पांच साल से अटका फ्लाईओवर अब होगा तैयार! हाईकोर्ट के दखल से बदलेगी तस्वीर
समझें क्या है पूरा मामला
- जबलपुर में घमापुर से रद्दी चौकी तक फ्लाईओवर लंबे समय से अटका है।
- कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने इसके लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
- कोर्ट ने ट्रैफिक राहत के लिए फ्लाईओवर का नया रूट सुझाया।
- सरकार ने ट्रैफिक और सड़क की स्थिति का आकलन किया है।
- रूट तय होते ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज होगी।
फ्लाईओवर पर अब तेज हुई प्रक्रिया
जबलपुर के लंबे समय से अटके फ्लाईओवर पर हलचल बढ़ी है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया तेज होती दिख रही है। मामला जबलपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। यह इलाका लंबे समय से भारी ट्रैफिक दबाव झेल रहा है।
घमापुर, आंबेडकर चौक और आसपास रोज जाम की स्थिति रहती है। इसी समस्या को लेकर विधायक लखन घनघोरिया हाई कोर्ट पहुंचे थे। उनकी याचिका में फ्लाईओवर निर्माण में देरी का मुद्दा उठाया गया था। अब कोर्ट की निगरानी से निर्माण की उम्मीद बढ़ी है।
आज की सुनवाई में सरकार ने क्या बताया
सोमवार 31 अगस्त को मामले की अहम सुनवाई हुई। सरकार ने कोर्ट के सामने अपनी तैयारी की जानकारी रखी। सरकार ने पूरे इलाके के ट्रैफिक आंकड़े जुटाए हैं। सड़क चौड़ी करने की जरूरत का भी आकलन किया गया है।
अतिक्रमण की चपेट में आने वाले निर्माण भी देखे गए हैं। इन सभी बिंदुओं पर सरकार विस्तृत जवाब तैयार कर रही है। सरकार ने जवाब देने के लिए कोर्ट से और समय मांगा। अब अगली सुनवाई में सरकार अपना प्रस्ताव रखेगी।
हाईकोर्ट ने फ्लाईओवर का कौन सा रूट सुझाया
हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में एक अहम सुझाव दिया था। कोर्ट ने एमपी टूरिज्म कार्यालय से फ्लाईओवर शुरू करने कहा था। इसके बाद इसे घमापुर चौराहे के आगे उतारने का सुझाव था। कोर्ट ने इसके पीछे ट्रैफिक राहत का कारण बताया था।
इस रूट से कई प्रमुख इलाकों को राहत मिल सकती है। घमापुर चौराहे पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। डॉ. आंबेडकर चौक पर भी जाम कम हो सकता है। हाई कोर्ट के सामने भी ट्रैफिक दबाव घट सकता है। कलेक्ट्रेट चौराहे पर भी राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले किस रूट पर बनना था फ्लाईओवर
शुरुआती योजना का रूट इससे अलग था। इस योजना में होटल ऋषि एजेंसी से शुरुआत होनी थी। फ्लाईओवर को रद्दी चौकी के आगे तक ले जाना था। इसका अंतिम हिस्सा अब्दुल हमीद चौक के पास होना था। याचिका में भी इसी बड़े रूट की मांग की गई थी। अब हाई कोर्ट ने अलग विकल्प सामने रखा है। इसलिए अंतिम रूट अगली सुनवाई में साफ होगा।
घमापुर में बड़ी संख्या में हट सकते हैं अतिक्रमण
फ्लाईओवर के रूट को लेकर अतिक्रमण बड़ा मुद्दा बनेगा। सड़क चौड़ी होने पर कई निर्माण प्रभावित हो सकते हैं। सरकार ने ऐसे निर्माणों का आकलन शुरू कर दिया है। रूट तय होने के बाद कार्रवाई तेज हो सकती है।
घमापुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अतिक्रमण हट सकते हैं। हालांकि कार्रवाई तय रूट और नियमों के आधार पर होगी। अभी अंतिम रूट पर कोर्ट का फैसला बाकी है। इसलिए फिलहाल किसी निर्माण की अंतिम सूची सामने नहीं है।
अस्पताल के पास गुमटी वालों ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान कुछ दुकानदार भी कोर्ट पहुंचे। इन लोगों ने खुद को छोटे कारोबार से जुड़ा बताया। उन्होंने एल्गिन अस्पताल के आसपास गुमटियां लगाई हैं। उनका कहना था कि ट्रैफिक पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कोर्ट से अपनी दुकानों को राहत देने की मांग की। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने नियमों के खिलाफ बनी दुकानों को राहत नहीं दी। इस रुख से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का संकेत मिला है।
फ्लाईओवर से किन इलाकों को राहत मिल सकती है
प्रस्तावित फ्लाईओवर कई व्यस्त इलाकों को जोड़ता है। इसमें आंबेडकर चौक और घमापुर चौक सबसे अहम हिस्सा है। यहां तहसील कार्यालय और कई सरकारी कार्यालय हैं। हाई कोर्ट और जिला न्यायालय भी आसपास स्थित हैं।
राज्य न्यायिक अकादमी भी इसी क्षेत्र में है। अस्पतालों के कारण भी यहां लगातार आवाजाही रहती है। इन कारणों से सड़क पर वाहनों का दबाव बना रहता है। फ्लाईओवर बनने से मुख्य ट्रैफिक अलग हो सकता है। इससे स्थानीय सड़कों पर जाम कम होने की उम्मीद है।
