CBI अफसर बनकर किया डिजिटल अरेस्ट, 12 दिन डराया; दंपती से ठगे 22 लाख

Sandeep Kumar | Aug 12, 2026, 23:48 IST
CBI अफसर बनकर किया डिजिटल अरेस्ट
जबलपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के साथ बड़ी साइबर ठगी हुई है। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर दंपती को 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। डर के माहौल में उनकी जिंदगीभर की जमा पूंजी लुट गई।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जबलपुर में साइबर ठगों ने CBI अधिकारी बनकर कॉल किया।
  • दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स केस का डर दिखाया।
  • ठगों ने 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
  • FD के 22 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर कराए गए।
  • शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

कैसे शुरू हुई ठगी

डिफेंस कॉलोनी में रहने वाले प्रकाश पाल शेजवाल (75) प्राइवेट कंपनी से रिटायर्ड हैं। वे पत्नी के साथ रहते हैं। 22 जुलाई को उनके मोबाइल पर एक वॉट्सऐप कॉल आया।



कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने कहा कि प्रकाश और उनका परिवार मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के कारोबार में शामिल है। जल्द गिरफ्तारी की धमकी भी दी गई। डर के मारे प्रकाश ने फोन काट दिया। लेकिन इसके बाद अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल आने लगे।



फर्जी नोटिस से जीता भरोसा

जब प्रकाश ने कॉल उठाना बंद किया तो ठगों ने वॉट्सऐप पर एक नोटिस भेजा। इस नोटिस पर सीबीआई का नाम और लोगो लगा हुआ था। नोटिस देखकर प्रकाश को लगा कि मामला सच में सरकारी जांच से जुड़ा है। इसी भरोसे में आकर वे ठगों की हर बात मानने लगे।



घर में ही बना दिया बंधक

23 जुलाई को दोबारा कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले ने अपना नाम प्रशांत सिंह बताया। उसने परिवार और बैंक खातों की जानकारी मांगी। इसके बाद उसने दंपती को साफ हिदायत दी कि जांच अधिकारी से बात होने तक घर से बाहर न निकलें। परिवार वालों से बात करने पर भी रोक लगा दी गई।



ठगों ने दंपती से कहा कि उनकी हर गतिविधि कैमरे से रिकॉर्ड हो रही है। इस डर से दंपती ने अपने बच्चों और रिश्तेदारों से भी संपर्क नहीं किया।



हर दो घंटे में होती थी पूछताछ

प्रकाश की बेटी मध्यप्रदेश से बाहर रहती है। जबलपुर में भी उनके रिश्तेदार मौजूद हैं। इसके बावजूद डर के कारण दंपती किसी से बात नहीं कर सके।अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के मुताबिक ठग हर दो घंटे में दंपती से पूछताछ करते थे। वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी भी रखी जाती थी। बेटी से बात करने पर भी पूरी तरह रोक थी।



11 अगस्त की रात प्रकाश अपने परिचित अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के पास पहुंचे। उन्होंने पूरी घटना बताई। दंपती अब भी इतने भयभीत हैं कि सार्वजनिक रूप से सामने आने को तैयार नहीं हैं।



एफडी के 22 लाख कराए ट्रांसफर

ठगों ने प्रकाश और उनकी पत्नी को कहा कि एफडी में जमा पूरी रकम जितेंद्र कुमार राणा के खाते में भेजनी होगी। उनका दावा था कि जितेंद्र भी अपराध में शामिल है और उसे पकड़ने के लिए यह रकम भेजना जरूरी है।



ठगों ने भरोसा दिलाया कि रकम भेजने के बाद उन्हें रिसीव लेटर मिलेगा। साथ ही कहा गया कि जितेंद्र की गिरफ्तारी के बाद रकम वापस कर दी जाएगी।



CBI और RBI के नाम से फर्जी दस्तावेज

भरोसा जीतने के लिए ठगों ने सीबीआई के नाम और लोगो वाला फर्जी नोटिस भेजा। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI – Reserve Bank of India) के नाम से भी दस्तावेज भेजे गए। दस्तावेजों में जितेंद्र सिंह राणा के नाम का जिक्र था, जिसका खाता आईसीआईसीआई बैंक में बताया गया। पुलिस जांच में ये सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए।



बैंक जाकर ट्रांसफर की रकम

सीएसपी सोनू कुर्मी के मुताबिक प्रकाश और उनकी पत्नी 23 जुलाई से 4 अगस्त तक डिजिटल अरेस्ट में रहे। ठगों के दबाव में 2 अगस्त को प्रकाश खुद बैंक पहुंचे। उन्होंने अपनी एफडी के 22 लाख रुपए आरोपियों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।



रकम मिलने के बाद भी ठगों ने परेशान करना बंद नहीं किया। वे वॉट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क करते रहे। बाद में डराकर कॉल से जुड़े नंबर और रिकॉर्ड भी हटवा दिए।



पुलिस ने शुरू की जांच

पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच शुरू कर दी गई है। सीएसपी सोनू कुर्मी ने लोगों से अपील की है कि सीबीआई, पुलिस या किसी सरकारी अधिकारी के नाम पर फोन कर पैसे मांगे जाने पर भरोसा न करें। उनका कहना है कि इस तरह की ठगी में खासतौर पर बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है।



क्या बोले जिम्मेदार

23 जुलाई से 4 अगस्त तक दंपती डिजिटल अरेस्ट रहे। ठगों के दबाव में प्रकाश ने एफडी तोड़कर 22 लाख रुपए आरोपियों के खाते में ट्रांसफर कर दिए। सीएसपी सोनू कुर्मी ने बताया कि ठग हर दो घंटे में पूछताछ करते थे। वीडियो कॉल से निगरानी रखी जाती थी। अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के अनुसार दंपती को बेटी से बात करने से भी रोका गया था।



FAQ

  1. डिजिटल अरेस्ट क्या है?
    डिजिटल अरेस्ट एक तरह की साइबर ठगी है। इसमें ठग खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन या वीडियो कॉल पर डराते हैं। पीड़ित को गिरफ्तारी का डर दिखाकर घर से बाहर निकलने और परिवार से बात करने से रोका जाता है।
  2. जबलपुर के दंपती से कितनी रकम ठगी गई?
    ठगों ने दंपती की एफडी में जमा पूरे 22 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। यह रकम एक बताए गए खाते में भेजी गई। मामले की जांच पुलिस कर रही है।

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