नर्मदा नदी में मिले वोटर कार्ड की प्रारंभिक रिपोर्ट इंदौर कलेक्टर ने चुनाव आयोग को भेजी
इसमें कुल 346 वोटर कार्ड मिलने की जानकारी दी गई है। फिलहाल प्रशासन विस्तृत जांच कर रहा है।
नर्मदा नदी में वोटर कार्ड मिलने से हड़कंप
रविवार को मंडलेश्वर में नर्मदा नदी की सफाई के दौरान कई वोटर कार्ड मिले। इंदौर से पहुंची एक एनजीओ की टीम को सफाई करते समय ये कार्ड दिखाई दिए। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस नेता मौके पर पहुंचे। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाए।
इसके बाद चुनाव आयोग ने इंदौर के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रारंभिक रिपोर्ट भेजने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। खरगोन जिले से बरामद वोटर कार्ड भी इंदौर मंगाए गए हैं।
प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या सामने आया?
रिपोर्ट में बताया गया है कि नर्मदा नदी से कुल 346 वोटर कार्ड मिले हैं। ये सभी कार्ड इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 के द्वारकापुरी क्षेत्र के हैं। जांच में सामने आया है कि इनमें से 200 कार्ड अभी भी सक्रिय हैं, जबकि 129 मतदाताओं को नए वोटर कार्ड मिल चुके हैं। शेष कार्डों की जांच जारी है।अधिकांश कार्ड साल 2016 के हैं, वहीं कुछ कार्ड 2019 के भी हैं। प्रशासन ने रैंडम तौर पर कुछ मतदाताओं से फोन पर संपर्क किया है, जो अभी भी मतदाता सूची में मौजूद हैं।इस दौरान क्षेत्र में 3 से 4 BLO और एक सुपरवाइजर पदस्थ थे, जो 2025 में रिटायर हो चुके हैं। प्रशासन इन सभी से कार्डों को लेकर जानकारी जुटा रहा है।बरामद कार्डों के इंदौर पहुंचने के बाद संबंधित BLO से एक-एक कार्ड के पते और मतदाता की वर्तमान स्थिति का सत्यापन कराया जाएगा।
तत्कालीन BLO और सुपरवाइजर से मांगी जानकारी
वर्ष 2016 के दौरान संबंधित क्षेत्र में तीन से चार बूथ लेवल अधिकारी (BLO) कार्यरत थे। इनके अलावा एक सुपरवाइजर भी पदस्थ था। संबंधित सुपरवाइजर वर्ष 2025 में सेवानिवृत्त हो चुका है। प्रशासन इन सभी कर्मचारियों से वोटर कार्ड के संबंध में जानकारी जुटा रहा है। यह पता लगाया जाएगा कि कार्ड मतदाताओं तक क्यों नहीं पहुंचे। बरामद कार्ड इंदौर आने के बाद उनके पतों का सत्यापन किया जाएगा। संबंधित बीएलओ से प्रत्येक मतदाता की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी ली जाएगी।
क्या वितरण एजेंट ने फेंके थे वोटर कार्ड?
प्रशासन को आशंका है कि वोटर कार्ड वितरण के लिए एक साथ सौंपे गए होंगे। संभव है कि संबंधित बीएलओ या अन्य स्तर पर इनका वितरण नहीं हुआ हो। इसके बाद कार्ड लंबे समय तक कहीं रखे रहे होंगे। बाद में इन्हें नर्मदा नदी में फेंके जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कार्ड किसने फेंके, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन जांच में दो प्रमुख सवालों के जवाब तलाश रहा है। पहला, कार्ड वितरण में किस स्तर पर लापरवाही हुई? दूसरा, इंदौर के वोटर कार्ड मंडलेश्वर की नर्मदा नदी तक कैसे पहुंचे?
कार्ड बनने के बाद हो चुके चार बड़े चुनाव
बरामद वोटर कार्ड वर्ष 2016 के आसपास जारी होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद मध्य प्रदेश में दो विधानसभा और दो लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। प्रदेश में 2018 और 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे। वहीं 2019 और 2024 में लोकसभा चुनाव संपन्न हुए। ऐसे में पुराने कार्डों का अब नदी में मिलना जांच का विषय बन गया है।
आस्था पैलेस और आकाश नगर के पते मिले
नगर कांग्रेस कमेटी मंडलेश्वर के अध्यक्ष संतोष चौहान ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकांश कार्ड इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार के हैं। इनमें आस्था पैलेस, आकाश नगर और संत नगर के पते दर्ज हैं। चौहान के मुताबिक इंदौर से आई एक टीम नर्मदा की सफाई कर रही थी। इसी दौरान टीम को नदी में पड़े वोटर कार्ड मिले। उन्होंने बताया कि अन्य कार्डों की तलाश भी कराई जा रही है।
पॉलिथीन और रबर बैंड से बंधे मिले कार्ड
संतोष चौहान के अनुसार कई वोटर कार्ड पॉलिथीन की थैलियों में बंधे मिले। कुछ कार्ड रबर बैंड से बांधकर फेंके गए थे। उन्होंने मामले में मंडलेश्वर थाने में शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही है। फिलहाल प्रशासन कार्डों के वितरण और नदी तक पहुंचने की परिस्थितियों की जांच कर रहा है। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही लापरवाही और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।