रिश्वतखोरी में एमपी की महिलाएं भी पीछे नहीं, इंदौर के आंकड़े चौंकाने वाले

Sanjay Dhiman | Sept 14, 2026, 17:59 IST
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मध्य प्रदेश में लोकायुक्त के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 8 महीने में इंदौर में सबसे ज्यादा 10 महिला कर्मचारी रिश्वत लेते ट्रैप हुईं। भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर इंदौर से पीछे रहे।

मध्य प्रदेश में सरकारी दफ्तरों में महिलाओं की जिम्मेदारी बढ़ रही है। इसके साथ रिश्वतखोरी के मामलों में भी उनकी मौजूदगी सामने आई है। लोकायुक्त के आंकड़ों के मुताबिक इंदौर में बीते 8 महीने में 10 महिला कर्मचारी रिश्वत लेते ट्रैप हुईं। यह संख्या भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से ज्यादा है। जिला परियोजना अधिकारी से लेकर पटवारी तक, कई पदों पर महिलाएं आरोपी बनीं।



इंदौर में सरकारी दफ्तरों से जुड़ी एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। लोकायुक्त की ताजा कार्रवाई बताती है कि रिश्वतखोरी अब सिर्फ पुरुष अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। महिला अधिकारी और कर्मचारी भी इसमें बराबर की भागीदार बनती जा रही हैं।



पिछले 8 महीनों का डेटा देखें तो इंदौर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे है। यहां 10 महिला कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ी गईं। यह आंकड़ा भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों से भी ज्यादा है।



किस जिले में कितने मामले

भोपाल में 4 महिला कर्मचारी रिश्वत लेते ट्रैप हुईं। जबलपुर में यह संख्या 3 रही। ग्वालियर में 2 मामले दर्ज हुए। रीवा, सीधी, सागर, उज्जैन और मंदसौर में एक-एक मामला सामने आया।



इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कार्रवाई किसी एक विभाग या शहर तक सीमित नहीं रही। पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से शिकायतें आईं। हर जगह जांच के बाद ट्रैप की कार्रवाई हुई।



कहां कितनी रकम मांगी गई

इंदौर के मामलों में रिश्वत की रकम 2 हजार रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक रही। भोपाल में यह रेंज 2,500 से 1 लाख रुपए तक थी। ग्वालियर में 5 हजार से 20 हजार रुपए तक की मांग हुई।



जबलपुर में 4,500 से 5 हजार रुपए के बीच रिश्वत मांगी गई। रीवा और सीधी में 8 हजार रुपए का मामला सामने आया। सागर में यह रकम 2,500 रुपए रही। उज्जैन और मंदसौर में 15 हजार रुपए की मांग की गई।



ये हैं प्रमुख मामले

इंदौर के सबसे बड़े मामले में जिला परियोजना अधिकारी शीला एक लाख रुपए लेते ट्रैप हुईं। यह अब तक की सबसे बड़ी रकम बताई जा रही है।



शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की प्राचार्य मनीषा के मामले में रकम सिर्फ 2 हजार रुपए थी। इसके अलावा पटवारी प्रियंका, महिला एवं बाल विकास विभाग की अंजली, पटवारी भारती और नगर निगम की वार्ड प्रभारी संध्या के खिलाफ भी कार्रवाई हुई।



एक मामला बेहद दिलचस्प रहा। आयुष कार्यालय से जुड़े इस प्रकरण में महिला अधिकारी की जगह उसका पति रिश्वत की रकम लेने पहुंचा। पति नरेंद्र को 10 हजार रुपए लेते पकड़ा गया। इसके बाद उसे भी आरोपी बनाया गया।



बड़े पद से लेकर मैदानी अमले तक

इन मामलों से एक बात साफ होती है। रिश्वतखोरी की यह प्रवृत्ति किसी एक स्तर के कर्मचारी तक सीमित नहीं है। जिला स्तर के अधिकारियों से लेकर स्कूल प्राचार्य, पटवारी, महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर निगम के मैदानी कर्मचारी तक, सभी स्तरों पर कार्रवाई हुई है।



हालांकि इन आंकड़ों को महिलाओं में भ्रष्टाचार की दर नहीं माना जा सकता। यह सिर्फ उन मामलों की संख्या है जिनमें शिकायत मिली और जांच के बाद एजेंसी ने कार्रवाई की। कई मामले ऐसे भी हो सकते हैं जो अब तक सामने नहीं आए।



क्या कहते हैं ये आंकड़े

लोकायुक्त के ये आंकड़े प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में भ्रष्टाचार की एक झलक दिखाते हैं। इंदौर का नंबर वन पर आना कई सवाल खड़े करता है। क्या यहां निगरानी तंत्र में कोई कमी है, या शिकायतें दर्ज कराने में लोग ज्यादा सहज हैं। इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी सामने नहीं आया है।



आने वाले महीनों में यह देखना जरूरी होगा कि क्या इन ट्रैप कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है। या फिर आंकड़े इसी तरह बढ़ते रहते हैं।



हर साल सामने आते है रिश्वत के 200 मामले

मध्यप्रदेश में हर साल औसतन दो सौ से अधिक मामले रिश्वतखोरी के सामने आते है। लोकायुक्त के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से अबतक एमपी में 213 रिश्वत के मामले टीमों ने पकड़ें है। साथ ही फरवरी-2026 में विधानसभा सत्र के दौरान पेश किए गए आंकड़ों के अनुसान वर्ष 2022-23 से अब तक प्रदेश में भ्रष्टाचार से जुड़े 1,063 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में अलग-अलग विभागों के 1379 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। इनमें महिला और पुरुष कर्मचारी दोनों शामिल है।



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