मध्य प्रदेश के सीमेंट उद्योग पर संकट के बादल, ईरान युद्ध के कारण कीमतों में हो सकता है इजाफा
News in Short
- इजराइल ईरान युद्ध का असर: पश्चिम एशिया की जंग से पेटकोक और कोयले के दाम काफी बढ़ गए हैं।
- बढ़ती उत्पादन लागत: कच्चे माल और ईंधन महंगा होने से सीमेंट बनाना ₹200 प्रति टन महंगा हुआ।
- पैकेजिंग का झटका: कच्चे तेल की कीमतों के कारण सीमेंट की बोरियां भी 20% तक महंगी हो गई।
- मध्य प्रदेश पर मार: सतना और रीवा जैसे सीमेंट हब के प्लांट्स पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ा है।
- महंगी होगी बोरी: अप्रैल से सीमेंट की प्रति बोरी कीमतों में ₹15 तक का इजाफा हो सकता है।
News in Detail
ईरान युद्ध का असर अब भारतीय उद्योगों पर भी नजर आने लगा है। सीमेंट उद्योग की स्थिति पहले ही ओवरकैपेसिटी और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण कमजोर थी, और अब ईरान युद्ध ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। कच्चे माल, पेटकोक, कोल और पैकेजिंग मटीरियल्स की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से सीमेंट कंपनियां अब कीमतों में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही हैं।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें
सीमेंट उद्योग की प्रोडक्शन लागत में प्रमुख हिस्सा पेटकोक, कोल और पैकेजिंग मटीरियल्स का है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट आशुतोष मुरारका का कहना है कि सीमेंट उद्योग की उत्पादन लागत प्रति टन 150 से 200 रुपए तक बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के एबिटा मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।
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पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स का डबल अटैक
सिर्फ पत्थर पीसने का खर्चा नहीं बढ़ा है, बल्कि सीमेंट को पैक करने वाली बोरी भी महंगी हो गई है। ये पॉलीप्रोपाइलीन बैग सीधे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों से जुड़े होते हैं। युद्ध के कारण तेल महंगा हुआ, तो इन बोरियों की कीमत में 20% तक की तेजी आ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ पैकेजिंग की वजह से ही कंपनियों पर प्रति टन 60 रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश के 'सीमेंट हब' पर छाए संकट के बादल
मध्य प्रदेश भारत के उन राज्यों में से एक है जहां सीमेंट का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। सतना, कटनी और रीवा जैसे जिलों में बड़े-बड़े सीमेंट प्लांट्स लगे हुए हैं। ईरान युद्ध की वजह से इन प्लांट्स को मिलने वाला पेटकोक और कोल (कोयला) अब महंगा हो गया है। मध्य प्रदेश से देश के अन्य हिस्सों में सीमेंट भेजने वाले ट्रकों का किराया भी डीजल संकट के कारण बढ़ सकता है। इससे स्थानीय रोजगार और सप्लाई दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।
क्या है सीमेंट कंपनियों की रणनीति
मार्केट एक्सपर्ट आशुतोष मुरारका के मुताबिक, युद्ध के कारण उत्पादन लागत 150 से 200 रुपए प्रति टन बढ़ सकती है। कंपनियां इस घाटे को कम करने के लिए कीमतों में 4% से 5% तक की बढ़ोत्तरी कर सकती हैं। हालांकि, एमपी जैसे राज्यों में 'ओवरसप्लाई' (जरूरत से ज्यादा माल) की वजह से कंपनियां डरी हुई हैं। अगर उन्होंने दाम बहुत ज्यादा बढ़ाए, तो शायद ग्राहक खरीदारी कम कर दें।
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आपके घर के बजट पर क्या होगा सीधा असर?
अगर आप अगले महीने से मकान का काम शुरू करने वाले हैं, तो सावधान हो जाइए। अप्रैल के महीने से सीमेंट की एक बोरी पर आपको 7 से 15 रुपए ज्यादा देने पड़ सकते हैं। मध्य प्रदेश में कंस्ट्रक्शन का काम जोरों पर है, ऐसे में छोटे ठेकेदारों और आम आदमी के लिए बजट संभालना मुश्किल होगा।