इंदौर के वंदे मातरम् विवाद और कांग्रेस पार्षदों के निगम सम्मेलन में नहीं जाने पर पार्टी की जांच शुरू, नेताओं के बयान दर्ज
News in Short
- वंदे मातरम् विवाद के बाद कांग्रेस ने जांच शुरू की।
- दो सदस्यीय कमेटी ने देवास में बयान लिए।
- सात नेताओं से अलग अलग और सामूहिक बयान दर्ज हुए।
- निगम विशेष सत्र में पार्षदों के नहीं आने पर भी सवाल हुए।
- पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में हुए वंदे मातरम विवाद और विशेष सत्र में कांग्रेस मुस्लिम पार्षदों के नहीं पहुंचने के मामले में जांच शुरू हो गई है। दो सदस्यीय जांच कमेटी ने देवास में कुल सात नेताओं के बयान मंगलवार को दर्ज किए।
News in Detail
इंदौर के वंदे मातरम् विवाद और इसके बाद महिला आरक्षण को लेकर हुए विशेष सत्र में कांग्रेस के मुस्लिम पार्षदों के नहीं पहुंचने पर पार्टी ने जांच शुरू कर दी है। मप्र कांग्रेस सह प्रभारी संजय दत्त और एआईसीसी सचिव उषा नायडू की दो सदस्यीय जांच कमेटी ने इस घटनाक्रम से जुड़े सात नेताओं के देवास में बयान लिए। देवास में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम के निजी स्कूल में सुबह से दोपहर तक यह बयान लिए गए।
इनके लिए गए बयान
कमेटी ने सबसे पहले केके मिश्रा के बयान लिए। इसके बाद पार्षद फौजिया शेख और पार्षद रुबीना इकबाल के बयान हुए। फिर अमिनुल खान सूरी के बयान लिए गए। इन सभी से अलग-अलग बात हुई। इसके बाद अंसाफ अंसारी, सादिक खान, रफीक खान और अनवर दस्तक के बयान हुए। इनके भी पार्टी अलग-अलग बयान लेना चाहती थी, लेकिन इन्होंने कहा कि हम साथ हैं और साथ में बयान दे सकते हैं। इसके बाद सभी के एक साथ बयान हुए।
जांच कमेटी में चिंटू नहीं पहुंचे
जांच कमेटी ने शहराध्यक्ष इंदौर चिंटू चौकसे को भी बुलाया था, लेकिन वह देरी से देवास पहुंच सके। तब तक कमेटी जा चुकी थी। माना जा रहा है कि अब कमेटी आपस में बात करके उन्हें किसी भी दिन बयान के लिए बुला लेगी।
यह बात की गई कमेटी में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमेटी ने सबसे पहले केके मिश्रा से समझा कि पूरा मामला क्या था। यह वंदे मातरम् विवाद क्यों हुआ और कैसे हुआ और किसने क्या बयान दिए। इसमें मिश्रा ने भी बयान दिया था कि वंदे मातरम नहीं गा सकते तो दोनों पार्षद पाकिस्तान में बस जाएं। इसके बाद फौजिया और रुबीना से बात की गई। फिर अमिनुल खान सूरी से बात की गई और उनसे घटनाक्रम समझा गया।
उधर, बाकी चार अन्य नेताओं से पूछा गया कि आखिर वह निगम के विशेष सम्मेलन में क्यों नहीं गए। इस पर इनके द्वारा घर में पारिवारिक आयोजन की वजह गिनाई।
क्या है पूरा विवाद
निगम के बजट सत्र के दौरान 8 अप्रैल को पार्षद फौजिया शेख देरी से पहुंचीं। इस पर बीजेपी ने कहा कि वंदे मातरम नहीं गाना पड़े इसलिए देरी से आईं। इस पर फौजिया ने कहा कि मैं वंदेमातरम नहीं गाऊंगी। इस पर विवाद हो गया। रुबीना खान ने कहा कि किसी के बाप में हिम्मत नहीं जो जबरदस्ती वंदेमातरम बुलवा सके, कांग्रेस पार्टी जाए भाड़ में। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
चिंटू चौकसे ने कहा कि वंदे मातरम हमारी रगों में है और हर कार्यक्रम में गाना अनिवार्य है, जो नहीं गा सकते वह नहीं आएं। रुबीना को निष्कासित कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि वंदे मातरम नहीं गाना मुझे भी अच्छा नहीं लगा, पार्टी मामले को देख रही है। उधर पार्षद राजू भदौरिया ने इसे फौजिया के पति शेख अलीम और महापौर की डील करार दिया, डील के तहत विवाद किया गया।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इसे बीजेपी की कुटिल साजिश कहा। उधर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जब महापौर ने विशेष सत्र बुलाया तो इसमें कांग्रेस के मुस्लिम पार्षद कोई भी नहीं गया, केवल 7 पार्षद पहुंचे थे। इस पर बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर दिया।
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