पूर्व महापौर प्रभात साहू केस में STF ने हाईकोर्ट में सौंपी सीलबंद रिपोर्ट, दोषी या बेदाग? अब खुलेगा राज
News in short
- STF ने जांच पूरी कर हाईकोर्ट में दो सीलबंद लिफाफे सौंपे
- सबूतों से जुड़ी पेनड्राइव भी कोर्ट में प्रस्तुत
- डिप्टी एसपी संतोष कुमार तिवारी ने पेश की रिपोर्ट
- 26 अप्रैल 2026 को अगली सुनवाई तय
- लिफाफे खुलने के बाद तय होगी प्रभात साहू की जिम्मेदारी
News in detail
जबलपुर के चर्चित पुलिस - पूर्व महापौर विवाद में अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार 24 मार्च को हाईकोर्ट में STF ने अपनी पूरी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश कर दी है। अब अगली सुनवाई में इन लिफाफों के खुलने के साथ ही तय होगा कि प्रभात साहू दोषी हैं या नहीं।
हाईकोर्ट में STF की रिपोर्ट पेश, मामला निर्णायक मोड़ पर
जबलपुर के चर्चित पुलिस और पूर्व महापौर प्रभात साहू विवाद मामले में मंगलवार 24 मार्च को जबलपुर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच के समक्ष STF ने अपनी पूरी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। इस रिपोर्ट को दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में कोर्ट के सामने रखा गया, जिससे साफ संकेत मिलता है कि मामले में गंभीर और संवेदनशील तथ्यों को गोपनीय रखा गया है।
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STF ने कोर्ट को सौंपे सीलबंद लिफाफे और पेनड्राइव
हाईकोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार STF ने कोर्ट मे जांच रिपोर्ट से जुड़े दो सीलबंद लिफाफे पेश किए। इसके साथ ही उन्होंने सबूतों से संबंधित एक पेनड्राइव भी अदालत को सौंपी, जिसमें संभवतः वीडियो फुटेज, घटनास्थल के दृश्य, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्य शामिल हैं। यह पूरा रिकॉर्ड अब कोर्ट की निगरानी में है।
हर एंगल से जांच, दोनों FIR की बारीकी से पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक STF ने इस पूरे मामले में दर्ज दोनों FIR अपराध क्रमांक 525/2025 और 526/2025 की हर एंगल से जांच की है। जांच में यह देखा गया कि घटना के दौरान क्या हुआ, किसकी भूमिका क्या थी, किसने किसके साथ अभद्रता या मारपीट की, और पुलिस द्वारा दर्ज मामलों में कोई पक्षपात हुआ है या नहीं। STF की रिपोर्ट अब इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएगी।
26 अप्रैल को खुलेगा राज, तय होगी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल 2026 को तय की है। इसी दिन कोर्ट इन सीलबंद लिफाफों को खोलेगा और STF की रिपोर्ट का अवलोकन करेगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि पूर्व महापौर और जेडीए अध्यक्ष रह चुके प्रभात साहू पुलिस कर्मियों से अभद्रता और मारपीट के मामले में दोषी हैं या नहीं। यह सुनवाई इस पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है।
क्या था पूरा मामला, हेलमेट चेकिंग से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 18 सितंबर 2025 का है, जब जबलपुर में ट्रैफिक पुलिस हेलमेट चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान पूर्व महापौर प्रभात साहू को बिना हेलमेट वाहन चलाते हुए रोका गया। आरोप है कि नियमों का पालन करने के बजाय उन्होंने मौके पर ही पुलिसकर्मी से बहस और अभद्रता शुरू कर दी।
समर्थकों की भीड़, सड़क पर हंगामा और मारपीट
याचिका के अनुसार विवाद बढ़ने पर प्रभात साहू ने अपने समर्थकों को मौके पर बुला लिया, जिससे वहां भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सड़क पर ट्रैफिक जाम लग गया और पुलिस कर्मियों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। इस दौरान एक पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़े जाने के आरोप भी सामने आए, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
FIR में दोहरा रवैया, यहीं से शुरू हुआ विवाद
इस घटना के बाद पुलिस ने पूर्व महापौर की शिकायत पर तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली, लेकिन पुलिसकर्मी की शिकायत में नाम होने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ मामला “अज्ञात” में दर्ज किया गया। इसी दोहरे रवैये को लेकर सवाल उठे और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
जनहित याचिका से खुली थी जांच की परतें
जबलपुर के अधिवक्ता मोहित वर्मा ने इस पूरे मामले को जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट में उठाया। याचिका में कहा गया कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई रसूखदार नेता। कोर्ट ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए पहले पुलिस की जांच पर सवाल उठाए और फिर मामले को STF को सौंप दिया था।
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फिलहाल इस पूरे मामले की सच्चाई STF की रिपोर्ट में सीलबंद है और अब सबकी नजर 26 अप्रैल की सुनवाई पर टिकी हुई है। यह सुनवाई न केवल प्रभात साहू की कानूनी स्थिति तय करेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगी कि क्या कानून के सामने सभी वास्तव में बराबर हैं या नहीं।