जबलपुर हाईकोर्ट बार चुनाव पर आज एक्टिंग चीफ जस्टिस करेंगे फैसला
समझें क्या है पूरा मामला...
- जबलपुर हाईकोर्ट बार चुनाव को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है।
- बार के कार्यकाल और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
- मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों की जांच हुई है।
- करीब 500 नाम सूची से हटने के बाद मामला गंभीर हुआ है।
- आज एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच इस विवाद पर सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट बार चुनाव पर आज सुनवाई
जबलपुर में हाईकोर्ट बार चुनाव को लेकर आज बड़ा दिन है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इस मामले पर अहम सुनवाई करेगा। मामला अब एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच के सामने पहुंचेगा। इससे चुनाव को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
पिछली सुनवाई में वोटर लिस्ट पर अपडेट
बता दें कि इस मामले की पिछली सुनवाई तीन अगस्त को हुई थी। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच बैठी थी। सुनवाई में मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट आया था।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कोर्ट को इसकी जानकारी दी। रिटर्निंग ऑफिसर ने मतदाता सूची की जांच की थी। जांच के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव किया गया। पहले सूची में करीब 3560 सदस्य बताए गए थे।
वहीं जांच के बाद यह संख्या करीब 3004 रह गई। यानी करीब 556 नाम सूची से हटाए गए। इससे यह सामने आ गया की वोटर लिस्ट को चुनौती देने के पहले उसमें बड़ी संख्या में गलत नाम जुड़े हुए थे।
OBC संगठन ने दायर की याचिका
यह मामला ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उठाया है। इस संबंध में रिट याचिका 25975/2026 दाखिल हुई है।याचिका में दोनों बार एसोसिएशन पर सवाल उठे हैं। याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां बताई हैं।
मामले में मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल भी पक्षकार है। याचिका में शुरुआती मतदाता सूची पर सवाल उठाए गए थे। सूची में सदस्यों की तस्वीर और पते नहीं होने का आरोप था।
बकाया राशि जमा करने के लिए कम समय देने की बात हुई। याचिका में केवल नकद भुगतान पर भी सवाल उठे। डिजिटल भुगतान की सुविधा नहीं देने का आरोप लगाया गया।
स्टेट बार काउंसिल ने क्या जवाब दिया
स्टेट बार काउंसिल ने याचिका खारिज करने की मांग की। काउंसिल ने याचिकाकर्ता के संगठन पर भी सवाल उठाए। उसने संगठन के पंजीकरण की जानकारी मांगी है। काउंसिल ने बार एसोसिएशन से संबंध भी पूछा है। उसके अनुसार चुनाव प्रक्रिया अब आगे बढ़ चुकी है।
स्टेट बार काउंसिल ने चुनाव प्रक्रिया का हवाला दिया। काउंसिल ने कहा कि चुनाव के बाद शिकायत की जा सकती है। इसके लिए ट्रिब्यूनल में जाने का रास्ता बताया गया। याचिकाकर्ता ने इससे अलग राहत की मांग की है। अब कोर्ट को इसी विवाद पर भी फैसला करना है।
वन बार वन वोट की मांग
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार गुप्ता भी जुड़े हैं। उन्होंने हस्तक्षेप आवेदन के जरिए अपनी बात रखी है। आवेदन में वन बार वन वोट की मांग की गई। इस नियम से एक वकील एक ही बार में वोट कर सकेगा।
इससे दोहरी सदस्यता और दोहरे वोट पर रोक लगेगी। दरअसल जबलपुर में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन जैसे अलग-अलग संगठन रजिस्टर्ड है। हस्तक्षेपकर्ताओं की मांग है कि एक वकील एक ही बार में वोट करें।
हस्तक्षेप आवेदन में डिजिटल भुगतान पर भी जोर दिया गया। बार फीस के भुगतान में पारदर्शिता की मांग हुई। मतदाता सूची में नियमित वकीलों को रखने की बात कही गई। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया गया। अब इन मांगों पर कोर्ट का रुख अहम रहेगा।
पुराने अध्यक्ष के इस्तीफे का मामला भी उठा
याचिका में हाईकोर्ट बार के तत्कालीन अध्यक्ष का जिक्र है। बताया गया कि उन्हें अवमानना नोटिस मिला था। इसके बाद अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया था। याचिका में इससे पद खाली होने की बात कही गई। इस मुद्दे को भी चुनाव विवाद से जोड़ा गया है।
अब आज की सुनवाई पर टिकी नजर
तीन अगस्त को कोर्ट ने जवाब के लिए समय दिया था। प्रतिवादियों को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना है।
मामले की गंभीरता देखते हुए सुनवाई बदली गई। अब मामला चीफ जस्टिस की बेंच के सामने जाएगा।
आज 11 अगस्त को इसी मामले पर सुनवाई होगी। सबसे बड़ा सवाल चुनाव कराने को लेकर है। कोर्ट मतदाता सूची की स्थिति भी देख सकता है। बार एसोसिएशन के कार्यकाल पर भी बात हो सकती है। चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर भी सवाल है। आज की सुनवाई आगे की दिशा तय कर सकती है।
वकीलों की नजर आज के फैसले पर
जबलपुर के वकीलों के बीच इस मामले की चर्चा है। बार चुनाव विवादों में घिरा है। आज की सुनवाई से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। सबकी नजर एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच पर टिकी है। अदालत के अगले आदेश से चुनाव की राह साफ होगी।
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