जबलपुर की ऐतिहासिक बैलेंसिंग रॉक के पास कचरे का ढेर, जमीन के मालिकाना हक पर भी सवाल, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

Neel Tiwari | Oct 27, 2026, 20:17 IST
जबलपुर की ऐतिहासिक बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण और जमीन के मालिकाना हक को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
PIL has been filed in the Madhya Pradesh High Court seeking protection of Jabalpur's historic Balancing Rock and resolution of its land ownership dispute.
जबलपुर की ऐतिहासिक बैलेंसिंग रॉक की अनदेखी का मामला मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। प्राकृतिक धरोहर के आसपास कचरे का ढेर और जमीन निजी स्वामित्व में दर्ज होने के दावे पर सवाल उठे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने जनहित याचिका दायर कर जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज करने और बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण की मांग की है। अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

बैलेंसिंग रॉक की अनदेखी पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका

जबलपुर की पहचान मानी जाने वाली मदनमहल पहाड़ियों की बैलेंसिंग रॉक को बचाने के लिए अब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इसकी सुरक्षा और संरक्षण की मांग करते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका पंजीकृत हो चुकी है और अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, जबलपुर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और संबंधित विभागों को पक्षकार बनाया गया है।



प्राकृतिक चट्टान के आसपास कचरा, जमीन निजी नाम पर दर्ज होने का दावा

मंच का आरोप है कि राजस्व अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक संरचना की अनदेखी हुई है। याचिका के अनुसार, बैलेंसिंग रॉक की जमीन निजी स्वामित्व में दर्ज हो गई है और आसपास का क्षेत्र कचरे का ढेर बन गया है। मंच ने इस जमीन का मालिकाना हक वापस राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की मांग की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए अब तक जरूरी प्रयास नहीं किए गए हैं।



मदनमहल किले से करीब 400 मीटर दूर है बैलेंसिंग रॉक

बैलेंसिंग रॉक एक प्राकृतिक चट्टानी संरचना है, जो अपनी अनोखी बनावट के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। यह ऐतिहासिक मदनमहल किले से लगभग 400 मीटर की दूरी पर स्थित है। मदनमहल किले का निर्माण गोंड शासक राजा मदन शाह ने कराया था। इस किले का संबंध रानी दुर्गावती के इतिहास से भी जुड़ा है। ऐसे ऐतिहासिक क्षेत्र के पास स्थित प्राकृतिक संरचना का संरक्षण पर्यटन और शहर की विरासत, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



महाबलीपुरम की कृष्णा बटरबॉल का दिया उदाहरण

याचिका में तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित प्राकृतिक चट्टान कृष्णा बटरबॉल का उदाहरण दिया गया है। मंच का कहना है कि जब ऐसी प्राकृतिक संरचना को संरक्षण मिल सकता है, तो जबलपुर की बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए। याचिका में मांग की गई है कि बैलेंसिंग रॉक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की संरक्षित सूची में शामिल करने या उपयुक्त विरासत संरक्षण का दर्जा दिलाने के लिए कदम उठाए जाएं। साथ ही, इसे यूनेस्को की विरासत सूची में शामिल कराने की संभावनाओं पर भी विचार करने की मांग की गई है।



जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज करने और संरक्षण के निर्देश देने की मांग

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने अदालत से मांग की है कि जमीन का मालिकाना हक वापस राज्य सरकार के नाम दर्ज कराने के लिए संबंधित पक्षों को निर्देश दिए जाएं। इसके अलावा, बैलेंसिंग रॉक के संरक्षण, साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की मांग भी की गई है। याचिका में जियो-हेरिटेज साइट्स एंड जियो-रेलिक्स (संरक्षण और रखरखाव) कानून के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध भी शामिल है।



पीजी नाजपांडे की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने पेश की याचिका

यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष पीजी नाजपांडे की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार के संबंधित विभागों, राज्य सरकार, जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम जबलपुर सहित अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया गया है। अब इस मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी। सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि बैलेंसिंग रॉक की सुरक्षा और जमीन के मालिकाना हक को लेकर अदालत क्या निर्देश देती है।

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