आधार के लिए 6 साल से भटक रहा था मजदूर परिवार, जबलपुर कलेक्ट्रेट ने 3 घंटे में बना दिया

Neel Tiwari | Jul 02, 2026, 22:40 IST
जबलपुर कलेक्ट्रेट
लोग कहते हैं कि सरकारी दफ्तरों में सिर्फ फाइलें घूमती हैं, काम नहीं होता। लेकिन जबलपुर कलेक्ट्रेट की एक पहल ने यह धारणा बदलने की कोशिश की है। छह साल से आधार कार्ड के लिए भटक रहे मजदूर परिवार की समस्या महज तीन घंटे में हल हो गई। आधार कार्ड मिलते ही

समझें क्या है पूरा मामला

● डिंडोरी के मजदूर परिवार को 6 साल बाद मिला बच्चों का आधार कार्ड।



● आधार नहीं होने से छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था।



● जबलपुर कलेक्ट्रेट के ई-गवर्नेंस कार्यालय ने तीन घंटे में रिकॉर्ड खोज निकाला।



● ई-गवर्नेंस जिला प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी की पहल से वर्षों पुरानी समस्या सुलझी।



● आधार मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली, बच्चों की पढ़ाई अब बिना रुकावट जारी रहेगी।



सिस्टम में बैठे लोगों ने दिखाई संवेदनशीलता

अक्सर सरकारी दफ्तरों की पहचान लंबी लाइन, फाइलों की धूल और महीनों तक चक्कर लगाने से होती है। लेकिन जबलपुर कलेक्ट्रेट से सामने आई यह कहानी बताती है कि अगर सिस्टम में बैठे लोग किसी समस्या को अपना मान लें तो वर्षों से अटकी परेशानी भी कुछ घंटों में खत्म हो सकती है। इस बार किसी बड़ी योजना की नहीं, बल्कि दो मासूम बच्चों के भविष्य की कहानी लिखी गई।



आधार कार्ड नहीं था, इसलिए रुक गई थी पढ़ाई

जिला डिंडोरी के ग्राम अमगवां (ग्राम पंचायत चाँदपुर) निवासी अर्जुन सिंह और उनका परिवार पिछले छह वर्षों से बच्चों रजनी और पूजा के आधार कार्ड के लिए परेशान था। वर्ष 2018 में आधार नहीं मिलने के कारण दोनों बच्चों की छात्रवृत्ति रुक गई। कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा था और पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह परेशानी हर साल और बड़ी होती चली गई।



मजदूरी करने आए जबलपुर, यहीं मिली उम्मीद की नई किरण

रोजी-रोटी की तलाश में अर्जुन सिंह अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करने जबलपुर आए। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने ठेकेदार को बच्चों के आधार कार्ड की समस्या बताई। ठेकेदार ने उन्हें सलाह दी कि एक बार जबलपुर कलेक्ट्रेट के ई-गवर्नेंस कार्यालय जाकर अपनी समस्या रखें। परिवार ने उम्मीद के साथ वहां दस्तक दी।



तीन घंटे में मिला छह साल पुराना दस्तावेज

कलेक्ट्रेट के ई-गवर्नेंस कार्यालय में मामला सामने आते ही अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। ई-गवर्नेंस जिला प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी के मार्गदर्शन में करीब तीन घंटे तक रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों की जांच की गई। आखिरकार वर्ष 2018 में बने दोनों बच्चों के आधार कार्ड का रिकॉर्ड मिल गया और उसकी प्रतियां परिवार को सौंप दी गईं। जिस दस्तावेज के लिए परिवार छह साल से भटक रहा था, वह कुछ ही घंटों में उनके हाथ में था।



आधार मिला तो लौटी बच्चों के चेहरे की मुस्कान

आधार कार्ड मिलते ही परिवार की खुशी देखने लायक थी। अब दोनों बच्चों की रुकी हुई छात्रवृत्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। साथ ही अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा और उनकी पढ़ाई बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगी। माता-पिता ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता पहले जैसी नहीं रही।



'ऐसे अधिकारी ही बदलते हैं सरकारी दफ्तरों की तस्वीर'

परिवार ने ई-गवर्नेंस जिला प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी और पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उनका कहना था कि यदि उनकी समस्या को इसी संवेदनशीलता से पहले सुना गया होता तो छह साल तक भटकना नहीं पड़ता। यह घटना बताती है कि बदलाव किसी सिस्टम से नहीं, बल्कि उस सिस्टम में काम करने वाले लोगों की नीयत और जिम्मेदारी से आता है। जब अधिकारी समस्या को फाइल नहीं, इंसान की परेशानी समझकर काम करते हैं, तब सरकारी दफ्तर लोगों के लिए भरोसे की जगह बन जाते हैं।



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