जबलपुर में गोल्ड लोन घोटाला, नकली गहनों पर बैंक से लाखों की ठगी, सर्राफा व्यापारी भी घेरे में
News in short
- नकली सोना गिरवी रखकर ₹13.58 लाख का गोल्ड लोन लिया गया।
- मुख्य आरोपी ने पहले छोटा लोन लेकर बैंक का भरोसा जीता।
- सर्राफा व्यापारियों ने नकली गहनों को असली बताकर फर्जी रिपोर्ट दी।
- वार्षिक निरीक्षण में खुली पोल, गहनों की कीमत निकली शून्य।
- EOW ने धोखाधड़ी, षड्यंत्र और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज किया।
News in detail
जबलपुर शहर में बैंकिंग सिस्टम को चकमा देने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नकली सोने (FAKE GOLD) के सहारे 13.5 लाख रुपए का लोन निकाल लिया गया।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस पूरे घोटाले में बैंक के भरोसे, वैल्युएशन सिस्टम और अंदरूनी मिलीभगत पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सर्राफा व्यापारियों की मिलीभगत
जबलपुर में सर्राफा व्यापारी की मिलीभगत से नकली सोने के बदले लाखों रुपए का लोन लेकर बैंक को चूना लगाने का मामला सामने आया है। यह पूरा मामला बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
पहले बैंक का विश्वास जीता गया और फिर उसी भरोसे का फायदा उठाकर बड़ी ठगी को अंजाम दिया गया। आरोपी ने पहले छोटा लोन लेकर उसे समय पर चुकाया और इसके तुरंत बाद नकली सोना गिरवी रखकर लाखों रुपये का गोल्ड लोन हासिल कर लिया।
भरोसा जीतकर रची गई ठगी की साजिश
मुख्य आरोपी सौरभ चौधरी ने 28 जून 2023 को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जीएस कॉलेज शाखा से 3 लाख 73 हजार लाख का एग्रीकल्चर टर्म लोन लिया था। इस लोन को उसने समय पर चुका दिया, जिससे बैंक को उस पर पूरा भरोसा हो गया। इसी भरोसे की आड़ में उसने अगली चाल चली।
नकली सोने पर लिया लाखों का गोल्ड लोन
पहले लोन के दो दिन बाद ही आरोपी ने दो अलग-अलग गोल्ड लोन के लिए आवेदन किया। इनकी राशि 4.79 लाख रूपये और 8.78 लाख रूपये थी। बैंक ने वैल्युएशन रिपोर्ट के आधार पर कुल 13.58 लाख रूपये की राशि मंजूर कर दी, जो सीधे आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
सर्राफा व्यापारियों की संदिग्ध भूमिका
इस घोटाले में दो सर्राफा व्यापारियों की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने नकली गहनों को असली बताकर उनकी कीमत लाखों में आंकी और फर्जी वैल्युएशन रिपोर्ट बैंक को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने लोन पास कर दिया, जिससे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सालाना जांच में खुली बड़ी सच्चाई
यह मामला लंबे समय तक छुपा रहा, लेकिन 10 फरवरी 2025 को बैंक के वार्षिक निरीक्षण के दौरान इसका खुलासा हुआ। संदेह के आधार पर जब गिरवी रखे गए गहनों की दोबारा जांच कराई गई, तो पता चला कि वे पूरी तरह नकली हैं और उनकी बाजार में कोई कीमत नहीं है।
रकम का ट्रांसफर और साजिश का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि लोन की राशि मिलते ही आरोपी ने उसी दिन ₹4.56 लाख अपने सहयोगी अचिन उरमलिया के खाते में ट्रांसफर कर दिए। खास बात यह है कि इस सहयोगी ने उसी दिन बैंक में नया खाता खुलवाया था, जिससे पूरे मामले में सुनियोजित साजिश की पुष्टि होती है।
कानूनी शिकंजा और आगे की जांच
इस पूरी जांच में सबसे अहम भूमिका तत्कालीन ग्वारीघाट थाना प्रभारी भुवनेश्वरी चौहान की रही। जांच रिपोर्ट के आधार पर EOW ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जालसाजी शामिल हैं। मुख्य आरोपी फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। साथ ही बैंक के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
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