फ्लाईओवर की लागत पहले कितनी थी
इस परियोजना का प्रस्ताव कई साल पहले तैयार हुआ था। 11 दिसंबर 2019 को 186.03 करोड़ का अनुमान भेजा गया था। यह प्रस्ताव लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सका। बाद में लागत बढ़कर 269.22 करोड़ रुपए हो गई।
28 जुलाई 2022 को नया अनुमान भेजा गया था। इसके साथ रूट का नक्शा भी तैयार किया गया था। अधिकारियों की रिपोर्ट में फ्लाईओवर की जरूरत बताई गई थी। ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का भी हवाला दिया गया था। याचिका में देरी से सरकारी खर्च बढ़ने की चिंता जताई गई थी।
विधायक ने सरकार से कब-कब सवाल पूछे
लखन घनघोरिया ने विधानसभा में कई बार सवाल उठाए। उन्होंने 12 अगस्त 2021 को मामला विधानसभा में उठाया था। इसके बाद 28 जुलाई 2022 को भी सवाल किया। उन्होंने तीन मार्च 2023 को भी जानकारी मांगी।
चार जुलाई 2024 को भी सवाल उठाया गया था। 16 दिसंबर 2024 को भी स्थिति पूछी गई थी। इसके अलावा उन्होंने कई लिखित आवेदन भी दिए। तीन मार्च 2022 को मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया था।
सात दिसंबर 2024 को भी आवेदन दिया गया। दस दिसंबर 2024 को भी विस्तृत आवेदन दिया गया। याचिका के अनुसार इन प्रयासों के बाद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में क्या मांग थी
लखन घनघोरिया ने 2025 में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका क्रमांक 16145/2025 है। याचिका में फ्लाईओवर निर्माण समय पर कराने की मांग थी। इसमें आंबेडकर चौक से रद्दी चौकी तक रूट बताया गया।
मदार टेकरी होकर फ्लाईओवर बनाने की मांग भी थी। याचिका में एक साल में काम पूरा करने की मांग थी। याचिका में देरी से बढ़ती लागत का मुद्दा भी था। याचिका के अनुसार देरी से जनता परेशान हो रही है।
साथ ही सरकारी खर्च बढ़ने की बात कही गई। इस मामले में विधायक के द्वारा विधानसभा में प्रश्न भी उठाए गए थे जिसकी जानकारी भी कोर्ट को दी गई है।
याचिका में फ्लाईओवर की जरूरत क्यों बताई गई
याचिका में आंबेडकर चौक को व्यस्त क्षेत्र बताया गया था। यहां कई अहम सरकारी और न्यायिक संस्थान मौजूद हैं। हाई कोर्ट और जिला न्यायालय भी इसी इलाके में हैं। अस्पतालों के कारण भी यहां लोगों की आवाजाही रहती है।
याचिका में दुर्घटनाओं और जाम की समस्या बताई गई थी। इसके कारण आम लोगों को रोज परेशानी होती है। याचिका में इसे पूरे शहर से जुड़ा जनहित मुद्दा बताया गया। विधायक ने कहा था कि देरी से लागत भी बढ़ेगी।
अब अगली सुनवाई में क्या तय हो सकता है
अब अगली सुनवाई इस मामले में बेहद अहम होगी। सरकार फ्लाईओवर का नया प्रस्ताव कोर्ट में रखेगी। इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां भी ली जा सकती हैं। इसके बाद फ्लाईओवर के अंतिम रूट पर तस्वीर साफ होगी।
रूट तय होते ही जमीन पर कार्रवाई बढ़ सकती है। सड़क चौड़ी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
फिलहाल निर्माण शुरू होने की तारीख तय नहीं हुई है। लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप से प्रक्रिया में तेजी आई है। जबलपुर के लोगों की नजर अब अगली सुनवाई पर है।
क्या फ्लाईओवर से जाम की समस्या कम होगी
फ्लाईओवर से मुख्य मार्ग का ट्रैफिक अलग हो सकता है। इससे व्यस्त चौराहों पर वाहनों का दबाव घट सकता है। घमापुर और आंबेडकर चौक को बड़ी राहत मिल सकती है। हाई कोर्ट के सामने भी जाम कम हो सकता है।
कलेक्ट्रेट क्षेत्र में भी यातायात आसान होने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम असर रूट और डिजाइन पर निर्भर करेगा। सड़क चौड़ीकरण भी इस परियोजना का अहम हिस्सा रहेगा। अतिक्रमण हटने के बाद सड़क की क्षमता बढ़ सकती है। इसलिए अगली सुनवाई के फैसले को अहम माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल फ्लाईओवर का अंतिम रूट
पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल अंतिम रूट का है। पुरानी योजना होटल ऋषि एजेंसी से शुरू होती थी। यह रूट रद्दी चौकी के आगे तक प्रस्तावित था। अब कोर्ट ने एमपी टूरिज्म कार्यालय वाला विकल्प सुझाया है।
इस बदलाव से कई व्यस्त चौराहों को राहत मिल सकती है। सरकार अब इसी मुद्दे पर विस्तृत प्रस्ताव देगी। आम लोगों से सुझाव लेने की संभावना भी है। इसके बाद निर्माण की दिशा ज्यादा साफ हो जाएगी। रूट तय होने के बाद अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बढ़ेगी। यही अगली सुनवाई का सबसे अहम बिंदु रहेगा।
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