जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, 126 चिकित्सा संस्थानों के पंजीयन निरस्त, CMHO की कार्रवाई से हड़कंप
News in short
- जबलपुर के 5 निजी अस्पतालों और 121 क्लीनिकों के रजिस्ट्रेशन निरस्त किए गए।
- 1 अप्रैल 2026 से इन सभी संस्थानों की संचालन अनुमति आधिकारिक रूप से समाप्त।
- नवीनीकरण (Renewal) न कराना और निरीक्षण के दौरान मापदंडों में कमी मिलना मुख्य कारण।
- नए मरीजों की भर्ती पर तत्काल रोक, पुराने मरीजों को डिस्चार्ज करने के निर्देश।
- बिना वैध पंजीयन अस्पताल चलाने पर 'मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट' के तहत होगी जेल।
Intro
जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग ने नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने कड़ा रुख अपनाते हुए 5 निजी अस्पतालों और 121 क्लीनिकों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद जिले के चिकित्सा जगत में खलबली मच गई है।
News in detail
नियमों की कसौटी पर फेल हुए बड़े अस्पताल
जबलपुर में कुल 126 अस्पतालों और क्लिनिको स्वास्थ्य विभाग ने कड़ी कार्यवाही की है। जबलपुर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए कुल 55 अस्पतालों का नवीनीकरण प्रस्तावित था। इनमें से कई अस्पताल शासन के तय मापदंडों पर खरे नहीं उतरे।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं संस्थानों को काम जारी रखने की अनुमति दी गई है जिन्होंने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से समय पर आवेदन किया और निरीक्षण में सभी चिकित्सा मानकों को पूरा किया।
पंजीयन निरस्त होने के बाद बंद हुये ये बड़े अस्पताल
विभागीय लिस्ट के अनुसार, जिन अस्पतालों के पंजीयन निरस्त हुए हैं, उनके पीछे अलग-अलग कारण रहे जैसे बटालिया आई हॉस्पिटल और सरकार हॉस्पिटल ने स्वयं ही बंद करने का आवेदन दिया था।
- नामदेव नर्सिंग होम ने रिन्यूअल के लिए आवेदन ही नहीं किया।
- एस.सी. गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल में निरीक्षण के दौरान पर्याप्त स्टाफ ही मौजूद नहीं था।
- संकल्प हॉस्पिटल का नगर निगम (NNJ) से बिल्डिंग परमिशन का विवाद सामने आया।
क्लीनिकों की लंबी फेहरिस्त पर चला 'हंटर'
सिर्फ बड़े अस्पताल ही नहीं, बल्कि शहर में चल रहे क्लीनिकों पर भी कड़ी कार्रवाई हुई है। जिले के 240 क्लीनिकों में से 121 पर ताला लटक गया है। इनमें से 89 ने तो रिन्यूअल के लिए आवेदन तक नहीं किया, जबकि 32 क्लीनिकों के दस्तावेज अधूरे या फर्जी पाए गए।
'ए.ए. अंसारी', 'आदर्श क्लीनिक', और 'अधुनानिक डेंटल क्लीनिक' सहित शहर के कई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर पर भी कार्यवाही करते हुए कुल 121 संस्थानों की सूची जारी कर उन्हें तत्काल बंद करने को कहा गया है।
मरीजों से जुड़ा सख्त निर्देश, अब नहीं होगी नई भर्ती
CMHO ने आदेश दिया है कि जिन संस्थानों के पंजीयन रद्द हुए हैं, वे तत्काल प्रभाव से किसी भी नए मरीज को भर्ती नहीं करेंगे। जो मरीज पहले से भर्ती हैं, उनका समुचित उपचार कर उन्हें जल्द से जल्द डिस्चार्ज करना होगा। इसके अलावा, इन अस्पतालों को अपने भवन के बाहर लगे साइन बोर्ड और नाम-पट्टिका को भी तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आम जनता भ्रमित न हो।
गलती सुधारने का एक आखिरी मौका
प्रशासन ने उन क्लीनिक संचालकों को थोड़ी राहत भी दी है जो समय सीमा में आवेदन नहीं कर पाए थे। यदि वे अभी भी संचालन चाहते हैं, तो उन्हें 'MP Online' के माध्यम से पुनः आवेदन करना होगा।
हालांकि, दोबारा संचालन तभी शुरू हो पाएगा जब स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर जाकर संतुष्ट होगी कि वहां मरीजों के लिए सभी सुरक्षा और स्वास्थ्य मानक मौजूद हैं। बिना अनुमति बोर्ड लगाकर क्लीनिक चलाने वालों पर कानूनी केस दर्ज किया जाएगा।
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