इंदौर के 1.36 लाख वोटरों के नाम SIR में कटे, चुनाव आयोग के पास डिजिटल डेटा नहीं, RTI से खुली पोल

Amresh Kushwaha | Oct 03, 2026, 11:49 IST
इंदौर में वोटर लिस्ट से 1.36 लाख नाम हटाने पर विवाद।
इंदौर में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर नया सवाल खड़ा हुआ है। नाम हटाने में जिन ऐप और पोर्टल का इस्तेमाल हुआ, उनका डिजिटल डेटा आयोग के पास नहीं है। यह जानकारी आरटीआई से सामने आई है। देश में एसआईआर यानी वोटर लिस्ट की गहन जांच को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। ऐसे में यह जानकारी कई सवाल खड़े करती है।
issue regarding removal names voter list Indore taken new turn. Commission not possess digital data apps portals used process; information come light through RTI query.

आरटीआई में क्या खुलासा हुआ

आरटीआई के अनुसार मध्य प्रदेश में फर्जी और समान फोटो वाले वोटरों के नाम हटाए गए थे। इस काम में गरुड़ ऐप और ईआरओ (Electoral Registration Officer) नेट का इस्तेमाल हुआ था। अब इन दोनों का डेटा राज्य निर्वाचन आयोग के पास नहीं है। यह बात आरटीआई (Right to Information) के जवाब में सामने आई है।



इंदौर जिले के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों ने भी यह बात मानी है। उन्होंने कहा कि गरुड़ ऐप और ईआरओ नेट की एंट्री से जुड़ा कोई डिजिटल रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। इसमें पेन ड्राइव, वीडियो और बैकअप डेटा भी शामिल है। रिपोर्ट में इसे निर्वाचन आयोग की आईटी (Information Technology) शाखा का बड़ा खेल बताया जा रहा है।



1.36 लाख वोटर का मामला

पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने जिला निर्वाचन कार्यालय इंदौर और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश से मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उन्होंने 5 जनवरी 2022 से 15 अक्टूबर 2022 के बीच इंदौर की सभी नौ विधानसभा सीटों से हटाए गए एक लाख 36 हजार 552 मतदाताओं के दस्तावेज मांगे थे।



इनमें देपालपुर, इंदौर-1, इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4, इंदौर-5, डॉ. आंबेडकर नगर महू, राऊ और सांवेर विधानसभा शामिल हैं। इसके साथ उन्होंने कुछ और जानकारियां भी मांगी थीं।



इस पर जिला निर्वाचन कार्यालय इंदौर और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से एक जैसा जवाब मिला। दोनों ने कहा कि इस संबंध में कोई डिजिटल रिकॉर्ड संभालकर नहीं रखा गया है।



हर विधानसभा का जवाब अलग

रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों के अफसरों ने जून 2025 में जवाब दिए थे। ये जवाब पूरी तरह एक जैसे नहीं थे। देपालपुर 203 के कार्यालय ने लिखा कि ईआरओ नेट या बीएलओ (Booth Level Officer) गरुड़ ऐप से जुड़ा कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं रखा गया।



इंदौर-1 (204) का जवाब थोड़ा अलग था। वहां के कार्यालय ने कहा कि उस समय भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश नहीं थे। इसी वजह से डिजिटल रिकॉर्ड नहीं रखा गया।



बाकी सीटों पर जवाब लगभग एक जैसा रहा। इनमें इंदौर-2 (205), इंदौर-3 (206), इंदौर-4 (207) और इंदौर-5 (208) शामिल हैं। राऊ (210) और सांवेर (211) ने भी यही बात कही। इन सभी कार्यालयों ने बताया कि गरुड़ ऐप से जुड़ा कोई डिजिटल रिकॉर्ड उनके पास नहीं है।



आरटीआई में क्या मांगा था

आरटीआई में कई चीजों की जानकारी मांगी गई थी। इनमें गरुड़ ऐप और ईआरओ नेट पर हुई एंट्री का डिजिटल रिकॉर्ड शामिल था। अफसरों के फैसलों का रिकॉर्ड भी मांगा गया था। यह रिकॉर्ड वीडियो, पेन ड्राइव, व्हाट्सएप या ईमेल की कॉपी के रूप में हो सकता था।



इसके अलावा इन दोनों प्लेटफॉर्म को चलाने वाली ठेका कंपनी की जानकारी मांगी गई थी। कंपनी का कार्यादेश और अनुबंध भी मांगा गया था। कंपनी से निर्वाचन शाखा को मिले बैकअप रिकॉर्ड की मांग भी थी। कंपनी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के दस्तावेज भी मांगे गए थे। राज्य निर्वाचन पदाधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग के बीच हुए पत्राचार की कॉपी भी मांगी गई थी।



ठेकेदार पर टालमटोल

रिपोर्ट के अनुसार ठेकेदार और अनुबंध पर सवाल का सीधा जवाब नहीं मिला। अफसरों ने इस मामले में टालमटोल किया। कंपनी का वर्क ऑर्डर, बैकअप डेटा और पत्राचार की जानकारी नहीं दी गई।



अधिकारियों ने जवाब दिया कि यह जानकारी उनकी शाखा से जुड़ी नहीं है। कुछ जवाबों में इसे वरिष्ठ जिला निर्वाचन कार्यालय से जुड़ा बताया गया। इस तरह आरटीआई में मांगी गई कोई जानकारी दी ही नहीं गई।



गरुड़ ऐप पर क्या थे निर्देश

इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के पुराने आदेश भी चर्चा में हैं। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कुमार कौल ने दो परिपत्र जारी किए थे। ये परिपत्र 01 सितंबर 2022 और 02 दिसंबर 2022 को जारी हुए। इनमें साफ लिखा गया था कि फोटो सिमिलर एंट्री और डेटा सिमिलर एंट्री का फील्ड वेरिफिकेशन होना है। इसके लिए बीएलओ को गरुड़ ऐप का ही उपयोग करना था।



यानी राज्य स्तर से ऐप के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए थे। फिर भी जिला कार्यालयों के पास उसका डिजिटल रिकॉर्ड नहीं मिला।



सवा साल से शिकायत लंबित

पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने इस मामले की शिकायत 31 जुलाई 2025 को भेजी थी। यह शिकायत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजी गई थी। निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी को भी भेजी गई। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा को भी शिकायत दी गई।



शिकायत में आरोप लगाया गया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मप्र की 230 विधानसभा सीटों में नाम हटाए गए। आरोप है कि इसके बाद ऐप और उसका डेटा नष्ट कर दिया गया। यह भी आरोप है कि बैकअप नहीं लिया गया। ऐप चलाने वाले ठेकेदार पर कानूनी कार्रवाई न होने की बात भी कही गई।



रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत सवा साल से ज्यादा समय से लंबित है। आयोग ने अभी तक इस पर फैसला नहीं लिया है। इस रिपोर्ट में आयोग या अधिकारियों का अलग से कोई पक्ष शामिल नहीं है।

Tags:
  • information technology
  • इंदौर वोटर लिस्ट
  • गरुड़ ऐप
  • Right to Information
  • आरटीआई
  • पूर्व पार्षद दिलीप कौशल
  • भारत निर्वाचन आयोग
  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
  • मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा
  • मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी