जबलपुर में न्याय और सत्ता का संगम, सीएम मोहन यादव और चीफ जस्टिस कोगजे का अभिनंदन, जस्टिस रूसिया ने जमाया रंग

Neel Tiwari | Oct 30, 2026, 23:13 IST
जबलपुर में चीफ जस्टिस और सीएम के अभिनंदन समारोह में न्यायपालिका और सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुए।
Representatives from the judiciary and the government attended a felicitation ceremony for Chief Justice Alpesh Yeshwant Kogje and Chief Minister Dr. Mohan Yadav in Jabalpur.
जबलपुर में शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सम्मान में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। होटल शॉन एलिजे में हुए इस कार्यक्रम में न्यायपालिका और सरकार से जुड़े कई बड़े चेहरे शामिल हुए। इस दौरान न्याय और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को लेकर बातचीत हुई।

वहीं, जस्टिस विवेक रूसिया की मजेदार बातों ने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया और लोग हंस पड़े।



समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, हाई कोर्ट के न्यायाधीश, जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा हुई कि न्यायपालिका और सरकार मिलकर बेहतर तरीके से कैसे काम कर सकती हैं। साथ ही संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारियों और आम लोगों को समय पर न्याय दिलाने जैसे अहम मुद्दों पर भी बात हुई।



न्याय और प्रशासन के बीच तालमेल का संदेश

समारोह में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में न्यायपालिका और कार्यपालिका की अपनी-अपनी भूमिका है। दोनों के बीच संवाद और आपसी सम्मान जरूरी है। शासन की जिम्मेदारी विकास और जनकल्याण की योजनाओं को लागू करना है, जबकि न्यायपालिका संविधान और कानून के मुताबिक न्याय सुनिश्चित करती है। वक्ताओं का कहना था कि इन दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल से आम नागरिकों को लाभ मिलता है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के गुजरात हाई कोर्ट से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक के न्यायिक सफर और उनके अनुभव का भी उल्लेख किया गया।



मुख्यमंत्री बोले, चीफ जस्टिस के अनुभव से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह में चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का स्वागत किया और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। सीएम ने कहा कि प्रदेश के लोगों को बिना किसी भेदभाव के आसानी से और समय पर न्याय दिलाने में न्यायपालिका की अहम भूमिका है।



उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका के बीच अच्छा तालमेल होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि चीफ जस्टिस कोगजे के लंबे न्यायिक अनुभव का फायदा मध्य प्रदेश को मिलेगा। इससे आम लोगों को न्याय मिलने की प्रक्रिया और बेहतर हो सकेगी।



महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने गिनाए दो बड़े मुखिया

कार्यक्रम में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री और चीफ जस्टिस को प्रदेश की दो अहम संवैधानिक व्यवस्थाओं का प्रमुख बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और सरकार के बीच बातचीत और अच्छा तालमेल होना जरूरी है। अपने भाषण में उन्होंने दोनों की जिम्मेदारियों और उनकी भूमिका पर बात की। हालांकि, उनके भाषण के बाद मंच से कुछ ऐसी मजेदार बात कही गई कि समारोह का गंभीर माहौल हल्का-फुल्का हो गया।



जस्टिस विवेक रूसिया की चुटकी, मंच पर और भी मुखिया बैठे हैं!

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के बाद जब जस्टिस विवेक रूसिया बोलने आए, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में ऐसी बात कही कि हॉल में मौजूद लोग मुस्कुरा उठे। उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता ने तो सिर्फ दो बड़े पदों पर बैठे लोगों की बात की, जबकि मंच पर कई और खास लोग भी मौजूद हैं।



जस्टिस रूसिया ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह 'अन्नू' और बार एसोसिएशन के अध्यक्षों और पदाधिकारियों का भी जिक्र किया। उनकी इस बात पर पूरे हॉल में हंसी गूंज उठी। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह संदेश दिया कि किसी कार्यक्रम की अहमियत सिर्फ बड़े पदों पर बैठे लोगों से नहीं, बल्कि उसमें शामिल सभी लोगों से होती है।



कोर्ट में बेबाक, मंच पर बोलने, माइक और मालाओं से घबराते हैं!

