जब फाइनल प्रस्ताव तैयार हुआ, तो उससे पहले नाम बदलकर उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (यूआईएमआर) कर दिया गया। इसी बदलाव ने इंदौर में नाराजगी पैदा कर दी है। शहर के लोगों ने भी इसे लेकर आक्रोश जताया है।
रीजन में अब 5 जिले किए शामिल
रीजन के एरिया में भी लगातार विस्तार होता रहा है। अब तक इसमें पांच बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। शुरुआत में इंदौर, उज्जैन, धार और देवास जिले के 6631 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया था। इसके बाद बदनावर और बड़नगर तहसील को जोड़ते हुए दायरा 7863 वर्ग किलोमीटर तक पहुंचा।
तीसरी बार मुख्यमंत्री के निर्देश पर शाजापुर जिले का कुछ हिस्सा भी इसमें शामिल किया गया और क्षेत्रफल बढ़कर 9336.1 वर्ग किलोमीटर हो गया। फिर विस्तार करते हुए इसका दायरा 9989.69 वर्ग किलोमीटर तक पहुंचा, जिसमें पांच जिले और 29 तहसील शामिल थीं। इन जिलों में इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर शामिल थे।
छह बार में एरिया हुआ फाइनल
पांचवीं बार में रीजन का क्षेत्रफल बढ़ाकर 14,550 वर्ग किलोमीटर किया गया। अब छठवीं बार में जाकर एरिया फाइनल हो पाया है। दिसंबर में इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक के दौरान 14,550 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र तय किया गया था।
बाद में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शाजापुर जिले की दो और तहसीलों को जोड़कर पूरे जिले को इसमें शामिल किया जाए। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री ने बड़नगर और शाजापुर-मक्सी का पूरा हिस्सा शामिल करने की घोषणा भी कर दी थी।
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