BPL कार्ड में फर्जीवाड़ा! लखपति ले रहे थे गरीबों का राशन, हजारों नाम मिले संदिग्ध

Aman Vaishnav | Sept 02, 2026, 14:03 IST
जबलपुर राशन कार्ड फर्जीवाड़ा
जबलपुर में बीपीएल राशन कार्ड जांच के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां 6 लाख से 25 लाख रुपए तक सालाना कमाने वाले 5 हजार से ज्यादा लोग फर्जी तरीके से गरीबों का राशन ले रहे थे।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • जबलपुर में बीपीएल कार्डधारियों की जांच में बड़ी गड़बड़ी मिली है।
  • पांच हजार से ज्यादा परिवार आयकर सीमा से बाहर पाए गए।
  • कुछ परिवारों में सदस्य कंपनी के डायरेक्टर तक निकले।
  • कई परिवार जीएसटी भी जमा कर रहे थे।
  • प्रशासन ने सभी के कार्ड निरस्त कर एसडीएम के सामने जवाब मांगा है।

कितने परिवार मिले अपात्र

जानकारी के अनुसार जांच में 4 हजार 998 परिवार ऐसे मिले, जिनकी सालाना आय 6 लाख रुपए से अधिक है। वहीं 525 परिवारों में किसी न किसी सदस्य के पंजीकृत कंपनी में डायरेक्टर या अन्य बड़े पद पर होने की जानकारी मिली।



इसके अलावा 40 से 45 परिवार ऐसे भी सामने आए जिनकी सालाना आय 25 लाख रुपए से भी ज्यादा है। ये परिवार अपने कारोबार के साथ जीएसटी भी भर रहे हैं। इतनी अच्छी आय के बावजूद ये परिवार गरीबी रेखा की सूची में बने हुए थे।



एसडीएम के सामने देना होगा जवाब

प्रशासन ने अपात्र पाए गए सभी हितग्राहियों के नाम पोर्टल से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। अब इन परिवारों को एसडीएम के सामने उपस्थित होना होगा। उन्हें बताना होगा कि उन्होंने बीपीएल कार्ड कब से और किस आधार पर इस्तेमाल किया।



साथ ही मौजूदा आय से जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होंगे। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।



अगस्त 2025 में शुरू हुई जांच

बता दें कि केंद्र सरकार के निर्देश पर अगस्त 2025 में यह जांच शुरू हुई थी। इसमें 6 लाख रुपए से अधिक सालाना आय वाले लोगों को चिन्हित किया गया।



जांच में कई ऐसे लोग भी मिले, जिनकी आर्थिक स्थिति सालों में काफी सुधर गई। कुछ लोग नौकरी या कारोबार से जुड़ गए, लेकिन उन्होंने बीपीएल कार्ड से अपना नाम नहीं हटवाया।



शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी ने बताया कि पोर्टल की जांच में बड़ी संख्या में ऐसे नाम मिले, जो पात्रता पूरी न करने के बावजूद गरीबी रेखा की सूची में शामिल थे। शुरुआती कार्रवाई में इनके नाम हटा दिए गए हैं।



उन्होंने यह भी बताया कि शहरी क्षेत्रों में एसडीएम और ग्रामीण क्षेत्रों में तहसीलदार पात्र लोगों के नाम बीपीएल सूची में जोड़ते हैं। प्रशासन के अनुसार वर्ष 1998 के बाद से समय-समय पर सर्वे होते रहे हैं। इसके बावजूद अपात्र लोगों के नाम सूची में बने रहे।



अब इन मामलों की पूरी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद वसूली या अन्य कार्रवाई पर शासन के निर्देश के अनुसार फैसला होगा।



पात्र लोगों के नाम कटने की शिकायत

जांच के दौरान कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें पात्र परिवारों के नाम भी सूची से हटा दिए गए। प्रशासन अब ऐसे मामलों की अलग से जांच कर रहा है। कोशिश यह है कि सही मायने में गरीब परिवार योजना से बाहर न हों।



ये खबरें भी पढ़िए...

इंदौर नामांतरण घोटाला: 6 कर्मचारियों पर FIR, अफसरों की ID का हुआ था गलत इस्तेमाल



Zomato पर नहीं बिकेगा नकली दूध-पनीर! एनालॉग डेयरी इस्तेमाल करने वाले पर गिरेगी गाज



श्वेता, रेशू के चालान में खुलासा, 16 डिवाइस में 5 लाख फोटो, 500 घंटे का स्टोरेज



बॉयकट बाल और बाहर नौकरी करती थी बेटी, नाराज पिता-चाचा ने गला घोंटकर ले ली जान



Tags:
  • केंद्र सरकार
  • जबलपुर
  • डिप्टी कलेक्टर
  • बीपीएल कार्ड