गरबे में नशा: इंदौर पुलिस ने विजनयगर के सजनप्रभा में हो रहे रास रात्रि गरबा को किया सील
गरबा मैदान पर नशे में मिला व्यक्ति
इंदौर पुलिस (Indore Police) के अनुसार, रास रात्रि गरबा आयोजन में सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया है। बिना पास के एक अनधिकृत व्यक्ति गरबा मैदान में पहुंच गया था। पुलिस ने नशे में मिले इस व्यक्ति के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। फिलहाल उसकी तलाश की जा रही है। आयोजक के खिलाफ बीएनएस की धारा 223(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बीएनएस की धारा 223 क्या है?
यह धारा लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवहेलना से जुड़ी है। इसके तहत आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले में आयोजक ने अनुमति की किन शर्तों का उल्लंघन किया, इसकी पूरी जानकारी पुलिस के आदेश से स्पष्ट होगी।
डीसीपी ने क्या कहा?
डीसीपी जोन टू अमन सिंह राठौर ने कहा कि आयोजकों को पहले ही सुरक्षा को लेकर समझाइश दी गई थी। शर्तों में साफ था कि लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कमी सामने आई। इसलिए पुलिस ने सख्ती दिखाई है। डीसीपी ने बताया कि नियमों का पालन नहीं करने पर यह कार्रवाई की गई है।
आयोजकों से यह कहा गया है
इंदौर पुलिस ने आयोजकों को गरबा स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए हैं। आयोजन स्थल पर आने वाले हर व्यक्ति के प्रवेश पास की जांच की जाए। पर्याप्त संख्या में सुरक्षा गार्ड तैनात होने चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। वहीं, सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जाए। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आयोजन स्थल पर किसी भी तरह का नशा नहीं होना चाहिए।
आयोजन की मंजूरी कौन देता है?
गरबा जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी होता है। आयोजन के स्थान और प्रकृति के अनुसार अलग-अलग विभागों से अनुमति लेनी पड़ सकती है। इनमें पुलिस, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग शामिल हो सकते हैं। अनुमति देते समय सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन जैसी शर्तें निर्धारित की जाती हैं। इनका उल्लंघन होने पर सक्षम अधिकारी नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं। गंभीर लापरवाही सामने आने पर आयोजन की अनुमति निरस्त भी की जा सकती है।
इंदौर में बनाया है शक्ति दल
इंदौर के पुलिस कमिश्नर (CP) संतोष कुमार सिंह ने नवरात्रि और गरबा उत्सव के दौरान महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'महिला शक्ति दल' (शक्ति मोबाइल) का गठन किया है। त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए यह विशेष पहल की गई है।
इसके तहत पूरे शहर में 15 विशेष शक्ति मोबाइल टीमें तैनात हैं। इन टीमों में महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। ये टीमें शाम से लेकर देर रात तक गश्त करेंगी। इनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
महिला पुलिसकर्मी गरबा स्थलों और आसपास के इलाकों में मनचलों पर कड़ी नजर रख रही हैं। इसके अलावा किसी बच्चे या अन्य व्यक्ति के गुम होने पर उसे परिवार तक पहुंचाने में भी मदद की जा रही है।
इंदौर पुलिस ने महिलाओं की त्वरित सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 70491-24444 भी जारी किया है। किसी भी परेशानी में इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
गरबा की शुरुआत कब और कैसे हुई?
गरबा गुजरात का पारंपरिक लोकनृत्य है। इसकी परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। गरबा का संबंध मां दुर्गा और शक्ति की आराधना से है। नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा के साथ गरबा किया जाता है। पहले महिलाएं मिट्टी के घड़े में दीपक रखकर उसके चारों ओर नृत्य करती थीं। इस घड़े को गरबो कहा जाता है। इसके भीतर जलता दीपक जीवन और दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
समय के साथ गरबा गुजरात से निकलकर देश के दूसरे राज्यों में भी लोकप्रिय हुआ। आज मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में नवरात्रि के दौरान बड़े गरबा आयोजन होते हैं। इनमें पारंपरिक गीतों के साथ आधुनिक संगीत का भी इस्तेमाल किया जाता है। वर्ष 2023 में यूनेस्को ने गुजरात के गरबा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया था।