जबलपुर डिस्ट्रिक्ट बार चुनाव विवाद पहुंचा हाईकोर्ट, सारे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश

Neel Tiwari | Jul 27, 2026, 19:35 IST
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जबलपुर बार एसोसिएशन चुनाव विवाद अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। चुनाव में कथित गड़बड़ियों के बाद रद्द हुए मतदान के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि मतपत्र, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी समिति की होगी।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला

  • जबलपुर जिला बार एसोसिएशन का चुनाव 20 जुलाई 2026 को हुआ था।
  • मतदान के दौरान भारी गड़बड़ियों के आरोप लगे और चुनाव रद्द कर दिया गया।
  • अब दोबारा मतदान 28 जुलाई 2026 को कराया जा रहा है।
  • एक अधिवक्ता ने हाई कोर्ट से पुराने चुनाव का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की।
  • हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश दिए और मामले की सुनवाई 4 अगस्त तय की।

जबलपुर जिला बार एसोसिएशन चुनाव का विवाद अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। चुनाव में गड़बड़ियों के आरोप पहले से चर्चा में थे। अब इस मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया है। हाई कोर्ट ने चुनाव से जुड़े सभी अहम रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जांच के लिए हर जरूरी साक्ष्य सुरक्षित रहना चाहिए।



चुनाव रद्द होने के बाद दायर हुई याचिका

यह मामला अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव की याचिका पर सामने आया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 20 जुलाई 2026 को हुए चुनाव में गंभीर अनियमितताएं हुईं। इसी कारण चुनाव रद्द करना पड़ा। अब 28 जुलाई को नए सिरे से मतदान कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पुराने चुनाव का रिकॉर्ड बचाना जरूरी है। तभी आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सकेगी।



हाई कोर्ट ने क्यों माना रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि चुनाव से जुड़े रिकॉर्ड का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। यदि रिकॉर्ड में बदलाव हुआ तो जांच प्रभावित हो सकती है। इससे जिम्मेदार लोगों की पहचान करना मुश्किल होगा। इसलिए अदालत ने पहले साक्ष्यों की सुरक्षा पर जोर दिया। बाद में जांच की दिशा तय करने की बात कही।





मतपत्र और सीसीटीवी फुटेज पर विशेष निर्देश

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 20 जुलाई के मतदान से जुड़ी सभी सामग्री सुरक्षित रखी जाए। इसमें मतपत्र शामिल हैं। जिला न्यायालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित रखे जाएंगे। आसपास लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी संरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि जांच में काम आने वाला कोई भी रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए।



एडहॉक (तदर्थ) समिति को दी गई बड़ी जिम्मेदारी

अदालत ने स्टेट बार काउंसिल की तदर्थ समिति को व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी है। समिति को पूरे रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। जरूरत पड़ने पर समिति पुलिस की मदद भी ले सकेगी। किसी अन्य सरकारी एजेंसी की सहायता लेने की भी अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य केवल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना है।



जांच समिति पर भी हाई कोर्ट ने जताई मंशा

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि चुनाव कराने के लिए तदर्थ समिति बनाई गई है। लेकिन अब तक किसी जांच समिति का गठन नहीं हुआ। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि पहले सभी पक्षों का जवाब लिया जाएगा। उसके बाद तीन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की समिति बनाने पर फैसला हो सकता है। यह समिति पूरे विवाद की तथ्यात्मक जांच कर सकती है।



तीन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की समिति पर विचार

कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रस्तावित समिति में तीन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हो सकते हैं। उनका स्तर प्रधान रजिस्ट्रार, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय या विशेष न्यायाधीश से कम नहीं होगा। यह समिति आरोपों की जांच करेगी। फिर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करेगी।



प्रतिवादियों को नोटिस, 4 अगस्त को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने बार काउंसिल आफ इंडिया सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें सात दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद 4 अगस्त 2026 को मामले की अगली सुनवाई होगी। उसी दिन जांच समिति के गठन पर भी अदालत फैसला ले सकती है। तब तक चुनाव से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश प्रभावी रहेंगे।



बार चुनाव विवाद में आगे क्या होगा

अब सभी की नजर 4 अगस्त की सुनवाई पर रहेगी। यदि जांच समिति बनती है तो चुनाव विवाद की विस्तृत जांच शुरू होगी। उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव से जुड़े किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। इससे जांच की निष्पक्षता बनी रहेगी।



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