जबलपुर क्रूज हादसे में बची महिला ने उठाए सिस्टम पर सवाल, बोलीं- दवा देने से पहले थमा दिया बिल
मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक क्रूज हादसा हुआ, जिसमें वाराणसी की सविता वर्मा और अन्य यात्री बुरी तरह घायल हो गए। हादसे के बाद सविता ने सरकारी और निजी अस्पतालों के इलाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि, "हम मौत से लड़ रहे थे, लेकिन अस्पताल वालों को हमारी स्थिति से ज्यादा बिल की चिंता थी।"
अस्पताल में अव्यवस्था
हादसे के बाद, जब सविता और अन्य घायलों को निजी अस्पतालों में ले जाया गया, तो वहां की स्थिति पूरी तरह से अव्यवस्थित थी। कई लोगों के मोबाइल फोन बंद हो गए थे और उनके पैसे भी पानी में भीग गए थे। ऐसे में वे अपने परिजनों से संपर्क भी नहीं कर पा रहे थे। इससे बड़ा मुद्दा यह था कि अस्पताल वाले इलाज से पहले बिल की बात करने लगे।
इलाज से पहले बिल
सविता ने आरोप लगाया कि "हमने इलाज की बात की थी, लेकिन अस्पताल वाले हमें पहले पैसे देने को कह रहे थे। इलाज के बाद, 4700 रुपए का बिल दिया गया, जिसमें मामूली दवाइयां और पेनकिलर शामिल थे।" इस दौरान उनकी बहन को टांके लगे थे, लेकिन उन्हें दवाई तक नहीं दी गई। सविता के भाई ने ऑनलाइन पेमेंट करके बिल चुकाया, तभी निजी अस्पताल ने इलाज जारी रखा।
इजराइल से भारत में सुरक्षित, लेकिन असुरक्षित महसूस किया
सविता वर्मा ने इस घटना को इजराइल के युद्ध जैसे हालात से जोड़ा। वह बताती हैं, "इजराइल में रहने के दौरान मैं जानती थी कि वहां का सुरक्षा तंत्र मजबूत है। लेकिन जब मैं यहां भारत में एक क्रूज यात्रा पर गई, तो यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था।" उन्होंने यह भी कहा कि "वहां पर लोग अपने परिजनों को यह भरोसा दिलाते थे कि सुरक्षा की पूरी व्यवस्था है, लेकिन भारत में बुनियादी सुरक्षा भी नहीं थी।"
क्रूज हादसा: क्रू का असंवेदनशील रवैया
सविता ने हादसे के दौरान क्रू की भूमिका को भी नकारा किया। वह बताती हैं कि "मौसम खराब होते ही नाव में पानी भरने लगा। लोग घबराए हुए थे, बच्चे रो रहे थे और यात्री एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। इस दौरान क्रू ने कोई मदद नहीं की।" उनके 22 वर्षीय बेटे ने स्वयं लाइफ जैकेट पहनने की बजाय दूसरों को बांटा और लोगों को बचाने की कोशिश की। वह बताते हैं, "नाव पलटी, लेकिन किसी तरह हम पानी से बाहर निकले।"
सवाल उठाती सविता
सविता ने कई सवाल उठाए हैं, जैसे- क्या क्रूज पर पर्याप्त सुरक्षा थी? क्यों यात्रियों को मौसम की जानकारी पहले से नहीं दी गई? क्यों हादसे के बाद हेल्पलाइन की व्यवस्था नहीं थी? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या आपदा की स्थिति में भी निजी अस्पतालों को मनमानी बिलिंग की छूट होनी चाहिए?
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