जस्टिस विवेक रूसिया ने अपनी अगली बात से लोगों को खूब हंसाया। उन्होंने अपनी और चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे की तुलना करते हुए कहा कि कोर्ट में वे गंभीर मामलों पर खुलकर बोलते हैं। कानून और मुकदमों को लेकर लंबी चर्चा भी करते हैं। लेकिन जब किसी बड़े कार्यक्रम में मंच से बोलना होता है, तो बात अलग हो जाती है।



उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें माइक और मालाओं से घबराहट होती है। ऐसे मौकों पर उनके लिए ज्यादा बोलना मुश्किल हो जाता है। उनकी यह बात सुनकर हॉल में मौजूद लोग हंस पड़े और तालियां बजाने लगे।



चीफ जस्टिस कोगजे बोले, बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो अनिवार्य स्तंभ

अपने स्वागत और सम्मान के लिए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने कार्यक्रम में मौजूद सभी मेहमानों, साथी जजों, महाधिवक्ता और वकीलों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में सभी के बीच आकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, जस्टिस विवेक रूसिया और दूसरे लोगों से मिले प्यार और सम्मान ने उन्हें भावुक कर दिया।



चीफ जस्टिस ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में वकीलों और अदालतों, दोनों की अहम भूमिका होती है। वकीलों को बार और अदालत को बेंच कहा जाता है। दोनों का काम अलग-अलग है, लेकिन मकसद एक ही है। संविधान की रक्षा करना, लोगों के अधिकारों को सुरक्षित रखना और सभी को बिना किसी डर, भेदभाव या देरी के न्याय दिलाना। उन्होंने कहा कि यह वकीलों और अदालतों, दोनों की साझा जिम्मेदारी है।



मतभेद हों, लेकिन पेशेवर सम्मान और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहे

चीफ जस्टिस कोगजे ने कहा कि वकीलों और जजों के बीच आपसी सम्मान, भरोसा और ईमानदारी होना जरूरी है। दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए। कोर्ट में किसी मामले की सुनवाई के दौरान उनकी राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इससे आपसी सम्मान और व्यवहार पर असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि वकीलों और जजों का मकसद एक ही है, लोगों को सही और निष्पक्ष न्याय दिलाना। इसलिए दोनों के बीच अच्छी बातचीत और बेहतर तालमेल बना रहना चाहिए।



महाधिवक्ता का कार्यालय नए वकीलों के लिए विश्वविद्यालय जैसा

चीफ जस्टिस कोगजे ने अपने भाषण में महाधिवक्ता कार्यालय की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह कार्यालय न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा है। महाधिवक्ता का काम सिर्फ कोर्ट में सरकार का पक्ष रखना नहीं, बल्कि वकीलों और जजों के बीच अच्छा तालमेल बनाए रखना भी है। उन्होंने कहा कि महाधिवक्ता प्रशांत सिंह इस जिम्मेदारी को अच्छे तरीके से निभा रहे हैं।



चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता और सरकारी वकीलों के कार्यालय को एक तरह का विश्वविद्यालय बताया। उन्होंने कहा कि यहां नए वकीलों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। वे अनुभवी वकीलों से काम करने का तरीका सीखते हैं और अपनी काबिलियत बढ़ाते हैं। इससे उनके काम के साथ-साथ उनके व्यवहार और व्यक्तित्व में भी सुधार होता है।



चीफ जस्टिस ने अपने गृह राज्य में इस कार्यालय से मिले अनुभव को भी याद किया। साथ ही युवा वकीलों को अपनी जिम्मेदारी समझकर बेहतर काम करने और भविष्य में न्याय व्यवस्था में अच्छा योगदान देने की शुभकामनाएं दीं।



औपचारिक अभिनंदन के बीच दिखा न्यायिक जगत का मानवीय चेहरा

इस समारोह में न्यायपालिका और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को लेकर गंभीर बातें हुईं, तो जस्टिस विवेक रूसिया की मजेदार टिप्पणियों ने लोगों को खूब हंसाया। उन्होंने महाधिवक्ता के भाषण पर हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी ली। साथ ही यह भी बताया कि कोर्ट में खुलकर बोलने के बावजूद बड़े कार्यक्रमों में माइक के सामने बोलने से उन्हें घबराहट होती है। उनकी ये बातें समारोह के यादगार पलों में शामिल रहीं।



वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोगों को समय पर न्याय दिलाने और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की बात कही। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने भी वकीलों और जजों के बीच अच्छे संबंध, स्वतंत्र रूप से काम करने और बिना किसी भेदभाव के न्याय दिलाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में न्यायपालिका, सरकार और प्रशासन से जुड़े कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे। सभी की मौजूदगी और हल्के-फुल्के माहौल ने जबलपुर में हुए इस समारोह को खास बना दिया।

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