बिना नोटिस सीनियर एडवोकेट का WhatsApp अकाउंट बैन, मेटा और व्हाट्सएप के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची याचिका
बिना नोटिस WhatsApp अकाउंट किया बैन
जबलपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह ने WhatsApp LLC और भारत संघ के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके प्राथमिक WhatsApp अकाउंट को बिना किसी पूर्व चेतावनी, कारण बताओ नोटिस या कथित नियम उल्लंघन की जानकारी दिए अचानक प्रतिबंधित कर दिया गया। उनका कहना है कि वे इस नंबर का इस्तेमाल वर्षों से अपनी कानूनी प्रैक्टिस, केस मैनेजमेंट, ब्रीफिंग और क्लाइंट से संवाद के लिए कर रहे थे।
23 अगस्त को अकाउंट बैन, अपील का भी जवाब नहीं
याचिका के मुताबिक, 23 अगस्त 2026 को उनके प्राथमिक मोबाइल नंबर से जुड़े WhatsApp अकाउंट पर प्रतिबंध लगाया गया। उसी दिन उन्होंने WhatsApp के इन-ऐप शिकायत और समीक्षा तंत्र के जरिए अपील की। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसके बावजूद कई दिनों तक न तो अकाउंट बहाल किया गया और न ही प्रतिबंध लगाने का कारण बताया गया। उन्होंने इसे सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत शिकायत निवारण की समय-सीमा का उल्लंघन बताया है।
काम ठप हुआ तो दूसरा नंबर लिया, वह भी बैन
याचिका में बताया गया है कि कानूनी काम प्रभावित होने के कारण मृगेंद्र सिंह ने नया सिम लेकर दूसरे मोबाइल नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया। आरोप है कि 4 अक्टूबर 2026 को इस नए WhatsApp अकाउंट को भी प्रतिबंधित और निलंबित कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि एक के बाद दूसरे अकाउंट पर कार्रवाई होने से उनकी पेशेवर गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
लीगल नोटिस भी भेजा, फिर भी नहीं हुई बहाली
मृगेंद्र सिंह की ओर से अधिवक्ता गुंचा रसूल ने WhatsApp LLC के शिकायत अधिकारी को 2 सितंबर 2026 को लीगल नोटिस भेजा था। इसमें दोनों अकाउंट तत्काल बहाल करने, प्रतिबंध से संबंधित तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट देने और 50 हजार रुपए के पेशेवर नोटिस खर्च का भुगतान करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि नोटिस के बावजूद WhatsApp की ओर से न तो संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही अकाउंट बहाल किए गए।
याचिका में संविधान के इन अधिकारों का दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने WhatsApp की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 से जुड़े अधिकारों के खिलाफ बताया है। उनका तर्क है कि आधुनिक कानूनी पेशे में तेज डिजिटल संचार बेहद जरूरी है। WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म की पहुंच अचानक बंद होने से अधिवक्ता की पेशेवर गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
WhatsApp पर लगाए मनमानी और प्रतिष्ठा प्रभावित करने के आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना कारण बताए बार-बार अकाउंट प्रतिबंधित करने से ऐसा संदेश जाता है कि वरिष्ठ अधिवक्ता किसी अवैध गतिविधि या स्पैमिंग में शामिल हैं। इसे याचिकाकर्ता ने अपनी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। साथ ही उन्होंने WhatsApp की भारत में एक बड़े डिजिटल संचार प्लेटफॉर्म के रूप में स्थिति का भी उल्लेख किया है।
हाईकोर्ट से दोनों अकाउंट तुरंत बहाल करने की मांग
रिट याचिका में मृगेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट से WhatsApp LLC को दोनों मोबाइल नंबरों से जुड़े अकाउंट की पूर्ण पहुंच और कार्यक्षमता तत्काल बहाल करने का निर्देश देने की मांग की है। इसके अलावा भारत संघ को आईटी नियमों का पालन नहीं करने पर WhatsApp के खिलाफ उचित नियामक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है।
अंतरिम राहत भी मांगी
याचिकाकर्ता ने मामले की सुनवाई पूरी होने तक दोनों WhatsApp अकाउंट को अंतरिम रूप से बहाल करने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि तत्काल बहाली जरूरी है, क्योंकि WhatsApp उनके पेशेवर और न्यायिक काम से जुड़े संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। कोर्ट में याचिका एक्सेप्ट कर ली गई है और इसकी सुनवाई आगामी एक-दो दिनों में हो सकती है।
मृगेंद्र सिंह जबलपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते हैं। उन्होंने अपनी याचिका में बताया है कि WhatsApp उनके पेशेवर कामकाज का प्रमुख संचार माध्यम रहा है। अब उन्होंने इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई कार्रवाई को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।