एमपी हाईकोर्ट में कल तलब होंगे तीन राज्यों के DGP,सुस्त कार्रवाई से है अदालत नाराज
ऐसे समझें पूरा मामला
- हाईकोर्ट की नाराजगी: साइबर ठगी जांच में पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट हुआ सख्त।
- 3 DGP तलब: असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।
- बुजुर्ग से ठगी: सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी महिला से क्रेडिट कार्ड के नाम पर 6.24 लाख की ठगी।
- रियल-टाइम जांच जरूरी: कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अपराधियों को पकड़ने के लिए हर सेकेंड महत्वपूर्ण है।
- केंद्रीय एजेंसियां पक्षकार: मामले में गृह मंत्रालय, RBI और दूरसंचार विभाग को भी पक्षकार बनाया गया।
जबलपुर हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के डीजीपी को (DGP – Director General of Police) 21 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। यह आदेश बुजुर्ग महिला से हुई 6.24 लाख रुपए की ठगी की सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने कहा कि जांच में तेजी नहीं आई तो अपराधी हर बार बच निकलेंगे। गृह मंत्रालय, RBI और दूरसंचार विभाग को भी इस केस में पक्षकार बनाया गया है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने देश में बढ़ती साइबर ठगी को लेकर बड़ा कदम उठाया है। जबलपुर की एक बुजुर्ग महिला से हुई ठगी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तीन राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को तलब किया। कोर्ट का कहना है कि साइबर अपराध की जांच में देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
बुजुर्ग महिला के साथ हुई थी ठगी
जबलपुर के गोरा बाजार इलाके में रहने वाली चैताली मित्रा एक बैंक से रिटायर हुई हैं। उनसे क्रेडिट कार्ड अपडेट कराने के नाम पर 6.24 लाख रुपए ठगे गए। उन्होंने पहले थाने और फिर एसपी स्तर पर शिकायत की। जब कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट बोला- हर सेकेंड कीमती है
जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध की जांच में समय सबसे बड़ा फैक्टर होता है। अगर पुलिस तेजी से काम नहीं करेगी, तो आरोपी हमेशा बच निकलेंगे। कोर्ट ने कहा कि राज्यों के बीच रियल टाइम समन्वय जरूरी है। तभी ऐसे मामलों में असली अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है।
जांच में आ रही हैं ये दिक्कतें
29 जून 2026 के आदेश के बाद जबलपुर एसपी (SP – Superintendent of Police) संपत उपाध्याय कोर्ट में पेश हुए। उनके साथ साइबर थाना प्रभारी भूपेंद्र अरमो और गोरा बाजार थाना प्रभारी संजीव कुमार त्रिपाठी भी मौजूद रहे। एसपी ने बताया कि शिकायत मिलते ही मामला साइबर सेल को भेजा गया था। लेकिन अलग-अलग बैंकों की नोडल एजेंसियों से जानकारी लेने में तीन से पांच दिन लग जाते हैं। कई बार दूसरे राज्यों की पुलिस से भी मदद लेनी पड़ती है। इससे जांच की रफ्तार धीमी हो जाती है।
टेलीग्राम और फर्जी खातों का इस्तेमाल
कोर्ट को बताया गया कि साइबर अपराधी अब मासूम लोगों के नाम पर खुले बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपसी बातचीत के लिए वे टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का सहारा लेते हैं। आरोपियों तक पहुंचने के लिए आईपी (IP – Internet Protocol) लॉग और सब्सक्राइबर डिटेल जैसी तकनीकी जानकारी कई एजेंसियों से लेनी पड़ती है। जब तक यह जानकारी मिलती है, आरोपी ठिकाना बदल लेते हैं। वे रकम निकाल लेते हैं और सबूत भी मिटा देते हैं।
मुख्य संदिग्ध असम में मिला
जांच के दौरान जबलपुर पुलिस को मुख्य संदिग्ध की लोकेशन असम में मिली। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने असम के डीजीपी को भी पक्षकार बनाने की मांग की। कोर्ट ने यह मांग मान ली। अब असम पुलिस को भी जवाब देना होगा।
RBI और गृह मंत्रालय भी होंगे शामिल
हाईकोर्ट ने भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल और RBI के वकील को आदेश की कॉपी देने को कहा है। इससे वे जरूरी निर्देश लेकर अगली सुनवाई में कोर्ट की मदद कर सकेंगे। गृह मंत्रालय, RBI और दूरसंचार विभाग को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट चाहता है कि सभी संबंधित विभाग मिलकर समाधान निकालें।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के डीजीपी को 21 जुलाई 2026 को कोर्ट में पेश होने को कहा है। उन्हें जांच की पूरी स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी। इसी दिन मामले की अगली सुनवाई भी होगी। यह फैसला साइबर ठगी के खिलाफ देशभर में एक मिसाल बन सकता है।
FAQ
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 3 राज्यों के DGP को क्यों तलब किया है?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर की एक बुजुर्ग महिला से हुई 6.24 लाख रुपये की साइबर ठगी (Cyber Fraud) के मामले में पुलिस की लचर और धीमी जांच पर नाराजगी जताते हुए पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के पुलिस महानिदेशक (DGP) को तलब किया है। - क्रेडिट कार्ड अपडेट (Credit Card Update) के नाम पर होने वाली साइबर ठगी से कैसे बचें?
किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा कभी भी फोन, एसएमएस या टेलीग्राम पर क्रेडिट कार्ड अपडेट करने के लिए गोपनीय पिन, ओटीपी या सीवीवी नहीं मांगा जाता। यदि आपके पास ऐसा कोई कॉल आता है, तो तुरंत फोन काट दें और अपनी नजदीकी बैंक शाखा या आधिकारिक साइबर सेल (Cyber Cell) से संपर्क करें।
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