कांग्रेस में हुए वंदे मातरम् विवाद पर जांच कमेटी की रिपोर्ट में घिरे चिंटू
News In Short
- इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में वंदे मातरम् गान को लेकर विवाद हुआ था।
- पार्षद फौजिया शेख ने वंदे मातरम् गाने से इंकार किया था।
- इसके बाद पार्षद रुबीना खान के बयान से विवाद और बढ़ गया था।
- कांग्रेस ने जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
- रिपोर्ट में चिंटू चौकसे की बयानबाजी पर सवाल उठे हैं।
News In Detail
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में हुए वंदे मातरम् विवाद में कांग्रेस की कमेटी की जांच पूरी हो गई है। सूत्रों के अनुसार कमेटी ने यह रिपोर्ट मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी को सीधे दी है। इसमें दोनों महिला पार्षदों को राहत मिलने की बात है।
पार्षद रुबीना खान का बयान
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में 8 अप्रैल को कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने वंदे मातरम् गाने से इंकार कर दिया था। इस विवाद को और तूल तब मिला, जब पार्षद रुबीना खान ने कह दिया कि, किसी के बाप में दम नहीं कि वह जबरदस्ती वंदे मातरम् बुलवा सके। कांग्रेस जाए भाड़ में।
वहीं शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा था कि वंदे मातरम् तो गाना होगा। कांग्रेस के हर कार्यक्रम में अनिवार्य होगा। रुबीना अब खुद को कांग्रेस से निष्कासित माने।
इस विवाद में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने सह प्रभारी संजय दत्त और एआईसीसी सचिव उषा नायडू की दो सदस्यीय कमेटी बनाई थी। अब इस कमेटी ने रिपोर्ट दे दी है।
क्या है कमेटी की रिपोर्ट में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमेटी की रिपोर्ट में सीधे तौर पर किसी कार्रवाई की अनुशंसा नहीं है। घटनाक्रम को लेकर कमेटी ने देवास में बुलाकर सात लोगों के बयान लिए गए थे।
इसमें कमेटी ने माना कि पार्षदों ने गलती की है, लेकिन फौजिया ने बाद में इस पर कुछ नहीं कहा था। रुबीना ने अपने बयान के लिए पहले ही माफी मांग ली है। जानकारी के अनुसार कमेटी ने दोनों ही पार्षदों पर कठोर कार्रवाई जैसी कोई बात नहीं कही है।
लेकिन चिंटू की कार्यशैली पर सवाल
कमेटी ने इस मामले में शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। कमेटी ने कहा है कि इस मामले में चौकसे ने जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी थी। साथ ही सार्वजनिक बयानबाजी की, जो पार्टी के लिए उचित नहीं थी।
वंदे मातरम् को हर कार्यक्रम में अनिवार्य करने जैसी बातें कहने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने अपने ही स्तर पर रुबीना को पार्टी से निष्कासित बता दिया जो सही नहीं था।
इस मामले को और बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। कमेटी ने इस मामले में नेताओं के बयानों को भी उचित नहीं माना।
कमेटी की रिपोर्ट पर क्या होगा
माना जा रहा है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे को ठंडा करने में ही लगी है। कोई तूल नहीं देना चाहती है। कारण है कि इससे उनके एक मजबूत वोट बैंक मुस्लिम में सेंध लगने का खतरा है।
पहले ही पार्टी के अंदर हिंदू और मुस्लिम पार्षदों के बीच इस विवाद के बाद खाई पैदा हो गई है। इस मामले की शिकायत इंदौर से ही कुछ राष्ट्रीय नेताओं को की गई है। कांग्रेस के आधे से ज्यादा पार्षद मुस्लिम हैं।
ऐसे में अब मामले को तूल देने की जगह ठंडा किया जा रहा है। इस मामले में अब फैसला प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को लेना है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का दखल रहेगा और क्योंकि चिंटू उनके करीबी हैं, तो उन्हें भी राहत मिलने की संभावना है। हालांकि राष्ट्रीय नेता चिंटू से नाराज हैं।
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