CM से मिलने निकली पीड़िता... पुलिस ने बैठा दिया पहरा ! आखिर किससे डर रहा सिस्टम?

Neel Tiwari | Jul 01, 2026, 22:07 IST
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जबलपुर में मुख्यमंत्री से दोबारा न्याय मांगने जा रही पीड़िता और उसकी बेटी को पुलिस ने रास्ते में रोककर घंटों हिरासत में रखा। महिला ने मारपीट, निगरानी और समझौते के दबाव के गंभीर आरोप लगाए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मुख्यमंत्री से मिलने जा रही मां-बेटी को पुलिस ने रास्ते में उठाया।
  • पीड़िता का दावा- सुबह 6 बजे से घर पर पुलिस का पहरा, लोकेशन भी ट्रैक की गई।
  • ब्यौहारबाग के पास पकड़कर थाने ले जाने और मारपीट करने का आरोप।
  • घटना कवर करने पहुंचे पत्रकार को भी करीब दो घंटे तक हिरासत में रखने का आरोप।
  • पीड़िता का दावा- मीडिया से बात नहीं करने के लिए ₹20 से ₹50 हजार तक का प्रलोभन दिया गया।

जबलपुर में कलेक्टर के पैरों में गिरकर इंसाफ की मांग करने वाली महिला के वीडियो और तस्वीरें मीडिया की सुर्खियां बनी थी। इसके बाद यह महिला मुख्यमंत्री से भी मिली थी और उसे मुख्यमंत्री ने भोपाल भी बुलवाया था। अब मुख्यमंत्री से दोबारा इंसाफ मांगने जा रही मां-बेटी को पुलिस द्वारा रास्ते में रोककर घंटों हिरासत में रखने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।



पीड़िता का कहना है कि मुख्यमंत्री ने पहले भोपाल बुलाकर न्याय का भरोसा दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब पुलिस पर लोकेशन ट्रैक करने, मारपीट, मीडिया से दूर रखने और समझौते का दबाव बनाने जैसे आरोप लगे हैं।



पहली मुलाकात में मुख्यमंत्री ने दिया था न्याय का भरोसा

कुछ दिन पहले जबलपुर कलेक्ट्रेट में कलेक्टर के पैरों में गिरकर इंसाफ की गुहार लगाने वाली मां-बेटी की मुलाकात बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हुई थी। रानी दुर्गावती बलिदान दिवस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला की पूरी बात सुनी थी, उसके सिर पर हाथ रखकर न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। अगले ही दिन उसे भोपाल बुलाकर मामले में कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था। पीड़िता के अनुसार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि उसे पूरा न्याय मिलेगा।



हफ्तों बाद भी कार्रवाई नहीं, फिर CM से मिलने का बनाया मन

पीड़िता का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के आश्वासन के बावजूद कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसका कहना है कि पुलिस ने न तो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की और न ही गंभीर धाराओं में कार्रवाई की। महिला का आरोप है कि पूरे मामले को कमजोर करने के लिए हल्की धाराएं लगाई गईं, जिससे आरोपियों को लाभ मिल रहा है। लगातार निराशा के बाद उसने एक बार फिर मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी पीड़ा बताने का निर्णय लिया।



सुबह से घर पर पुलिस का पहरा, रोकने और मारपीट का आरोप

बुधवार 1 जुलाई को मुख्यमंत्री के मानस भवन कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ही पीड़िता के अनुसार सुबह करीब 6 बजे से उसके घर पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया। किसी तरह वह अपनी बेटी के साथ घर से निकली, लेकिन ब्यौहार बाग के पास पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।



महिला का आरोप है कि पुलिस उसकी लोकेशन लगातार ट्रैक कर रही थी, जैसे किसी अपराधी की निगरानी की जाती है। उसने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई और जबरन पुलिस वाहन में बैठाकर ले जाया गया।



पत्रकार को भी हिरासत में लेने का आरोप, थाने में रखने पर उठे सवाल

घटना की जानकारी मिलने पर एक पत्रकार मौके पर कवरेज के लिए पहुंचा, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसे भी करीब दो घंटे तक हिरासत में रखा। बाद में पत्रकारों के दबाव के चलते उसे छोड़ दिया गया। वहीं पीड़िता का आरोप है कि उसे और उसकी बेटी को देर शाम तक मदन महल थाना क्षेत्र के पास स्थित अजाक थाने में एक ऐसे कमरे में रखा गया, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। महिला ने इसे अवैध हिरासत बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं।



मीडिया से दूर रहने के लिए प्रलोभन देने का भी आरोप

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे मीडिया से बात नहीं करने के बदले ₹20 हजार से ₹50 हजार तक देने का प्रस्ताव दिया गया। महिला का कहना है कि उसने किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसकी प्राथमिक मांग केवल निष्पक्ष जांच और न्याय है। इन आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।



पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे बड़े सवाल

यदि पीड़िता के आरोप सही हैं तो यह कई गंभीर कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिस अपनी कार्रवाई को सही मान रही है तो मुख्यमंत्री से मिलने जा रही एक शिकायतकर्ता को अपराधी की तरह रोकने, उसकी निगरानी करने और घंटों थाने में रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी। इसी तरह यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि महिला और उसकी बेटी को किस वैधानिक प्रावधान के तहत रोका गया तथा क्या इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।



पुलिस ने अपने बचाव में बनवाये फर्जी बयान के वीडियो

इस पूरी घटना से जुड़ा हुआ एक बेहद गंभीर आरोपों सामने आया है। महिला के द्वारा आरोप लगाते हुए दो वीडियो वायरल किए गए हैं जो कथित तौर पर पुलिस और एक एसडीएम की मौजूदगी में उनके ऊपर दबाव डालकर बनवाए गए है। इस वीडियो में महिला या कहती हुई नजर आ रही है कि वह आत्महत्या करने के लिए जा रही थी और पुलिस ने उसे कोई बदतमीजी नहीं की बल्कि उसे बचाया है।



इसके बाद जैसे ही महिला को समय मिला उसने एक और वीडियो बनाया और उसमें यह बताया कि उसे दबाव में लेकर फर्जी बयान दिलवाए गए हैं। दूसरे वीडियो में महिला यह साफ कहती हुई नजर आ रही है कि पुलिस ने दबाव देकर उसे फर्जी बयान वीडियो में दिलवाये हैं



अब पुलिस के जवाब और जांच का इंतजार

इस मामले में पुलिस के अनुसार FIR दर्ज कर ली गई है। हालांकि आरोपियों पर ठोस कार्यवाही और धाराएं बढ़ाने के मामले पर अब तक कोई सफाई प्राप्त नहीं है। फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इन आरोपों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।



यदि अवैध हिरासत, मारपीट, पत्रकार को रोकने या समझौते का दबाव बनाने जैसे आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल एक आपराधिक शिकायत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े करेगा।



अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल खबर लिखे जाने तक महिला पुलिस की अवैध हिरासत में ही है।



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